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भागलपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण कुशवाहा की कार एक्सीडेंट में दर्दनाक मौत, दिल्ली से लौटते समय यूपी में हुआ हादसा

प्रवीण सिंह कुशवाहा को महज एक महीने पहले ही कांग्रेस आलाकमान ने भागलपुर जिला कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी थी.

भागलपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण कुशवाहा की कार एक्सीडेंट में दर्दनाक मौत, दिल्ली से लौटते समय यूपी में हुआ हादसा
कांग्रेस नेता प्रवीण कुशवाहा
Bihar News:

कांग्रेस पार्टी के लिए बुरी खबर सामने आई है. बिहार के भागलपुर में नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा का उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक भीषण सड़क हादसे में निधन हो गया. वे दिल्ली से कार द्वारा भागलपुर लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस हादसे में कार सवार उनकी साली, भतीजा और ड्राइवर भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं. स्थानीय राहगीरों और पुलिस की मदद से सभी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रवीण कुशवाहा को मृत घोषित कर दिया, जबकि अन्य तीनों घायलों का उपचार जारी है.

एक महीने पहले ही सौंपी गई थी कमान

प्रवीण सिंह कुशवाहा को महज एक महीने पहले ही कांग्रेस आलाकमान ने भागलपुर जिला कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी थी. उनकी नियुक्ति पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के प्रति आभार जताते हुए कार्यकर्ताओं ने उन्हें एक समर्पित और जमीनी नेता बताया था. पदभार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में कुशवाहा ने संगठन के प्रति अटूट निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा था कि उनके जीवन में पार्टी और संगठन से बढ़कर कुछ भी नहीं है. वे लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय रहे थे और उनकी मजबूत पकड़ व जनसंपर्क कौशल को देखते हुए ही उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया था.

दिल्ली में बिहारी युवक के हत्या पर उठाए थे सवाल

दुर्घटना से महज छह घंटे पहले प्रवीण कुशवाहा सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय थे. उन्होंने दिल्ली में बिहार के युवक पांडव कुमार की हत्या को लेकर सिस्टम पर कड़े सवाल उठाए थे और बिहार सरकार के नारों पर तंज कसते हुए न्याय की मांग की थी. स्वर्गीय रामदास सिंह के पुत्र प्रवीण कुशवाहा एक प्रतिष्ठित सामाजिक और व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने विद्यापीठ, देवघर से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की थी. उनके पास करीब 5.45 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति थी और वे लगातार क्षेत्रीय मुद्दों, किसानों और बेरोजगारी के खिलाफ मुखर रहते थे.

लड़ा था विधानसभा चुनाव

हालांकि, चुनावी राजनीति में उन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ा था. भागलपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था, जहां त्रिकोणीय मुकाबले में वे जदयू और राजद के प्रत्याशियों से पिछड़ गए थे. बावजूद इसके, संगठन के प्रति उनकी निष्ठा कम नहीं हुई और वे लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे. उनके असामयिक निधन से भागलपुर सहित पूरे बिहार कांग्रेस में शोक की लहर है और नेताओं ने इसे संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति करार दिया है.

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