देश में महंगी स्वास्थ्य सेवाओं और बढ़ते चिकित्सा खर्च को लेकर संसद की स्थायी समिति ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है. समिति का मानना है कि इलाज और दवाइयों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है. इसी को देखते हुए रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए गए हैं ताकि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं अधिक लोगों की पहुंच में आ सकें.
निजी अस्पतालों के किराये पर सीमा लगाने की सिफारिश
संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने बताया कि रिपोर्ट में बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों के कमरे के किराये को नियंत्रित करने की सिफारिश की गई है. समिति का कहना है कि किसी बड़े निजी अस्पताल का रूम किराया उसके आसपास मौजूद तीन सितारा होटल के किराये से अधिक नहीं होना चाहिए.
समिति का मानना है कि कई निजी अस्पतालों में कमरे का किराया इतना अधिक है कि मध्यम वर्ग और गरीब परिवार इलाज के दौरान भारी आर्थिक संकट में पहुंच जाते हैं. रिपोर्ट में केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है कि बड़े निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं आम नागरिकों को कम खर्च पर उपलब्ध हों.
दवाओं की कीमतों पर भी बड़ा सुझाव
समिति ने दवाओं की कीमतों को लेकर भी महत्वपूर्ण सिफारिश की है. रिपोर्ट के अनुसार किसी दवा की बिक्री कीमत उसकी उत्पादन लागत से 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए.
रामगोपाल यादव ने कहा कि वर्तमान में कई ऐसी दवाइयां बाजार में उपलब्ध हैं जिनकी उत्पादन लागत करीब 20 रुपये होती है लेकिन वही दवा 100 से 150 रुपये तक बेची जाती है. समिति का मानना है कि इस अंतर को कम करके मरीजों को बड़ी राहत दी जा सकती है.
स्वास्थ्य खर्च घटाने पर जोर
समिति की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब निजी स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और दवाइयों की कीमतों को लेकर लगातार बहस हो रही है. रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इलाज और दवाइयों का खर्च कम हो तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें.
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