- मुस्लिम समाज का कहना है कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत डमी नमाज़ करवाई और धोखा दिया है
- मुस्लिम समाज अब इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल कर पुनः अदालत जाने का निर्णय कर चुका है
- जिला प्रशासन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नमाज़ शांतिपूर्ण और निर्धारित स्थान पर अदा की गई थी
क्या कभी किसी ने कब्रिस्तान में नमाज़ अदा की है? इसी सवाल के साथ पश्चिमी मध्य प्रदेश के संवेदनशील शहर धार में भोजशाला-कमाल मौलाना परिसर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जिस दिन को प्रशासन ने शांति, सौहार्द और संवैधानिक जिम्मेदारी की मिसाल बताया, उसी दिन मुस्लिम समुदाय ने धोखाधड़ी, ‘डमी नमाज़' और अब सुप्रीम कोर्ट की अवमानना जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए दोबारा अदालत जाने का ऐलान कर दिया. मुस्लिम समाज का आरोप है कि उन्हें नमाज़ के लिए जिस स्थान पर भेजा गया, वह वक्फ की कब्रिस्तान (कब्रिस्तान) भूमि है और यह न सिर्फ धार्मिक रूप से अस्वीकार्य है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के भी खिलाफ है.

यह सीधा-सीधा धोखा है
इस आरोप की अगुवाई कर रहे अब्दुल समद, मुस्लिम सोसायटी के अध्यक्ष और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के चेयरमैन, ने शुक्रवार की घटनाओं को “निंदनीय और छलपूर्ण” बताया.उन्होंने कहा कि प्रशासन ने एएसआई के जिस नक्शे के आधार पर हमें नमाज़ की जगह बताई, वह सर्वे नंबर 317, 316, 312, 912 और 918 पर पड़ती है और ये सभी वक्फ की कब्रिस्तान भूमि हैं. आप हमें कब्रिस्तान में नमाज़ पढ़ने को कह रहे हैं. यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है?”
इसी वजह से हमारा गंभीर ऑब्जेक्शन है और हम इस मामले में कोर्ट जाकर अवमानना याचिका (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) दाखिल करेंगे. हमारी आपत्ति इस बात को लेकर है कि नमाज़ परिसर के भीतर हमारे निर्धारित स्थान पर हो. एएसआई द्वारा दिया गया नक्शा पूरी तरह गलत है, जिसे हमने उसी बैठक में कलेक्टर के सामने स्पष्ट किया था और लिखित रूप में पूरे सबूतों के साथ दिया था. खाता-खसरा सर्वे नंबर 317, 316, 312, 912 और 918 ये सभी वक्फ कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं. आप हमसे कब्रिस्तान में नमाज़ अदा करने को कह रहे हैं. तो यह बताइए कि कब्रिस्तान में आज तक कौन-सी नमाज़ अदा हुई है?

इसी बुनियाद पर हमारी आपत्ति थी. हम कब्रिस्तान में नमाज़ नहीं पढ़ेंगे. हमारी जगह परिसर के भीतर, चहारदीवारी के अंदर है और हमने सिर्फ़ इतना निवेदन किया था कि हमें वहीं नमाज़ करने दी जाए. हमने पूरा सहयोग देने की बात कही थी, यहाँ तक कहा था कि हम अपनी तादाद भी कम करेंगे. इसके बावजूद प्रशासन ने हमें धोखा दिया और हमारे साथ डमी नमाज़ अदा कराई गई. इसी कारण हम दोबारा कोर्ट का रास्ता अपनाने जा रहे हैं.

अब मुस्लिम समाज ने अवमानना याचिका दायर करने का फैसला किया
इस विवाद की चिंगारी पहले ही इमरान खान के वायरल वीडियो से भड़क चुकी थी. गुलमोहर कॉलोनी निवासी इमरान का आरोप है कि गुरुवार रात प्रशासन और पुलिस उन्हें सुरक्षा के बहाने अपने साथ ले गई और भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को भोजशाला–कमाल मौलाना परिसर में नमाज़ पढ़ने दी जाएगी.वीडियो में इमरान कहते हैं कि 1:40 बज चुके हैं, कोई अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया. रोशनी पाटीदार और आनंद तिवारी हमें यहां लाए थे. अब पीछे डमी नमाज़ का वीडियो बनाया जा रहा है. हमें नहीं पता ये लोग कौन हैं. कोर्ट का आदेश नहीं माना गया.
जब इन आरोपों पर धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से सवाल किया गया, तो उन्होंने फिर कहा कि बसंत पंचमी शुक्रवार के सारे काम सर्वोच्च अदालत के निर्देश के अनुसार हुए .यह पूरा विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि बसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ का वही संयोग जिसने 2013 और 2016 में हिंसा कराई थी, इस बार पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.कड़ी सुरक्षा के बीच हज़ारों हिंदू श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की.

हिंदू पक्ष इस स्थल को राजा भोज द्वारा स्थापित 11वीं सदी का भोजशाला मंदिर और संस्कृत महाविद्यालय मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद के रूप में देखता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार प्रशासन की सराहना की और इसे सौहार्द का उदाहरण बताया.हालांकि, ‘डमी नमाज़', कब्रिस्तान की ज़मीन, सामने आए वीडियो और अवमानना याचिका की तैयारी ने यह साफ कर दिया है कि उस दिन भले एक भी पत्थर नहीं चला, लेकिन भोजशाला-कमाल मौलाना विवाद की दरारें अब भी गहरी हैं. धार में शांति तो रही, पर सहमति और विश्वास नहीं.
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