- इस साल मॉनसून की अनियमितता और जलवायु परिवर्तन के कारण कई राज्यों में बारिश के पैटर्न में बदलाव देखा गया है
- असम में जून से जुलाई के बीच औसत से लगभग 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि कई जिलों में बाढ़ का संकट गहराया है
- बाढ़ से अब तक असम में 66 मौतें हुई हैं और 6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, राहत कार्य जारी हैं
इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन पर क्लाइमेट चेंज का असर साफ दिख रहा है. देश के कुछ राज्यों में मॉनसून की रफ़्तार अब तक अनियमित रही है, जिसकी वजह से बारिश के पैटर्न में काफी ज़्यादा वेरिएशन दिख रहा है. कभी मॉनसून की रफ़्तार थम जाती है, तो कभी एक सीमित क्षेत्र में भारी बारिश कहर बरपा रही है.
भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पूर्वी भारत के सबसे बड़े राज्य असम में 01 जून से 26 जुलाई, 2026 के बीच औसत से 29% कम बारिश हुई है. आम तौर पर असम में इस दौरान 801.7 mm बारिश होती है, लेकिन इस साल सिर्फ 572.1 mm बारिश ही रिकॉर्ड की गई है. लेकिन इसके बावजूद असम के कई ज़िले बाढ़ के भयंकर संकट से जूझ रहे हैं.
इसकी वजह से पूर्वी तिब्बत से लेकर अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और भूटान के कुछ इलाकों में पिछले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश का होना, जिसकी वजह से बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है.

भारत मौसम विभाग के पूर्व डायरेक्टर जनरल के.जे. रमेश ने एनडीटीवी से कहा, "इस सीजन के दौरान पिछले कुछ दिनों से पूर्वी तिब्बत के इलाकों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस काफी सक्रिय रहा है. इसके असर की वजह से पूर्वी तिब्बत और उसके आसपास के इलाकों में काफी ज़्यादा बारिश हुई है. इससे ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया है, और असम के कुछ ज़िलों में बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है. उत्तरी असम के कुछ ज़िलों के अलावा सिक्किम, भूटान और अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भी काफी ज़्यादा बारिश रिकॉर्ड की गयी है, जिसकी वजह से स्थानीय नदियों में पानी का स्तर काफी ऊपर चला गया."
असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी के आंकड़ों के अनुसार, असम के कुछ चुने हुए ज़िलों में 22 जुलाई से 24 जुलाई के बीच काफी ज़्यादा बारिश रिकॉर्ड की गयी, जिसकी वजह से बाढ़ आपदा का दायरा बढ़ गया.

असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी की रिपोर्ट के अनुसार, 22 जुलाई को सुबह 08.30 बजे से 23 जुलाई की सुबह 08.30 बजे तक लखीमपुर में 79.5 mm से 89.5 mm तक बारिश रिकॉर्ड की गयी, जबकि तिनसुकिया के रूपई एईजीसीएल क्षेत्र में 87 mm बारिश हुई. साथ ही, 23 जुलाई को सुबह 08.30 बजे से 24 जुलाई की सुबह 08.30 बजे तक कामरूप मेट्रोपोलिटन के कलाक्षेत्र में 84.5 mm और सरुसजाई में 94.5 mm बारिश रिकॉर्ड की गयी.
ख़बरों के मुताबिक, रविवार को असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गयी. अब तक इस आपदा से 6 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं. शुक्रवार को नौ ज़िलों में 7.05 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ की चपेट में आए थे, लेकिन पिछले 24 घंटे के दौरान हालात में कुछ सुधार हुआ है.
रविवार को एक केंद्रीय इंटर-मिनिस्टीरियल टीम ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित पूर्वी असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर, अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने नुकसान का आकलन करने और NDRF से इन राज्यों को ज़रूरी आर्थिक मदद देने के लिए 7 से 10 जुलाई 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित इलाकों का दौरा किया था.

देशभर में मॉनसून सीजन के दौरान 01 जून से 26 जुलाई, 2026 के बीच औसत से 15% कम बारिश हुई है. सबसे ज़्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में दर्ज़ की गयी है, जहां औसत से 29% कम बारिश रिकॉर्ड की गयी है.
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