- इसरो ने गगनयान मिशन के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट श्रीहरिकोटा में सफलतापूर्वक पूरा किया
- टेस्ट में इंडियन एयर फोर्स के चिनूक हेलीकॉप्टर से 5.7 टन वजन वाले क्रू मॉड्यूल को 3KM की ऊंचाई से गिराया गया
- पैराशूट सिस्टम ने क्रू मॉड्यूल की स्पीड को नियंत्रित करते हुए समुद्र में सुरक्षित स्पलैशडाउन किया
भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) अपने पहले मानव मिशन गगनयान की तैयारियां कर रहा है. इस मिशन के तहत भारत पहली बार अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट भेजेगा. इस बीच इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित स्पेस स्टेशन पर दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-2) को सफलतापूर्वक किया. इस ट्रायल के तहत क्रू मेंबर्स के मॉड्यूल कैप्सूल को लैंडिग के दौरान सुरक्षित उतारने का अभ्यास किया गया. गगनयान मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री इसी कैप्सूल में सवार होंगे. इसरो के इस टेस्ट को करने में भारतीय वायु सेना ने भी मदद की.
एयरफोर्स ने की ISRO की मदद
भारतीय वायु सेना ने एक्स पर ट्रायल की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए बताया कि एयरफोर्स ने गगनयान क्रू मॉड्यूल के दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट के सफल संचालन में सहयोग दिया. यह गगनयान मिशन में ISRO के लिए एक और अहम पड़ाव है. वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करके किए गए इस टेस्ट ने पैराशूट-आधारित स्पीड कम करने वाले सिस्टम की पुष्टि की.
The #IAF supported successful conduct of the second Integrated Air Drop Test of #Gaganyaan Crew Module. It marks another key milestone for ISRO in the #Gaganyaan Mission.
— Indian Air Force (@IAF_MCC) April 10, 2026
Executed using an IAF Chinook helicopter, the trial validated the parachute-based deceleration system.
The… pic.twitter.com/MO3ULekCrV
केंद्रीय मंत्री ने दी इसरो को बधाई
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सफल परीक्षण के लिए इसरो को बधाई दी. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘भारत के पहले मानव अंतरिक्ष यान गगनयान के लिए दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट के सफलता पूर्वक पूरा होने पर इसरो को बधाई. गगनयान के अगले साल अंतरिक्ष में लॉन्च होने की संभावना है. दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन श्रीहरिकोटा में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया.'
कैसे हुआ यह टेस्ट?
IADT‑02 के दौरान, लगभग 5.7 टन वजन का एक सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल को इंडियन एयर फोर्स के चिनूक हेलीकॉप्टर से लगभग तीन किलोमीटर की ऊंचाई पर एयरलिफ्ट किया गया. श्रीहरिकोटा तट के पास एक तय सी ड्रॉप जोन पर तैनात होने के बाद, मॉड्यूल को बंगाल की खाड़ी के ऊपर फ़्री फॉल में छोड़ दिया गया.ISRO का कहना है कि इसके बाद जो हुआ वह एक सटीक कोरियोग्राफ्ड सीक्वेंस था जिसने न केवल इंजीनियरिंग, बल्कि भरोसे को भी परखा. चार अलग-अलग तरह के दस पैराशूट पहले से तय क्रम में तैनात किए गए, धीरे-धीरे गिरते क्रू मॉड्यूल की स्पीड कम करते हुए एक कंट्रोल्ड और सुरक्षित स्पलैशडाउन सुनिश्चित किया. खुले समुद्र के बैकग्राउंड में, फैलते हुए पैराशूट ने एक शानदार विज़ुअल डिस्प्ले, एक पल की आसमानी रंगोली बनाई, जबकि इंजीनियर नीचे उतरने की वेलोसिटी के हर हिस्से को ट्रैक कर रहे थे.
ISRO ने कहा कि टेस्ट ने क्रू मॉड्यूल के पैराशूट-बेस्ड डीसेलरेशन सिस्टम को सफलतापूर्वक वैलिडेट किया, जिससे असली हालात में एंड-टू-एंड परफॉर्मेंस दिखा. टचडाउन के बाद, क्रू मॉड्यूल को इंडियन नेवी के साथ मिलकर किए गए एक कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन में समुद्र से सुरक्षित निकाल लिया गया, जिससे टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो गया.
कैसे होता है IADT टेस्ट?
बता दें कि पहले IADT टेस्ट के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद IADT-2 शुरू किया गया. पहला टेस्ट 24 अगस्त 2025 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में हुआ था. एयर ड्रॉप टेस्ट में अंतरिक्ष यान की पृथ्वी पर वापसी के अंतिम चरण की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाता है. कई परिस्थितियों में अलग-अलग सिस्टम की टेस्टिंग करने के लिए एक विमान या हेलीकॉप्टर अंतरिक्ष यान को एक निश्चित ऊंचाई से गिराता है.
पहले IADT में एक चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा तीन किलोमीटर की ऊंचाई से 4.8 टन के डमी कर्मी दल मॉड्यूल को गिराया गया था. मॉड्यूल के अलग होने के बाद 10 पैराशूट से युक्त एक पैराशूट सिस्टम की तैनात की गई जिससे कैप्सूल की स्पीड को कम करके उसे सुरक्षित रूप से पानी में उतरने की गति तक पहुंचाने में मदद मिली.
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