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20 days ago

Bhojshala Mandir Verdict: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला पर बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर करार दिया है. शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुसलमानों को भोजशाला परिसर पर नमाज की इजाजत दी गई थी. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर माना. इसके साथ ही, अदालत ने हिंदू पक्ष के दावे को स्वीकार किया. कोर्ट ने कहा कि इस इमारत का धार्मिक स्वरूप एक मंदिर का है और मुसलमान मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह जमीन के लिए अर्जी दे सकते हैं.

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राम मंदिर अयोध्या की तरह क्या धार भोजशाला मामले में भी मस्जिद के लिए मिलेगी जमीन? जानिए वकील ने क्या कहा | Bhojshala Case Verdict MP High Court Bhojshala namaz ban alternate land Mosque Saraswati Mandir masjid Vivad hindu Muslim Paksha Supreme Court

Bhojshala Verdict: धार भोजशाला विवाद पर आया हाईकोर्ट का यह फैसला कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. जहां एक ओर हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिला है, वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक जमीन की संभावना छोड़ी गई है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती मिलती है या राज्य सरकार इस पर आगे क्या निर्णय लेती है.

भोजशाला: 1000 साल का सफर, इन कड़ियों को जोड़कर अदालत ने आज मंदिर के पक्ष में सुनाया फैसला | dhar bhojshala saraswati temple kamal maula mosque history 1000 years journey

Dhar Bhojshala Controversy: धार की ऐतिहासिक भोजशाला का 1000 साल पुराना सफर, जो कभी विद्या का मंदिर था और आज विवादों के केंद्र में है. जानिए कैसे यह परिसर सरस्वती मंदिर और कमाल मौला मस्जिद के बीच कानूनी लड़ाई का हिस्सा बना. पत्थरों पर उकेरी गई इस विरासत की पूरी दास्तान और मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी.

Bhojshala Mandir LIVE Updates: उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस आदेश को रद्द कर देगा- असदुद्दीन ओवैसी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला पर बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर करार दिया है. HC के इस फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुलझाएगा और इस आदेश को रद्द कर देगा

Bhojshala Mandir LIVE Updates: भोजशाला पर इंदौर HC का आया फैसला, क्या है लोगों की प्रतिक्रिया?

Bhojshala Mandir LIVE Updates: नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया: अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

धार-भोजशाला मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है. इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है. लंदन के एक संग्रहालय में रखी हमारी मूर्ति को वापस लाने की मांग के संबंध में, न्यायालय ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है. इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है. न्यायालय ने हमें पूजा-पाठ करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है. एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है. अब से वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी.

Bhojshala Mandir Verdict LIVE: काजी वकार सादिक बोले- फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे

धार भोजशाला मामले के फैसले पर धार शहर के काजी वकार सादिक ने कहा कि हम अपने खिलाफ दिए गए फैसले की समीक्षा करेंगे. हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

Bhojshala Mandir Verdict LIVE: 'भोजशाला मंदिर है', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नमाज की अनुमति से जुड़ा आदेश रद्द

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला पर बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर करार दिया है. शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुसलमानों को भोजशाला परिसर पर नमाज की इजाजत दी गई थी. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर माना. इसके साथ ही, अदालत ने हिंदू पक्ष के दावे को स्वीकार किया. कोर्ट ने कहा कि इस इमारत का धार्मिक स्वरूप एक मंदिर का है और मुसलमान मस्जिद के लिए किसी दूसरी जगह जमीन के लिए अर्जी दे सकते हैं.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद का विवादित इलाका एक संरक्षित स्मारक माना गया है. भोजशाला परिसर और कमल मौला मस्जिद के विवादित इलाके का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जिसमें देवी सरस्वती का मंदिर है."

कोर्ट ने पाया कि इस जगह पर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर था और ऐतिहासिक साहित्य से यह साबित होता है कि यह जगह संस्कृत सीखने का एक केंद्र थी. अदालत ने उन याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया, जिनमें भोजशाला परिसर को हिंदुओं के लिए वापस दिलाने और मुसलमानों को इसके परिसर में नमाज पढ़ने से रोकने की मांग की गई थी.

हाईकोर्ट के फैसले पर एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "भोजशाला केस में हाईकोर्ट का बहुत अहम और ऐतिहासिक फैसला आया है. कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर का परिसर घोषित किया है. कोर्ट ने हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार भी दिया है."

उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के आदेश को भी खारिज किया है, जिसमें भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि वे अपना एक प्रत्यावेदन सरकार को दे सकते हैं. उन्हें धार में एक वैकल्पिक भूमि दी जाए, इस पर सरकार विचार करेगी.

भोजशाला संस्कृत शिक्षा का केंद्र था-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा कभी बंद ही नहीं हुई थी.  ऐतिहासिक साहित्य से पता चलता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला के रूप में संस्कृत शिक्षा का केंद्र था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ था.

