- पश्चिम बंगाल में लगभग पंद्रह वर्षों के ममता बनर्जी शासन के बाद भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की है.
- नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और कैबिनेट का शपथ ग्रहण कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा.
- ब्रिगेड परेड ग्राउंड औपनिवेशिक काल से लेकर आजाद भारत तक कई राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं का केंद्र रहा है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है. बीजेपी ने ममता बनर्जी के करीब 15 साल लंबे शासन का अंत करते हुए राज्य में बड़ी जीत दर्ज की है. चुनाव नतीजों के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है. जानकारी के अनुसार, बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा. यह वहीं मैदान है, जो दशकों से राज्य की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का गवाह रहा है. ऐसे में शपथ ग्रहण से पहले ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास एक बार फिर चर्चा में है.
ब्रिगेड परेड ग्राउंड सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि अपने भीतर बंगाल और देश के इतिहास को समेटे हुए है. इस ऐतिहासिक स्थल ने औपनिवेशिक दौर से लेकर आजाद भारत तक के कई निर्णायक पल देखे हैं. यहां पहली राजनीतिक रैली वर्ष 1919 में आयोजित की गई थी, जिसके बाद यह मैदान धीरे‑धीरे जन आंदोलनों और राजनीतिक सभाओं का प्रमुख केंद्र बन गया.

Brigade Parade Ground : ब्रिगेड परेड ग्राउंड नाम कैसे पड़ा?
1857 में प्लासी का युद्ध जीतने के बाद अंग्रेजों ने बंगाल पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी. इसी दौरान इस इलाके में एक किला बनाया गया, जहां ब्रिटिश शासक नहीं, बल्कि उनकी सेना तैनात रहती थी. सैनिकों की मौजूदगी के चलते किले के सामने एक विशाल मैदान विकसित किया गया, जहां परेड आयोजित होती थीं. इसी वजह से इस स्थान का नाम पड़ा- ब्रिगेड परेड ग्राउंड.
ब्रिटिश शासन के अंत के बाद यह किला भारतीय सेना के कब्जे में आ गया. फिलहाल यहां भारतीय सेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय स्थित है. साथ ही ब्रिगेड परेड ग्राउंड सरकारी संपत्ति के रूप में जाना जाता है, जहां विशेष अवसरों पर सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं.

'जय भारत-जय बांग्ला' का नारा भी यहीं से निकला
समय था, 6 फरवरी 1972... इस मैदान ने एक ऐतिहासिक दृश्य देखा, जब करीब 10 लाख लोगों की मौजूदगी में एक विशाल रैली हुई. मंच पर उस वक्त बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान और भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मौजूद थीं. इसी रैली में शेख मुजीबुर रहमान ने ‘जय भारत‑जय बांग्ला' का नारा दिया था.
आपातकाल के खिलाफ भी यहां से उठी थी आवाज
1970 के दशक में देश ने आपातकाल का दौर देखा. 1977 में इसके असर चुनावों में भी दिखे, जब केंद्र के साथ‑साथ पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. बंगाल में वाम मोर्चे ने सत्ता संभाली और ब्रिगेड परेड ग्राउंड राजनीतिक गतिविधियों का अहम मंच बना रहा. वर्ष 1984 में भी इस ऐतिहासिक मैदान में बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित की गई थी.

यहीं से मिली ममता को राजनीतिक पहचान
1980 और 90 के दशक में पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का उदय धीरे‑धीरे स्पष्ट होने लगा था. उस दौर में वे कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई थी और एक जुझारू युवा नेता के तौर पर अपनी अलग पहचान बना रही थीं. ब्रिगेड परेड ग्राउंड ही वह मंच बना, जहां से ममता बनर्जी का राजनीतिक कद राज्य स्तर पर उभरकर सामने आया. 25 नवंबर 1992 को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक बड़ी रैली ने ममता बनर्जी को बंगाल की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया. इस रैली की मुख्य संयोजक खुद ममता बनर्जी थीं.
किस पार्टी को कितनी सीटें मिली?
बता दें कि 15 साल बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है. बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 2021 में मिली 215 सीटों से घटकर इस बार 80 सीटों पर सिमट गई.
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