सोमवार को महाकाल की नगरी उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर जो बवाल हुआ उसने पूरे देश का ध्यान खींचा...सवाल ये है कि आखिर हालात इतने बिगड़े क्यों जबकि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के सिर्फ एक हिस्से को हटाया जाना था और उस पर भी रविवार रात को सहमति बन चुकी थी. दरअसल पुलिस की जांच में शाही मस्जिद को लेकर अचानक उपजे तनाव के पीछे सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से फैलाई गई अफवाहों का एक बड़ा खेल सामने आया है. कुछ इंफ्लुएंसर्स ने पूरी मस्जिद गिराए जाने के फर्जी और भ्रामक AI जनरेटेड वीडियो वायरल कर दिए. इन वीडियो और पोस्टों के चलते लोगों में भारी भ्रम फैल गया. देखते ही देखते रविवार रात से ही मौके पर भीड़ जुटने लगी और सोमवार सुबह होते-होते यह तनाव पथराव और झड़प में बदल गया. स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा.क्या पूरा मामला जानिए इस रिपोर्ट में
#WATCH | Ujjain, Madhya Pradesh: Operation to remove a portion of the Shahi Masjid set to resume today amid heavy security deployment.
— ANI (@ANI) September 29, 2026
Yesterday, the situation was tense in the area as clashes between a crowd and Police took place after stone pelting incidents. Police used tear… pic.twitter.com/iox39JDkWb
सोशल मीडिया पर माहौल बनाने का खेल
पुलिस जांच में सामने आया है कि उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर यह विवाद अचानक नहीं भड़का था. कार्रवाई से कई दिन पहले से ही सोशल मीडिया पर माहौल तैयार किया जाने लगा था. अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई इंफ्लुएंसर्स ने रील्स और वीडियो पोस्ट करने शुरू कर दिए, जिनमें मस्जिद को बचाने की भावनात्मक अपील की जा रही थी.इसी दौरान कुछ ऐसे एआई (AI) जनरेटेड वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए गए, जिनमें पूरी शाही मस्जिद को जमींदोज होते दिखाया गया. साथ ही जेसीबी (JCB) की भ्रामक तस्वीरें और फर्जी वीडियो भी फैलाए गए. जबकि जमीनी हकीकत यह थी कि वास्तविक कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने तक सीमित थी.
भ्रम फैला और उमड़ पड़ी भीड़
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इन फर्जी वीडियो और पोस्टों के कारण आम लोगों के बीच भ्रम और डर फैल गया. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा होने लगे. रविवार रात से ही लोगों के जुटने का सिलसिला शुरू हो चुका था. सोमवार सुबह जब कार्रवाई की खबर फैली तो भीड़ का हुजूम और ज्यादा बढ़ गया.मौके पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के बीच हालात बेकाबू हो गए और भीड़ की तरफ से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया. हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और उपद्रवियों को पीछे खदेड़ा. कुछ देर के लिए लगा कि माहौल शांत हो गया है, लेकिन जब दोबारा तनाव बढ़ने लगा तो पुलिस को उपद्रवियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा. पुलिस और प्रशासन ने अब तक इस मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए 8 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं और 15 लोगों को हिरासत में लिया है. सख्त कार्रवाई के तहत सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने वाले 5 इंफ्लुएंसर्स को भी नामजद कर आरोपी बनाया गया है.
मस्जिद कमेटी की सकारात्मक पहल
तनाव के बीच अब सकारात्मक तस्वीर यह सामने आई है कि मस्जिद कमेटी और मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोग खुद आगे आकर सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने के काम में जुटे हुए हैं. प्रशासन की ओर से पुष्टि की गई है कि अब यह काम शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है. एहतियात के तौर पर गोपाल मंदिर और शाही मस्जिद के आसपास के पूरे इलाके को बैरिकेडिंग लगाकर पूरी तरह से बंद और सील कर दिया गया है ताकि कोई दोबारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश न कर सके.
AI और इंफ्लुएंसर्स पर उठे गंभीर सवाल
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल सोशल मीडिया और इंफ्लुएंसर्स की गैर-जिम्मेदाराना भूमिका को लेकर खड़ा हुआ है. एक तरफ जहां जमीनी स्तर पर वास्तविक तस्वीर बिल्कुल सामान्य विकास कार्य की थी, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उसे एक सनसनीखेज और धार्मिक मुद्दे की तरह पेश किया गया. इन दोनों के बीच के भारी अंतर ने पूरे माहौल को बेहद संवेदनशील और विस्फोटक बना दिया.उज्जैन जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी तरह की अफवाह, फर्जी तस्वीरों और एआई जनरेटेड वीडियो पर कतई भरोसा न करें और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें.
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