AIMIM के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार को दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में बड़े धूमधाम से पार्टी में शामिल कराया गया. कांग्रेस मुख्यालय में मंच पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय, प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी भी थे जो कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं. अब सबसे बड़ा सवाल सबके मन में यही है कि आसिम वकार के आने से कांग्रेस को कितना फायदा होगा.
आसिम वकार का AIMIM छोड़कर जाना वैसे तो बहुत बड़ी राजनीतिक घटना नहीं मानी जानी चाहिए क्योंकि वो कभी सांसद, विधायक नहीं रहे और चुनाव के समय नेताओं का एक दूसरे दल में आना जाना आम बात है. वैसे लोगों का कहना है कि आसिम वकार ने अपने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से मनमुटाव की वजह से पार्टी छोड़ी है. मगर आसिम वकार एआईएमआईएम के लिए काफी अहम सदस्य थे क्योंकि पिछले कई सालों से टीवी पर उस पार्टी का चेहरा बने रहे.
औवेसी को चुभ जाएगी आसिम वकार की बात
अब कांग्रेस में शामिल होते वक्त आसिम वकार ने जो कुछ कहा वो AIMIM के लिए वह ओवैसी के लिए राजनीतिक रूप से अच्छा नहीं माना जाएगा.
आसिम वकार ने कहा, “जमीन पर एआईएमआईएम कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से लड़ने की बात करती है तो किसकी मदद होती है. हम विपक्ष से क्यों लड़ते हैं हम किसकी मदद कर रहे हैं जाहिर है हम बीजेपी की मदद कर रहे हैं. लेकिन यहां सवाल ये भी है आसिम वकार को यह बात समझने में दस साल क्यों लग गए. जो बात आसिम वकार अब कह रह रहे हैं कि बीजेपी से यदि कोई लड़ रहा है तो वो कांग्रेस ही है, तो सवाल ये उठता है कि वो समाजवादी पार्टी पर भी सवाल उठा रहे हैं क्या?"
कांग्रेस को भी मालूम है कि आसिम वकार भले ही बड़े जनाधार वाला नेता नहीं है मगर आजकल जो मीडिया में या लोगों की चर्चाओं में धारणा या परसेप्सन की लड़ाई चल रही है उसके लिए जरूरी है और जैसा कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि राहुल गांधी के मुहब्बत के कारवां में एक और साथी जो एक प्खर प्रवक्ता भी है, सांप्रदायिकता और नफरत के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हमारे साथ आया है, इससे हमको ताकत मिलेगी.
वैसे यहां यह बताना जरूरी है कि इमरान प्रतापगढ़ी और ओवैसी के बीच शह और मात का खेल नांदेड़ के कॉरपोरेशन के चुनाव के समय से चल रहा है, फिर तेलंगाना का चुनाव हुआ जिसमें ओवैसी बीआरएस के साथ थे. दोनों जगह प्रतापगढ़ी आगे रहे मगर बिहार के सीमांचल में प्रतापगढ़ी ने भी खूब प्रचार किया, लेकिन ओवैसी को रोक नहीं पाए, हालांकि असम में ओवैसी ने बदरूद्दीन का दामन थामा और वहां उनको हार मिली. अब इमरान प्रतापगढ़ी ने ओवैसी के सबसे चर्चित चेहरे को तोड़ लिया है.
सपा में क्यों शामिल नहीं हुए आसिम वकार?
एक और अहम सवाल है कि आसिम वकार समाजवादी पार्टी में शामिल क्यों नहीं हुए. जहां वो बीस साल तक रहे. राजनीति के जानकार मानते हैं कि इससे कांग्रेस ने एक बार फिर सपा को हल्का सा झटका दिया है. यह एक संदेश ये है कि उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में अब कांग्रेस के लिए स्वीकृति बढ़ती जा रही है.
दरअसल उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों की जंग को लेकर कांग्रेस यह सब रणनीति के तहत कर रही है और आने वाले दिनों में और भी नेता कांग्रेस में शामिल होंगे. कांग्रेस फिलहाल उत्तर प्रदेश में परसेप्शन या धारणा की लड़ाई जीतना चाहती है.
उधर एआईएमआईएम के नेता इमरान सोलंकी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में जो पार्टी ने प्रवक्ताओं की सूची बनाई है उसमें आसिम वकार का नाम नहीं है, शायद कांग्रेस ने उन्हें कुछ पद का वादा किया होगा इसलिए कांग्रेस में गए हैं. वहीं एआईएमआईएम के अख्तरूल इमाम का कहना है कि जिस जिम्मेदारी से आसिम वकार मजलूमों और अकलियतों की आवाज उठाते रहे हैं, हम उम्मीद करते हैं कि इसी तरह की आवाज वो आगे भी उठाते रहेंगे.
एआईएमआईएम के नेता यह भी जानते हैं कि शायद कांग्रेस ने आसिम वकार को टिकट का वायदा भी किया हो, जो भी है उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन के पहले शह और मात का खेल मजेदार होने वाला है.
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