- नासा को चांद और मंगल के सिम्युलेटेड मिशन के लिए 4 वॉलंटियर्स की तलाश
- ये वॉलंटिर्स अंतरिक्ष यात्रियों की तरह ही काम करेंगे- जैसे फसल उगाना, अपनी सेहत का ध्यान रखना और स्पेस वॉक
- इस प्रोजेक्ट में यह भी देखा जाएगा कि क्रू मेंबर मंगल ग्रह के समय के हिसाब से कैसे ढलते हैं
क्या आप धरती पर रहकर बोरिंग सा फील कर रहे हैं? क्या आप भी किसी रात देर तक जागकर सोचते हैं कि काश मैं एस्ट्रोनॉट होता और चांद और मंगल पर जा पाता, महसूस करता कि वहां जीना कैसा होता होगा... अगर ऐसा है तो आपके लिए अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA की एक बड़ी खबर है. NASA अपने 'मून एंड मार्स एक्सप्लोरेशन एनालॉग' (MMEA) के लिए चार लोगों को भर्ती करना चाहती है. यह एक साल तक चलने वाला सिमुलेशन प्रोग्राम है, जिसे चांद और मंगल ग्रह पर यात्रा करने और वहां रहने के अनुभव जैसा माहौल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. यानी आप रहेंगे तो धरती पर ही लेकिन एक साल तक फील चांद और मंगल पर रहने का करेंगे. वैसे भारतीयों के लिए एक पेच भी है- क्राइटेरिया.
NASA का प्लान क्या है?
भले ही यह असल अंतरिक्ष में जाने वाला मिशन नहीं है, लेकिन इसमें भाग लेने वाले वॉलंटियर्स अंतरिक्ष जैसे माहौल में रहेंगे. CNN की रिपोर्ट के अनुसार वे सीमित जगह वाले घरों में रहेंगे और अंतरिक्ष यात्रियों की तरह ही काम करेंगे- जैसे फसल उगाना, अपनी सेहत का ध्यान रखना और स्पेस वॉक (अंतरिक्ष में चहल-कदमी) जैसा अनुभव करना. 12 महीने का यह प्रोग्राम अगस्त 2027 से पहले शुरू नहीं होगा और ह्यूस्टन में जॉनसन स्पेस सेंटर में आयोजित किया जाएगा.
CNN की रिपोर्ट के अनुसार NASA के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह रिसर्च प्रोग्राम अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की यात्रा करने और मंगल ग्रह पर उतरने के दौरान आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेगा.
क्या भारत के लोग इसमें भाग ले सकते हैं?
इस रिपोर्ट के अनुसार आवेदन करने वाले का अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड होल्डर होना और उनकी उम्र 30 से 55 साल के बीच होना जरूरी है. हालांकि इस एज लिमिट से बाहर के लोगों पर भी विचार किया जा सकता है. साथ ही, उनकी लंबाई 6 फीट 2 इंच (1.88 मीटर) से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए और उन्हें अंग्रेजी अच्छी तरह आनी चाहिए. मतलब भारत के वही लोग इसमें शामिल हो सकते हैं जिनके पास ग्रीन कार्ड है. ग्रीन कार्ड (Green Card) एक आधिकारिक पहचान पत्र है जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने, काम करने और पढ़ाई करने का कानूनी अधिकार देता है.
इसमें प्रोग्राम में भाग लेने के चाहत रखने वाले लोगों को जॉनसन स्पेस सेंटर में 14 महीने रहने के लिए तैयार रहना होगा. इस प्रोग्राम में दो बंद आवासों (confined habitats) के अंदर 12 महीने बिताना और मिशन से पहले व बाद की ट्रेनिंग के लिए दो महीने और देना शामिल है.
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