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बांग्लादेश ने भारत से यूनुस सरकार के समय लगाई गई पाबंदियों को हटाने का अनुरोध किया

बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आयशा अख्तर के नेतृत्व में 10 सदस्यों वाले बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में हुई बैठक में हिस्सा लिया और भारतीय जमीनी बंदरगाहों के ज़रिए अपने निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाने की मांग की.

बांग्लादेश ने भारत से यूनुस सरकार के समय लगाई गई पाबंदियों को हटाने का अनुरोध किया
भारत और बांग्लादेश में कई मुद्दों पर दिल्ली में बातचीत हुई है. (फोटो-एनडीटीवी)
  • बांग्लादेश ने भारत से लागू पाबंदियों को हटाने और व्यापार रियायतें देने का अनुरोध किया
  • भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्य समूह की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार बाधाओं पर दो दिन चर्चा हुई
  • बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए प्राइवेट सेक्टर की भूमिका और लोगों के बीच संबंध बढ़ाने पर जोर दिया गया

बांग्लादेश ने भारत से युनूस सरकार के समय की पाबंदियों को हटाने का अनुरोध किया है.  बांग्लादेश ने भारतीय जमीनी बंदरगाहों के जरिए अपने निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाने, बांग्लादेशी जूट उत्पादों और PET फिल्म पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी वापस लेने और 'सबसे कम विकसित देश' (LDC) की श्रेणी से बाहर निकलने के बाद भी टैरिफ में मिलने वाली रियायतों को जारी रखने की मांग की है. इनमें से कुछ पाबंदियां अगस्त 2024 और फरवरी 2026 के बीच मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान लागू की गई थीं.

बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापार पर बांग्लादेश-भारत संयुक्त कार्य समूह (JWG) की 16वीं बैठक में ये मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए. यह बैठक नई दिल्ली में 8 अक्टूबर को शुरू हुई थी और इसमें द्विपक्षीय व्यापार बाधाओं, जमीनी बंदरगाह के बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर दो दिनों तक चर्चा हुई. बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आयशा अख्तर के नेतृत्व में 10 सदस्यों वाले बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में हुई बैठक में हिस्सा लिया.

क्यों लगाई थी पाबंदी

मई 2025 में, भारत में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने बांग्लादेश से भारत में कुछ सामानों के आयात पर नए पोर्ट प्रतिबंधों की घोषणा की थी. हालांकि, भारत ने पहले बांग्लादेश से सभी तरह के निर्यात की बिना किसी रोक-टोक के इजाज़त दी थी, लेकिन बांग्लादेश ने नॉर्थ-ईस्ट तक ट्रांज़िट और मार्केट एक्सेस पर रोक लगा रखी थी. उस समय सूत्रों ने कहा था कि भारत के इस कदम से दोनों देशों के लिए समान मार्केट एक्सेस बहाल हो गया है. भारत ने बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़ों के आयात को केवल दो समुद्री बंदरगाहों - न्हावा शेवा और कोलकाता - तक सीमित कर दिया था. यह कदम बांग्लादेश द्वारा भारतीय धागे और चावल पर इसी तरह के व्यापार प्रतिबंध लगाने के जवाब में उठाया गया था.

जून 2025 में, भारत ने आदेश दिया था कि बांग्लादेश से जूट को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित जमीनी बंदरगाहों के ज़रिए भारत में आने की इजाज़त नहीं होगी. उस समय डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि ये प्रतिबंध मुंबई के न्हावा शेवा समुद्री बंदरगाह को छोड़कर सभी ज़मीनी और समुद्री बंदरगाहों पर लागू होंगे. इन फैसलों का भारत-बांग्लादेश व्यापार पर असर पड़ा था, खासकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित जमीनी बंदरगाहों पर.इस साल अगस्त में, बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्री खांडेकर अब्दुल मुक्तादिर के साथ शिष्टाचार मुलाकात की. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही रिश्तों को बेहतर बनाने और संबंधों को फिर से बनाने की कोशिशें हो रही हैं. हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के मुद्दे जैसे राजनीतिक एजेंडे के बजाय लोगों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

आज की मीटिंग में क्या हुआ

इस बैठक में भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा हुई. हाई कमिश्नर त्रिवेदी ने आपसी फ़ायदे वाले व्यापार और निवेश के लिए आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में बिज़नेस और प्राइवेट सेक्टर की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया. आपसी हित और फ़ायदे से जुड़े कई मुद्दों पर भी बातचीत हुई. बातचीत में भारत-बांग्लादेश संबंधों की मज़बूत नींव के तौर पर लोगों के बीच आपसी संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया गया. साथ ही, दोनों देशों के बिज़नेस समुदायों, पेशेवरों और आम लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया.

व्यापार पर बांग्लादेश-भारत संयुक्त कार्य समूह (JWG) की बैठक में, बांग्लादेश ने ज़मीनी बंदरगाहों के ज़रिए भारत में आने वाले अपने सामान पर लगी मौजूदा पाबंदियों की समीक्षा करने की मांग की. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय बाज़ार तक पहुंच को सीमित करने वाली टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने की भी मांग की. भारत ने बांग्लादेश के अनुरोधों पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया है, लेकिन उसने सीमावर्ती 'हाट' या बाज़ारों, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और लैंड कस्टम पोस्ट को फिर से शुरू करने की मांग की है. ये सभी अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान बंद कर दिए गए थे, जब यूनुस सरकार की भारत-विरोधी नीतियों के कारण संबंध बिगड़ गए थे.

भारत ने कुछ ज़मीनी बंदरगाहों के ज़रिए बांग्लादेश को कॉटन यार्न और अन्य उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियों को हटाने का प्रस्ताव दिया है. भारत पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों से बांग्लादेश को निर्यात में आने वाली बाधाओं को कम करना चाहता है, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर हो सके और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट का विस्तार हो सके. हालांकि, हाल की घटनाओं से पता चलता है कि भारत और बांग्लादेश आपसी व्यापार को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं. पिछले हफ़्ते, डिब्रूगढ़ के बोगीबील टर्मिनल से 540 मीट्रिक टन मेथनॉल लेकर एक बार्ज (बड़ी नाव) बांग्लादेश के ढाका के लिए रवाना हुई। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 'DLB पटकाई' नाम के इस जहाज़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. दोनों पक्षों ने व्यापार मार्गों की क्षमता बेहतर करने (जिसमें अखौरा-अगरतला लिंक भी शामिल है), रेल कनेक्टिविटी को मज़बूत करने और बॉर्डर हाट से जुड़े मुद्दों को सुलझाने पर भी चर्चा की है.

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