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RG कर अस्पताल में बेटी का कत्ल, इंसाफ की आस और सियासी इंतकाम, बंगाल के पानीहाटी से मैदान में अभया की मां

रत्ना देबनाथ पानीहाटी की संकरी गलियों में प्रचार करती हैं. महिलाएं उन्हें गले लगाने के लिए आगे आती हैं, उनके पास उस मां के लिए सांत्वना के अलावा कुछ नहीं है, जिसने अपना सब कुछ खो दिया है.

RG कर अस्पताल में बेटी का कत्ल, इंसाफ की आस और सियासी इंतकाम, बंगाल के पानीहाटी से मैदान में अभया की मां
  • बंगाल चुनाव में रत्‍ना देबनाथ पानीहाटी विधानसभा सीट से भाजपा उम्‍मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं.
  • उनकी बेटी की अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में रेप के बाद हत्या कर दी गई.
  • रत्ना देबनाथ कहती हैं कि मैंने भाजपा को इसलिए चुना क्योंकि टीएमसी के खिलाफ लड़ने का यही एक रास्ता था.
पानीहाटी:

रत्‍ना देबनाथ सुबह 8 बजे के करीब पश्चिम बंगाल के पानीहाटी के वार्ड नंबर 12 में स्थित भाजपा कार्यालय में प्रवेश करती हैं. देश के अन्‍य इलाकों में उन्‍हें रत्‍ना देबनाथ के रूप में नहीं बल्कि अभया की मां के रूप में जाना जाता है. उनकी आंखें बता रही हैं कि न बेटी की मौत का गम कम हुआ है और न ही आंसू थमे हैं, लेकिन पार्टी कार्यकर्ता आशीर्वाद के लिए पैर छूते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्‍कान तैर जाती है. उन्‍होंने सूती साड़ी पहनी है, जिस पर काले रंग का बॉर्डर है. उस पर बंगाली में लिखा है - मैंने अपनी रीढ़ नहीं बेची है. रत्‍ना देबनाथ पानीहाटी से भाजपा उम्‍मीदवार हैं.

आपको इस लड़ाई को लड़ने की ताकत कहां से मिल रही है? इस सवाल पर वह मुस्‍कुराते हुए कहती हैं कि मेरी बेटी से, जिसने अपनी आखिरी सांस तक संघर्ष किया. 9 अगस्त 2024 को रत्ना देबनाथ की 31 साल की बेटी की आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल के सेमीनार कक्ष में रेप के बाद हत्‍या कर दी गई थी. उनकी बेटी अस्‍पताल में प्रशिक्षण ले रही एक जूनियर डॉक्‍टर थीं. कोलकाता पुलिस ने इस मामले में कुछ ही घंटों में सिविक वॉलेंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था. हालांकि माता-पिता के ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मामले में लीपापोती और चूक का आरोप लगाने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. 

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पानीहाटी में फिर गूंज रहे न्‍याय के नारे

पानीहाटी में 'हमें न्याय चाहिए' के नारे एक बार फिर से गूंज रहे हैं. महज दो साल पहले पश्चिम बंगाल और पूरे देश के लोग न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे. जूनियर डॉक्टरों के प्रशासन और संस्थागत खामियों को उजागर करने वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने सत्ताधारी सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. एक महीने के विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री को ड्यूटी पर लौटने से इनकार करने वाले प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से मिलकर गतिरोध को तोड़ना पड़ा. इस विधानसभा क्षेत्र में अब यह सामाजिक संघर्ष राजनीतिक मोड़ ले चुका है.  

प्रार्थना करने के बाद रत्ना देबनाथ पानीहाटी की संकरी गलियों में प्रचार करती हैं. महिलाएं उन्हें गले लगाने के लिए आगे आती हैं, उनके पास उस मां के लिए सांत्वना के अलावा कुछ नहीं है, जिसने अपना सब कुछ खो दिया है. एक मतदाता आंखों में आंसू लिए कहा कि मेरी युवा बेटी बेंगलुरु में काम करती है, वह देर रात तक यात्रा करती है. एक मां होने के नाते मैं उसका (रत्ना देबनाथ) दर्द समझ सकती हूं. वह एक योद्धा है, भगवान करे किसी भी मां को वह सब न देखना पड़े जो उसने झेला है."

