- AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग के फैसलों की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं
- ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकांश सदस्य उन फैसलों से अनजान हैं जो उनके नाम पर लिए गए हैं
- उन्होंने आयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं
चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया रिपोर्ट को लेकर विपक्ष के हमले तेज हो गए हैं. कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी के बाद अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि कभी देश के ज्यादातर लोगों को चुनाव आयोग पर भरोसा था, लेकिन समय के साथ इस भरोसे में लगातार कमी आई है.
ओवैसी ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल?
ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के ज्यादातर सदस्य ही उन फैसलों के बारे में नहीं जानते जो उनके नाम पर लिए गए हैं, तो उन फैसलों की कानूनी वैधता क्या है. पिछले साल हमने देखा है कि कैसे SIR ने एक ऐसा संकट पैदा किया है जिसने सबसे गरीब लोगों को परेशान किया है. इसने उनसे नागरिक होने का सम्मान छीन लिया है और उन्हें सिर्फ उनके दस्तावेजों तक सीमित कर दिया है.
पहले सवाल यह होता था कि 'निगरानी करने वालों पर नजर कौन रखेगा?' अब सवाल यह है कि 'क्या कोई निगरानी करने वाला है भी?' उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं.
चुनाव आयोग पर विपक्ष है लगातार हमलावर
बता दें कि विपक्षी दल लगातार उस रिपोर्ट का हवाला देकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं. हालांकि चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि SIR समेत सभी महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं.
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है जब एसआईआर और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है.
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