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अंतरिक्ष में छाया केरल का यह जिला, जिसने स्पेस एजेंसियों को दिए 3 महारथी, 14 जुलाई से शुरू होगा खास मिशन

Astronauts From Kerala: भारत के केरल राज्य ने अंतरिक्ष में अपना डंका बजाया है. क्योंकि केरल के पलक्कड़ जिले एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है. जिससे यह जिला दुनियाभर में चर्चा में रहा है.

अंतरिक्ष में छाया केरल का यह जिला, जिसने स्पेस एजेंसियों को दिए 3 महारथी, 14 जुलाई से शुरू होगा खास मिशन
अंतरिक्ष से केरल का खास कनेक्शन
  • भारत के केरल का पलक्कड़ जिला अपनी एक खास वजह से दुनियाभर में अलग पहचान बना चुका है.
  • दुनिया के तीन अंतरिक्ष यात्रियों का कनेक्शन केरल के पलक्कड़ जिले से हैं.
  • इनमें डॉ. अनिल मेनन, एना मेनन और प्रशांत बालकृष्णन नायर का नाम शामिल है.

अंतरिक्ष अभियानों की जब भी दुनिया में बात होती है तो अक्सर अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े देशों के नाम सबसे पहले आते हैं. लेकिन इस फेहरिस्त में अब भारत भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिसमें दक्षिण के राज्य केरल का अह योगदान है. क्योंकि केरल ने एक अनोखा इतिहास बनाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. यहां से एक दो नहीं बल्कि तीन-तीन अंतरिक्ष यात्रियों का नाम बडे़ मिशनों से जुड़ा रहा है. खास बात यह है कि यह तीनों अंतरिक्ष यात्रियों का कनेक्शन केरल के पलक्कड़ जिले से जुड़ा है. यह गौरव तब और खास हो जाता है जब भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन 15 जुलाई को रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरने की तैयारी में हैं. ऐसे में पलक्कड़ जिले के इस त्रिमूर्ति के बारे में सभी जानना चाहिए, जो दुनिया में भारत का डंका बजा रहे हैं. 

डॉ. अनिल मेनन और एना मेनन

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन का संबंध भारत के केरल से हैं. उनका नाम फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि वह 14 जुलाई को अपने स्पेश मिशन पर रवाना होने वाले हैं. डॉ. अनिल मेनन  कजाखस्तान के बैकोनूर कास्मोड्रोम से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना होंगे. उनका यह मिशन करीब 8 महीने तक चलने वाला है. अनिल का कनेक्शन पलक्कड़ जिले हैं. भले ही उनका जन्म अमेरिका में हुआ है, लेकिन उनके पिता भारतीय और मां यूक्रेन की हैं. उनकी जड़ें केरल के पलक्कड़ से जुड़ी है. अनिल की खासियत यह है कि वह अंतरिक्ष यात्री होने के साथ-साथ एक डॉक्टर, मैकेनिकल इंजीनियर, स्पेस मेडिसिन स्पेशलिस्ट, पायलट और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं. अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वह नासा के फ्लाइट सर्जन के रूप में अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की देखभाल करते थे. 

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दिलचस्प बात यह है कि अनिल की पत्नी एना मेनन भी एक फेमस अंतरिक्ष यात्री हैं. ऐसे में उनके परिवार को कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली भी कहा जाता है. एना ने सितंबर 2024 में ऐतिहासिक 'पोलारिस डॉन' मिशन के तहत उड़ान भरी थी, जिसने दुनिया की पहली प्राइवेट स्पेसवॉक का रिकॉर्ड बनाया था. वर्तमान में एना नासा में ट्रेनिंग ले रही हैं. दोनों के दो बच्चे हैं. यह परिवार इसी वजह से खास रहता है. 

