बिहार के बांकीपुर के उपचुनाव पर सबकी निगाहें थीं. इसकी वजह भी खास थी. यहां से बीजेपी लगातार जीतती आई थी. बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष पहली बार 2006 के उपचुनाव में इसी सीट से जीते थे. उस समय इस सीट को पटना वेस्ट कहा जाता था.
इसके बाद नितिन नवीन ने 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव भी जीते. हर चुनाव में उन्हें 60 फीसदी वोट जरूर मिले. उनसे पहले 1995 से 2005 तक इस सीट से उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा विधायक रहे थे. बीजेपी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद भी 1977 में इसी सीट से विधायक चुने गए थे.
बीजेपी का गढ़ रहा है बांकीपुर
गैर बीजेपी नेताओं को इस सीट पर बहुत कम सफलता मिली. निर्दलीय उम्मीदवार रामानंद यादव ने 1985 और 1990 में यहां से चुनाव जीता था. वहीं कांग्रेस 1952, 1962 और 1980 में यहां जीत दर्ज कर चुकी है. 1980 में कांग्रेस के रंजीत सिन्हा विधायक बने थे. यानी बांकीपुर में बीजेपी को छोड़कर अन्य दलों को बहुत ही कम सफलता मिली है.
RJD कांग्रेस का क्या हाल?
बांकीपुर वही सीट है जहां से विपक्ष के तौर पर कांग्रेस ही लड़ती रही है. सिर्फ 2025 के विधानसभा चुनाव और 2026 के उपचुनाव में आरजेडी ने मैदान संभाला. 2020 में इस सीट से शत्रुघ्न सिंहा के बेटे लव सिन्हा चुनाव लड़े थे और हार गए थे.
बांकीपुर में बीजेपी को छोड़कर लड़ने वाली दूसरी पार्टियों को करीब 30 फीसदी के आसपास वोट मिलते रहे हैं. जब कांग्रेस इस सीट पर लड़ी तब भी उसे 31-32 फीसदी वोट मिले. 2010 में आरजेडी के विनोद श्रीवास्तव को यहां 16 फीसदी वोट मिले थे. इस बार आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को सिर्फ 11 फीसदी वोट मिले, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में इन्हीं रेखा गुप्ता को करीब 30 फीसदी वोट मिले थे. यानी नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच आरजेडी का वोट शेयर करीब 19 फीसदी घट गया.
क्या बोलीं मीसा भारती?
इस नतीजे पर आरजेडी सांसद मीसा भारती ने एनडीटीवी से कहा कि यह पार्टी के लिए चिंता की बात है और नेतृत्व को इस हार पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
वहीं तेजस्वी यादव की बहन और आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'जीत उसी की होती है जो लगातार लड़ता है, जनता से जुड़ा रहता है, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सम्मान करता है तथा उनसे लगातार संवाद बनाए रखता है.' उन्होंने आगे लिखा कि यह जीत बीजेपी के विरोध और लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत है. साथ ही विजेता उम्मीदवार को बधाई भी दी.
रोहिणी आचार्य की इस पोस्ट को कई लोग तेजस्वी यादव पर टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं. माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने उपचुनाव के आखिरी दिनों में ही प्रचार किया और उम्मीदवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाए.
क्या तेजस्वी के प्रतिद्वंदी बनेंगे पीके?
इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद उन्हें बिहार की विपक्षी राजनीति में तेजस्वी यादव के नए प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि जब इस बारे में मीसा भारती से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया. उनका कहना था कि प्रशांत किशोर बीजेपी के ही व्यक्ति हैं और उन्हें बीजेपी के समर्थन से जीत मिली है.
आरजेडी के कुछ नेता निजी बातचीत में यह भी कहते हैं कि बांकीपुर एक शहरी सीट है और पार्टी यहां कभी नहीं जीती, इसलिए इस हार को बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश नहीं माना जाना चाहिए.
फिर भी यह स्पष्ट है कि प्रशांत किशोर अब विपक्ष की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश करेंगे. ऐसे में कांग्रेस और तेजस्वी यादव दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि बांकीपुर उपचुनाव के बाद तेजस्वी यादव का अगला कदम क्या होता है.
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