मध्य प्रदेश में धार के भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद परिसर पर शुक्रवार, 15 मई यानी कि आज फैसला आ सकता है. हाई कोर्ट ने मंगलवार, 12 मई को सुनवाई पूरी होने के बाद इस मध्यकालीन स्मारक को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है, ये जानकारी एक्स पर सुप्रीम कोर्ट के वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दी. इस मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी. सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
ये भी पढ़ें- धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 15 को, प्रशासन अलर्ट
ये भी पढ़ें- न हिंदू, न मुस्लिम... क्या 'जैन तीर्थ' है भोजशाला? हाई कोर्ट पहुंची जैन समाज की याचिका से आया नया मोड़
ये भी पढ़ें- धार भोजशाला केस: हाईकोर्ट में मुस्लिम पक्ष का दावा- मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का कोई सबूत नहीं
Bhojshala Mandir Vs Kamal Maula Masjid Verdict LIVE Updates:
ASI ने 22 मार्च 2024 से शुरू किया था सर्वेक्षण
ASI ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था. टीम ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.
MP हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को दिया था ASI सर्वे का आदेश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था.
सर्वे पर कोर्ट में ASI की दलील जानें
एएसआई ने दलील का खंडन करते हुए अदालत में कहा था कि सर्वेक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विशेषज्ञों की मदद से अंजाम दिया गया है. सर्वेक्षण टीम में तीन मुस्लिम जानकार शामिल थे. सर्वेक्षण के दौरान इस समुदाय के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे.
हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मंदिर बताते हुए दी ये दलील
हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था. वहीं सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और इसे हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
मस्जिद से पहले से मौजूद था ये स्ट्रक्चर-ASI
एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से मौजूद थी. वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था.
भोजशाला को हिंदुओं ने बताया वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर
धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. वहीं जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने इसके मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है.
हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदाय मांग रहा पूजा का अधिकार
हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा है. बता दें कि यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है.
भोजशाला विवाद में सभी 6 मुकदमों में फैसला सुनाने का जिक्र
मामले से जुड़े वकीलों के मुताबिक, हाई कोर्ट द्वारा शुक्रवार के लिए जारी वाद सूची में भोजशाला विवाद को लेकर दायर सभी 6 मुकदमों में फैसला सुनाने का जिक्र किया गया है. कोर्ट ने विवादित स्मारक से जुड़े अलग-अलग धार्मिक विश्वासों, ऐतिहासिक दावों, कानूनी प्रावधानों की जटिलताओं के साथ ही हजारों दस्तावेजों की पृष्ठभूमि में सुनवाई की है.
भोजशाला विवाद पर MP हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा है फैसला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी. सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने 12 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद विवाद पर फैसले का इंतजार
हाईकोर्ट ने परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है, ये जानकारी एक्स पर वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दी.
भोजशाला मंदिर विवाद में आज आ सकता है फैसला
इंदौर में धार के भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद परिसर पर शुक्रवार, 15 मई को फैसला आ सकता है. हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद इस मध्यकालीन स्मारक को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.