दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु से बुधवार को एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई. अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी की घोषणा की. एएमएमके महासचिव टीटीवी दिनाकरण ने चेन्नई में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद इसकी घोषणा की.यह पार्टी पिछले साल सितंबर में एनडीए से अलग हो गई थी. एएमएमके 23 जनवरी को चेन्नई के पास मदुरांतकम में प्रस्तावित पीएम नरेंद्र मोदी की रैली में भी शामिल होगी. तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे देखते हुए एनडीए में एएमएमके की वापसी को एक बड़ा कदम माना जा रहा है.एएमएमके का दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में अच्छा प्रभाव माना जाता है.
एनडीए में लौटकर दिनाकरण ने क्या कहा
एनडीए में वापसी की घोषणा करते हुए दिनाकरण ने कहा,''बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए हमें पुराने विवादों को पार्टी के हितों, तमिलनाडु के कल्याण या जनता के हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए. जनहित में समझौते करना हमें कमजोर नहीं बनाता. इसी तरह, अम्मा के कार्यकर्ता होने के नाते, जो हमें एकजुट रखने वाली ताकत हैं, हम सब एक साथ आएंगे और मजबूती से खड़े होंगे, ताकि तमिलनाडु में अम्मा का शासन फिर से लौटे, जनता की सरकार बहाल हो और अच्छा शासन कायम हो. यही हमारा साफ और स्पष्ट रुख है.''
VIDEO | Chennai, Tamil Nadu: Union Minister Piyush Goyal (@PiyushGoyal) said, "We will bring back good governance that Jayalalithaa gave to Tamil Nadu."
— Press Trust of India (@PTI_News) January 21, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/dv5TRARJn4)#Chennai pic.twitter.com/yDtGmDbq61
एएमएमके महासचिव दिनाकरण ने एनडीए में शामिल होने के संकेत कुछ शनिवार को ही दिए थे. पिछले साल सितंबर में एनडीए छोड़ते हुए एएमएमके ने बीजेपी पर एआईएडीएमके के एडप्पाडी के पलनीस्वामी को आगे बढ़ाने के लिए उसकी अनदेखी करने का आरोप लगाया था. अब एनडीए में शामिल होने के बाद दिनाकरण को गठबंधन के सीएम फेस के रूप में पलनीस्वामी के नाम को ही आगे बढ़ाना होगा. इसी दिनाकरण ने 2018 में एएमएमके के गठन के समय ईपीएस के नाम से मशहूर पलानीस्वामी का राजनीतिक करियर खत्म करने की कसम खाई थी.
तमिलनाडु में कितनी मजबूत है एएमएमके
दिनाकरण, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके की प्रमुख रहीं जयललिता की सहयोगी वीके शशिकला के भतीजे हैं. एआईएडीएमके से निकाले जाने के बाद दिनाकरण ने 2018 में एएमएमके का गठन किया था. एक समय शशिकला ही पर्दे के पीछे से एआईएडीएमके को चलाती थीं. लेकिन समय के साथ-साथ उनकी पकड़ पार्टी पर कमजोर पड़ती गई. उन्हें 2021 में एआईएडीएमके से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.
एएमएमके की दक्षिण और मध्य तमिलनाडु में रहने वाले थेवर समुदाय में मजबूत पकड़ है.लेकिन एएमएमके को एनडीए में रहते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में थेनी और तिरुचिरापल्ली सीट दी गई थी. दोनों ही सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा था. थेनी में तो दिनाकरण खुद ही उम्मीदवार थे. उन्हें डीएमके के थांगा तमिलसेल्वम ने हरा दिया था. वहीं तिरुचिरापल्ली में एएमएमके को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था.दिनाकरण,शशिकला और पूर्व पन्नीरसेल्वम भी थेवर समुदाय से ही आते हैं. वहीं पलानीस्वामी गौंडर समुदाय से आते हैं, जिसका पश्चिमी तमिलनाडु में अच्छा प्रभाव है.

दिनाकरण ने क्यों छोड़ा था एनडीए
एएमएमके सितंबर 2025 में एनडीए से अलग होने का फैसला किया था. पार्टी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी, पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके को खुश करने के लिए उसे नजरअंदाज कर रही है. दिनाकरण ने यह भी कहा था कि वह कभी भी ईपीएस को एनडीए के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे. ऐसी खबरें भी थीं कि एएमएमके अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन की भी बातचीत कर रही है. दिनाकरण ने विजय की खुलकर तारीफ करते हुए यहां तक कहा था कि टीवीके 2026 के चुनाव में बड़ा असर डालेगी.
इतना सब होने के बाद भी बीजेपी एएमएमके को हर हाल में एनडीए में वापसी चाहती थी. इसलिए दिनाकरण को मनाने के लिए उसने अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई को लगाया था. अन्नामलाई के संबंध भी ईपीएस से ठीक नहीं बताए जाते हैं. दिनाकरण ने इस महीने के शुरू में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी. माना जा रहा है कि शाह ने उन्हें एनडीए में सम्मानजनक सीटें और पूरा सम्मान देने का भरोसा दिया है.
काफी लंबी बातचीत के बाद एआईएडीएमके एनडीए में शामिल हुई थी. शर्त यह थी कि ईपीएस को सीएम फेस बनाया जाए. बीजेपी ने उसकी इस मांग को मान लिया था. बीजेपी राज्य में एनडीए को मजबूत करने में लगी हुई है. अभी पिछले हफ्ते ही
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) भी एनडीए में शामिल हुई थी. पीएमके प्रमुख अंबुमणि रामदास ने ईपीएस के सामने एनडीए में शामिल होने की घोषणा की थी.
एनडीए प्रधानमंत्री मोदी की 23 जनवरी को होने वाली रैली के जरिए ही अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करेगा.इस दौरान मंच पर पीएम मोदी के साथ सभी सहयोगी दलों के नेता मौजूद रहेंगे.
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