गगनयान मिशन का चेहरा प्रशांत बालकृष्णन नायर

प्रशांत बालकृष्णन नायर जो भारत के गगनयान मिशन का चेहरा हैं. वह इस कहानी के तीसरे पात्र है. वह गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं. प्रशांत भी मूल रूप से केरल के पलक्कड़ के रहने वाले हैं. प्रशांत नायर हाल ही में Axiom-4 मिशन से जुड़ी तैयारियों का हिस्सा थे और भारत के भावी अंतरिक्ष अभियानों का सबसे बड़ा चेहरा हैं. खास बात यह है कि इन तीनों के बीच अच्छी दोस्ती है. दरअसल, अमेरिका के ह्यूस्टन में ट्रैनिंग के दौरान प्रशांत नायर और अनिल मेनन के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी. जिसकी एक बड़ी वजह केरल का पलक्कड़ भी था.

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अनिल मेनन के लिए प्रशांत ने भेजा मैसेज 

अब जब अनिल मेनन इतने बड़े स्पेस मिशन पर रवाना होने वाले हैं तो प्रशांत नायर और उनकी पत्नी लीना जो एक फेमस अभिनेत्री भी है. उन्होंने एक भावुक संदेश भेजा है. उन्होंने लिखा 'मेरे भाई अनिल और प्रिय एना. यह मेरे और लीना के लिए बेहद भावुक पल है. भारत और केरल की इस महान भूमि से आपका जुड़ाव हमेशा याद रखा जाएगा. हम यहां से आपके लिए दुआएं कर रहे हैं. पिछले साल ह्यूस्टन में आपके साथ बिताया समय बेहद शानदार था. इस लॉन्च के साथ आप और एना सच में एक 'कम्पलीट एस्ट्रोनॉट फैमिली' बन गए हैं.'

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अंतरिक्ष में अनिल मेनन का क्या रहेगा रोल ?

भारतीय मूल के अनिल मेनन अपने 8 महीने के मिशन के लिए रवाना हो रहे हैं. ऐसे में यह सवाल भी आता है कि उनका अंतरिक्ष के इस मिशन में क्या रोल रहेगा. अनिल अंतरिक्ष स्टेशन पर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. वह इंसानी शरीर पर अंतरिक्ष के असर जिसमें ब्लड फ्लो और नसों की संरचना का अध्ययन करेंगे. इसके अलावा वह एक ऐसी तकनीक का परीक्षण करेंगे जिससे स्टेशन के पीने के पानी से ही मरीजों के लिए 'आईवी फ्लूइड' बनाया जा सके, जो भविष्य में मंगल और चांद के मिशन पर इंसानों के बहुत काम आएगा. इन्हीं सब कारणों से अनिल का यह स्पेस मिशन अहम माना जा रहा है. 

अनिल का भारत से पुराना नाता

डॉ. अनिल मेनन का भारत से पुराना नाता है. वह केवल अपने पूर्वजों तक ही सीमित नहीं है. अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वह रोटरी स्कॉलर के रूप में भारत आए थे और दिल्ली में रहकर करीब एक साल तक भारत के पोलियो उन्मूलन अभियान पर उन्होंने लगातार जमीनी स्तर पर काम किया था. वह खुद भी इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा मानवीय अनुभव मानते हैं. जबकि उनके पूर्वजों की जडे़ं भारत से ही जुड़ी थी. ऐसे में उन्हें भारत से बेहद लगाव रह है. 

केरल के लिए बड़ी खुशी का मौका

केरल से जुड़े एक अंतरिक्ष यात्री इतने बड़े मिशन पर जा रहे हैं. ऐसे में यह केरल के लिए बड़ी खुशी है. खास बात यह है कि केरल का अंतरिक्ष से नाता बहुत पुराना है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरों की शुरुआत भी केरल से ही मानी जाती है. जो यहां के थुम्बा नाम के एक छोटे से मछुआरों के गांव से हुई थी. और अब पलक्कड़ जिले ने नासा, इसरो, रोस्कोस्मोस और स्पेसएक्स जैसी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने तीन लाल सौंप दिए हैं. अमेरिका और रूस जैसे बड़े देशों के बाहर, दुनिया का शायद ही कोई ऐसा इलाका होगा जो अंतरिक्ष विज्ञान में इस तरह का योगदान दे सका हो. पूरा देश और केरल इस ऐतिहासिक पल का जश्न मना रहे हैं. 

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