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ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट खत्म होगा; देशभर की बसें एक ही प्लेटफार्म पर, जानिए संसदीय समिति की 10 बड़े प्रस्ताव

राज्यसभा की संसदीय स्थायी समिति ने बस परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रमुख सिफारिशें की हैं. इनमें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की जगह ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट, डिजिटल टिकटिंग, रियल टाइम ट्रैकिंग, चेक पोस्ट समाप्त करने और नेशनल बस डिजिटल ग्रिड बनाने का प्रस्ताव शामिल हैं.

ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट खत्म होगा; देशभर की बसें एक ही प्लेटफार्म पर, जानिए संसदीय समिति की 10 बड़े प्रस्ताव
बस यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव! टूरिस्ट परमिट की जगह आएगा नया ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट

देश में बस परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. राज्यसभा की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति (392nd REPORT OF THE DEPARTMENT-RELATED PARLIAMENTARY STANDING COMMITTEE ON TRANSPORT, TOURISM AND CULTURE) की 392वीं रिपोर्ट में बस परिवहन क्षेत्र के लिए 10 महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं. इनमें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की जगह नया ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट, बॉर्डर चेक पोस्ट खत्म करने, बसों की रियल टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग, महिला सुरक्षा और इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. ये रही समिति की 10 प्रमुख सिफ़ारिशें.

1. अखिल भारतीय यात्री परमिट (All India Passenger Permit): ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की जगह सरकार ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट (All India Passenger Permit) देगी. इसके तहत वाहन का रजिस्ट्रेशन राज्य करेंगे, लेकिन परमिट की निगरानी VAHAN, FASTag और वाहन लोकेशन डेटा को जोड़कर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होगी. राज्यों में जहां अभी भी बॉर्डर चेक पोस्ट हैं, उनको खत्म किया जाए. इसके अलावा दुर्घटना में घायल यात्री के बीमा क्लेम को लेकर विवाद लंबे समय तक चलता है इसको लेकर कहा गया है कि बीमा नियामक के साथ मिलकर घायल यात्री के दावे को विवादमुक्त बनाया जाए.

2. राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण (National Bus Terminals Authority) : दूसरी सिफारिश नेशनल बस टर्मिनल अथॉरिटी बनाने की दी गई है. बस टर्मिनल के मालिकाना हक और बस संचालन को अलग किया जाए और एयरपोर्ट अथॉरिटी की तर्ज पर नेशनल बस टर्मिनल अथॉरिटी बनाई जाए. बस टर्मिनलों के लिए एक समान राष्ट्रीय नियम यानी National Code for Bus Terminals बनाया जाए. साथ ही बस स्टॉप का एक मानक डिजाइन तैयार किया जाए.

3. राष्ट्रीय बस डिजिटल ग्रिड (National Bus Digital Grid) : तीसरी सिफारिश नेशनल बस डिजिटल ग्रिड बनाने की है. पूरे देश में बसों के लिए एक नेशनल बस डिजिटल ग्रिड बनाया जाए ताकि यात्रियों को बस की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा मिले. सवारियां सरकारी और निजी बसों की एकीकृत ऑनलाइन बुकिंग कर सकें और यात्री बस और बस टर्मिनल की स्थिति की शिकायत फोटो और लोकेशन के साथ कर सकें. बसों की समय पर पहुंचने की क्षमता और रूट से जुड़े खतरे का डिजिटल मैप तैयार हो.

4. संचालक-केंद्रित सुरक्षा (Operator-centric safety) : चौथी सिफारिश बस सुरक्षा पर ज्यादा जोर देने पर है. हर जिले में Automated Testing Stations स्थापित किया जाए. फिटनेस टेस्ट के दौरान आग से बचाव, इमरजेंसी एग्जिट और अलर्ट सिस्टम की जांच आवश्यक हो स्लीपर और स्कूल बस में सुरक्षा उपकरणों को बाद में भी लगाने की व्यवस्था हो और बस ऑपरेटर की सेफ्टी रेटिंग (Safety Rating) तैयार हो और परमिट नवीनीकरण में इसका इस्तेमाल किया जाए.

5. फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट (Fleet Transition Compact) : पांचवीं सिफारिश  फ्लीट ट्रांजिशन कॉम्पैक्ट बनाने की योजना पर है. यानि बस ऑपरेटर को बस खरीदने के बजाय लीज पर बस लेने की सुविधा दी जाए. ताकि आपरेटर पुरानी बसों को स्क्रैप करके नई बसें जोड़ सकें. इलेक्ट्रिक बसों के लिए समयबद्ध योजना को बढ़ावा दिया जाए और हर ऑपरेटर के लिए लक्ष्य तय किए जाएं. जहां बसें चलती हैं, उसी हिसाब से चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएं. इलेक्ट्रिक बसों और बैटरियों के इस्तेमाल के बाद उनके निपटान की नीति बने.

6. महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा संचालित सेवाएं (Services for women, run by women): छँटी सिफारिश है कि महिलाओं के लिए और महिला संचालित बस सेवाओं को बढ़ावा दिया जाए. पीक आवर्स में महिलाओं द्वारा संचालित विशेष बस सेवाओं के संचालन का चार्ट तैयार हो. इस तरह की नई बसों में CCTV लगाया ताकि मॉनिटरिंग की जा सके. महिलाओं की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम (Emergency Alert System) का विस्तार हो. बसों में ऑन-बोर्ड टॉयलेट के मानक तय किए जाएं. रात में बस रुकने वाले स्थानों पर साफ-सफाई की निगरानी हो.

7. राष्ट्रीय पर्यटक बस ग्रिड (National Tourist Bus Grid) : सातवीं सिफारिश राष्ट्रीय पर्यटक बस ग्रिड बनाने की है. पर्यटन स्थलों को बस, रेल, मेट्रो, हवाई और जल परिवहन से जोड़ा जाए. साथ ही एकीकृत टिकटिंग व्यवस्था हो. Tourist Buses के रखरखाव और मरम्मत का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए. प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक इंटरमॉडल हब बनाए जाएं. यात्रियों की संतुष्टि का नियमित सर्वे कराया जाए.

8. बस यात्रियों के लिए बजटीय पहचान (A budgetary identity for the bus passenger): आठवीं सिफारिश बस यात्रियों के लिए अलग बजट बनाया जाए. सार्वजनिक परिवहन के लिए मंत्रालय के बजट में अलग प्रावधान हो. समिति ने सरकार से सड़क क्षेत्र के बजट में लगभग 25% तक हिस्सा सार्वजनिक परिवहन के लिए देने पर विचार करने को कहा है. अच्छे बस टर्मिनल और टेस्टिंग स्टेशन्स के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding) दी जाए. मानक बस स्टॉप बनाने के लिए MPLADS के माध्यम से सांसदों को जानकारी उपलब्ध कराई जाए.

9. राज्यों की स्थिति (The State of the States) : नौंवी सिफारिश यह की गई है कि राज्यों की बस परिवहन (Bus Transport Ranking) सुविधा के आधार पर राज्यों की वार्षिक प्रकाशित रैंकिंग की जाए. ताकि अच्छी व्यवस्था बनाने के लिए राज्य प्रोत्साहित हों. हर साल राज्यों की रैंकिंग जारी की जाए. इसमें बस टेस्टिंग, टर्मिनल की सुविधा, इमरजेंसी सिस्टम और बसों की समयबद्धता जैसे मानकों को शामिल किया जाए. यात्रियों और बस ऑपरेटरों की प्रतिक्रिया भी रैंकिंग में शामिल हो. नागरिकों की शिकायतों के निपटारे का रिकॉर्ड भी देखा जाए. जिन राज्यों में अभी भी बॉर्डर चेक पोस्ट चल रहे हैं, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाए.

10. यात्रियों की गणना (Count the passenger) : दसवीं सिफारिश यह है कि बस में कितने यात्री सफर करते हैं इसका सही आंकड़ा प्रकाशित किया जाए. देश में बसों की कुल संख्या के आंकड़ों को छह महीने में मिलान और व्यवस्थित किया जाए. सभी श्रेणियों की बसों का एक समेकित सर्वश्रेणी विवरण (Consolidated National Statement) तैयार हो. राज्यों की अपनी डेटा व्यवस्था को बनाए रखते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटा संरचना (Federated National Data Architecture) बनायी जाए जिसमें राज्यों के अपने सिस्टम हों. देश में बस से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या का समय-समय पर आधिकारिक अनुमान जारी किया जाए.

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