- अमित शाह ने गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की BSL-4 बायो-कंटेनमेंट लैब का शिलान्यास किया.
- केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लैब देश में वायरस जांच के लिए विदेशी लैब्स पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगी.
- 362 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फैसिलिटी 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली होगी और जैविक सुरक्षा बढ़ाएगी
गुजरात की राजधानी गांधीनगर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की अत्याधुनिक BSL-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास किया. यह लैब देश में जैविक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है.
इस दौरान अमित शाह ने कहा कि इस फैसिलिटी के निर्माण से भारत खतरनाक वायरस की जांच के लिए विदेशी लैब्स पर निर्भर नहीं रहेगा. यह लैब वैज्ञानिकों को संक्रामक और घातक वायरस पर सुरक्षित वातावरण में शोध करने का प्लेटफॉर्म देगी. साथ ही पशुओं से मानव तक फैलने वाले रोगों के अध्ययन की विश्वस्तरीय व्यवस्था भी यहां होगी.
362 करोड़ रुपये की आएगी लागत
उन्होंने बताया कि यह देश की दूसरी BSL-4 लैब होगी और किसी राज्य सरकार द्वारा बनाई जा रही पहली लैब है. 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाली यह फैसिलिटी भारत की जैविक सुरक्षा का मजबूत कवच बनेगी.
शाह ने कहा कि बायोटेक्नॉलजी क्षेत्र में भारत ने पिछले दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है, बायो इकोनॉमी 10 साल में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 166 अरब डॉलर तक पहुंच गई है.
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक ‘साइलेंट डिजास्टर': शाह
अमित शाह ने यह भी कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक ‘साइलेंट डिजास्टर' है और इससे निपटने के लिए साफ रोडमैप और जागरूकता जरूरी है. उन्होंने विज्ञान और विरासत के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने साबित किया है कि दोनों एक साथ आगे बढ़ सकते हैं.
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