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यह TMC के कुशासन के खिलाफ लड़ाई: संगीता पाल

पानीहाटी से भाजपा की एससी मोर्चा की प्रेसिडेंट संगीता पाल कहती हैं कि यह कोई राजनीतिक अभियान नहीं है. यह टीएमसी के कुशासन के खिलाफ लड़ाई है. एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत आसान है, न्याय की लड़ाई में भले ही समय लगे लेकिन जनता का समर्थन इसे आसान बना देगा. 

रत्ना देबनाथ हाथ जोड़कर घर-घर जाकर लोगों से मिल रही हैं. युवा और बुजुर्ग सभी उनसे मिलने आते हैं और उन्हें हौसला देते हैं. रत्ना देबनाथ दृढ़ निश्चय के साथ कहती हैं कि मैंने भाजपा को इसलिए चुना क्योंकि टीएमसी के खिलाफ लड़ने का यही एकमात्र रास्ता था. आप मतदाताओं की प्रतिक्रिया खुद देख सकते हैं. मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि इस राज्य की हर महिला सुरक्षित महसूस करे. सीबीआई अपना काम कर रही है और मुझे उम्मीद है कि मेरी बेटी को न्याय मिलेगा. 

वार्ड 27 में ढाक की गूंज सुनाई दे रही है, महिलाएं शुभ अवसरों पर शंख बजा रही हैं, जो बंगाली रीति-रिवाज है. तृणमूल उम्मीदवार तीर्थंकर घोष चुनाव प्रचार में लगे हैं और साफ-सुथरे सफेद कुर्ते में मतदाताओं से उनके घर जाकर मिल रहे हैं. विधानसभा के लिए यह उनका पहला चुनाव है, लेकिन वह राजनीति में नए नहीं हैं, उनके पिता निर्मल घोष पानीहाटी से पांच बार के मौजूदा विधायक हैं. 

काकीमां के लिए सम्‍मान लेकिन...: तीर्थंकर घोष 

तृणमूल शासन में महिलाओं की सुरक्षा के बारे में पूछे जाने पर घोष ने कहा कि मैं काकीमां (आंटी) का बहुत सम्मान करता हूं,  लेकिन जिस पार्टी से वह चुनाव लड़ रही हैं, उसके लिए मेरे मन में कोई सम्मान नहीं है. यही वह पार्टी है जो हाथरस के आरोपियों को माला पहनाती है. कोलकाता और पश्चिम बंगाल सबसे सुरक्षित हैं, आईटी हब में महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं, कोई समस्या नहीं है. 

महिला मतदाताएं तीर्थंकर घोष पर फूल बरसाने के लिए उमड़ पड़ीं. एक युवती ने हंसते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जीवन को सरल बनाया है. बंगाल में महिलाओं के लिए लक्ष्मी भंडार के नाम से मासिक नकद हस्तांतरण योजना है, जिसे 2021 के पिछले चुनावों में शुरू किया गया था. अब सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए 500-500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी की गई है.

महिलाओं से जब पूछा गया कि उन्‍हें तृणमूल में क्‍या पसंद है तो उन्‍होंने कहा कि दीदी हमारी देखभाल करती हैं, हम उन्हें वोट देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि टीएमसी सत्ता में वापस आए. हमें किसी और पार्टी को नहीं चाहते हैं. हम अभया की मां का सम्मान करते हैं और जरूरत पड़ने पर हम न्याय की मांग के लिए फिर से सड़कों पर उतरेंगे, लेकिन बिना किसी राजनीतिक झंडे के.  

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माकपा को युवा नेता कलातन दासगुप्‍ता पर भरोसा 

पानीहाटी में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होगा. माकपा के युवा नेता कलातन दासगुप्ता ने एनडीटीवी को बताया कि वे न सिर्फ राजनीतिक बल्कि वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि हमने देखा कि TMC ने पार्क स्ट्रीट सामूहिक बलात्कार से लेकर आरजी कार हत्याकांड तक क्या किया. फिर हमने हाथरस, उन्नाव और कठुआ में भाजपा को देखा. वे एक ही नाव में सवार हैं, हमारी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक है. 

माकपा की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन के युवा नेता कलातन को सितंबर 2024 में आरजी कर विरोध प्रदर्शनों के दौरान बिधाननगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. TMC नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि कलातन दासगुप्ता पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के बाहर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे और उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक कथित ऑडियो क्लिप भी साझा किया था. हालांकि एक हफ्ते बाद उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. 

पानीहाटी विधानसभा सीट के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके बाद ही इस राजनीतिक लड़ाई में उम्मीदवारों का भविष्य तय होगा. 

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Shreyashi
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