मंदिरों और सभी धार्मिक समुदायों का संरक्षण सरकार का संवैधानिक दायित्व-HC

कोर्ट ने कहा है कि हर सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह न सिर्फ प्राचीन स्मारकों और संरचनाओं, बल्कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिरों और सभी धार्मिक समुदायों के संरक्षण को सुनिश्चित करे.

भोजशाला में देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने को मंजूरी

धार के भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने कहा है कि विवादित क्षेत्र  संस्कृत शिक्षा का केंद्र है, यहां देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जा सकती है.

अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई-हिंदू पक्ष

भोजशाला मंदिर‑कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष ने अदालत में कहा था कि परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती का मंदिर बनवाया था, जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर 1305 में तोड़ दिया गया और उसी के अवशेषों से मस्जिद बनाई गई.

मंदिर गिराकर मस्जिद बनाए जाने का कोई ठोस सबूत नहीं-मुस्लिम पक्ष

अदालत में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि धार शहर में किसी खास मंदिर को किसी खास दौर में गिराकर उसी जगह मस्जिद बनाए जाने का कोई ठोस या प्रमाणिक सबूत मौजूद नहीं है. 

धार में आज सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

धार में भोजशाला-कमल मौला परिसर से जुड़े विवादित मामले में फैसले की वजह से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गई है. जगह-जगह सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं.  

कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने ASI सर्वे पर उठाया था सवाल

 मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में कहा था कि पूरी सर्वे रिपोर्ट में ASI ने 'भोजशाला मंदिर' शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि ऐसा साबित करने वाला कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है. 

हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस ने 2022 में की थी देवी की मूर्ति स्थापित करने की मांग

हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस ने 2022 में  धार स्थित भोजशाला को लेकर एक याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया था कि यह हिंदू राजा द्वारा बनवाया गया यह मंदिर है. याचिका में भोजशाला में नमाज की अनुमति निरस्त कर सरस्वती देवी की मूर्ति फिर स्थापित करने की मांग की गई थी. 

मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे रिपोर्ट पर उठाए थे गंभीर सवाल

मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई के दौरान ASI सर्वे रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि भोजशाला स्थल पर मंदिर होने के ठोस प्रमाण नहीं हैं.

भोजशाला विवाद में फैसले पर टिकी हिंदू और मुस्लिम की निगाहें

हिंदू और मुस्लिम दोनों ही पक्षों के विभिन्न संगठनों की नजर इस फैसले पर टिकी है और वे अपने-अपने पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद जता रहे हैं. 

ASI ने 22 मार्च 2024 से शुरू किया था सर्वेक्षण

ASI ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था. टीम ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.

MP हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को दिया था ASI सर्वे का आदेश

मध्य प्रदेश  हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था.

सर्वे पर कोर्ट में ASI की दलील जानें

एएसआई ने दलील का खंडन करते हुए अदालत में कहा था कि सर्वेक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विशेषज्ञों की मदद से अंजाम दिया गया है. सर्वेक्षण टीम में तीन मुस्लिम जानकार शामिल थे. सर्वेक्षण के दौरान इस समुदाय के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे.

हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मंदिर बताते हुए दी ये दलील

हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था. वहीं सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और इसे हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

मस्जिद से पहले से मौजूद था ये स्ट्रक्चर-ASI

एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से मौजूद थी. वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था. 

भोजशाला को हिंदुओं ने बताया वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर

धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. वहीं जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने इसके मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है.

हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदाय मांग रहा पूजा का अधिकार

हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा है. बता दें कि यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है.

भोजशाला विवाद में सभी 6 मुकदमों में फैसला सुनाने का जिक्र

मामले से जुड़े वकीलों के मुताबिक, हाई कोर्ट द्वारा शुक्रवार के लिए जारी वाद सूची में भोजशाला विवाद को लेकर दायर सभी 6 मुकदमों में फैसला सुनाने का जिक्र किया गया है. कोर्ट ने विवादित स्मारक से जुड़े अलग-अलग धार्मिक विश्वासों, ऐतिहासिक दावों, कानूनी प्रावधानों की जटिलताओं के साथ ही हजारों दस्तावेजों की पृष्ठभूमि में सुनवाई की है.

भोजशाला विवाद पर MP हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा है फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी. सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 

भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद पर फैसले का इंतजार

हाईकोर्ट ने परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है, ये जानकारी एक्स पर वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दी. 

भोजशाला मंदिर विवाद में आज आ सकता है फैसला

इंदौर में धार के भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद परिसर पर शुक्रवार, 15 मई को फैसला आ सकता है. हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद इस मध्यकालीन स्मारक को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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