- हाईकोर्ट ने देवरिया के थाने में चार लोगों को दस दिन तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में सख्त रुख अपनाया।
- कोर्ट ने एसपी देवरिया और एसएचओ गौरी बाजार से खराब सीसीटीवी फुटेज और उसके कारणों की जानकारी मांगी थी।
- अदालत ने राज्य सरकार को तीन याचियों को बीस हजार रुपए और एक याची को पांच हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।
देवरिया के एक थाने में 4 लोगों को 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में एसपी देवरिया अभिजीत आर शंकर और एसएचओ गौरी बाजार पेश हुए थे. कोर्ट ने एसपी देवरिया और एसएचओ से पुलिस स्टेशन में खराब सीसीटीवी और फुटेज को लेकर जानकारी मांगी थी. कोर्ट में पेश एसपी और एसएचओ ने कहा सीसीटीवी कैमरा खराब था और काम नहीं कर रहा था. इस पर कोर्ट एसपी और एसएचओ के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई. अदालत ने एसपी देवरिया से कहा कि खामियों के लिए एसएचओ के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. इस पर एसपी देवरिया ने कोर्ट से बगैर शर्त माफी मांगी.
कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन याचियों को 20-20 हजार रुपए और एक याची को 5000 मुआवजा देने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि 65000 का यह मुआवजा एसएचओ के वेतन से लिया जाए. देवरिया की गौरी बाजार पुलिस स्टेशन में 13 अप्रैल से 24 अप्रैल तक अवैध हिरासत को लेकर याचिका दाखिल की गई है. कोर्ट ने दो सितंबर को याचियों की अवैध हिरासत पर सीसीटीवी फुटेज मांगा था. इसके साथ ही एसपी देवरिया और एसएचओ पुलिस स्टेशन गौरी बाजार को तलब किया था. इस मामले में महेंद्र गौर और तीन अन्य की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी.
इसकी सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हो रही है, जिसके सदस्य जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत भी हैं. उन्होंने पुलिस अधिकारियों के स्पष्टीकरण पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि यह झूठों का गिरोह है. जस्टिस श्रीधरन ने यह टिप्पणी तब की, जब वह एसएचओ से पूछ रहे थे कि आखिर सीसीटीवी ने कब काम करना बंद कर दिया था और फिर कब उसे रिपेयर कराया गया. इस मामले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मांग पर थाने के अंदर की फुटेज मांगी थी. अदालत का कहना था कि इससे साफ हो सकेगा कि याचियों को थाने में कितने दिनों तक किस हाल में रखा गया था. इस पर पुलिस की ओर से जवाब दिया गया कि जिस दौरान की फुटेज मांगी जा रही है, उस वक्त सीसीटीवी कैमरा खराब था.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि जब 13 से 24 अप्रैल तक लोगों को हिरासत में रखा गया तो उस समय की सीसीटीवी फुटेज कहां है. इस पर एसएचओ का कहना था कि सीसीटीवी कैमरा 12 अप्रैल के बाद से ही काम नहीं कर रहा था. इसके बाद अदालत का अगला सवाल था कि क्या थाने की जनरल डायरी में कैमरे के खराब होने की एंट्री की गई थी. इस पर एसएचओ ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ था. एसपी का कहना था कि उन्हें भी सीसीटीवी खराब होने की जानकारी नहीं दी गई थी. इस पर अदालत ने एसपी से सवाल दागा कि फिर आपने एसएचओ पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया. एसपी ने इसके लिए माफी मांगी तो जजों ने कहा कि आप अदालत से नहीं बल्कि जनता से इसके लिए माफी मांगिए.
जस्टिस श्रीधरन बोले- जो जीडी में एंट्री नहीं कर सकता, वह सिपाही लायक भी नहीं
जस्टिस श्रीधरन ने अपनी मौखिक टिप्पणी में यहां तक कहा कि क्या आपने उसे सस्पेंड किया? उन्हें हटाया. थाने का एक एसएचओ जो जनरल डायरी में एंट्री तक नहीं कर सकता, उसे हटाया जाना चाहिए. ऐसा व्यक्ति तो सिपाही बनने योग्य भी नहीं है. अदालत ने एसपी से कहा कि जब एसएचओ दोषी हैं तो फिर एक्शन क्यों नहीं लिया. इस पर एसपी ने कहा कि उनका क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर किया जा चुका है. इस एक्शन से अदालत संतुष्ट नहीं दिखी.
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