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शंकराचार्य से मिले अखिलेश यादव, राम मंदिर पर कहा- सांचा नहीं ढांचा बदलें; BJP बोली- चुनाव देख कर रहे ढोंग

लखनऊ में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग का समर्थन किया. राम मंदिर पर भी सवाल उठाए. इस मुलाकात के बाद भाजपा और सपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है.

शंकराचार्य से मिले अखिलेश यादव, राम मंदिर पर कहा- सांचा नहीं ढांचा बदलें; BJP बोली- चुनाव देख कर रहे ढोंग
शंकराचार्य के चरणों में बैठे अखिलेश यादव; गौ माता के मुद्दे पर समर्थन, BJP का पलटवार

Uttar Pradesh Politics: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की "गविष्टि धर्मयुद्ध यात्रा" के लखनऊ पहुंचने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विमर्श शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग का समर्थन किया. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रदेश में गौवंश की स्थिति, सनातन समाज से जुड़े मुद्दों और राजनीतिक हालातों पर चर्चा हुई. वहीं इस मुलाकात के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. भाजपा प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित कदम बताया है.

शंकराचार्य से मिले अखिलेश यादव

लखनऊ पहुंचे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया. इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य की उस मांग का समर्थन किया जिसमें गाय को "राष्ट्र माता" घोषित करने की बात कही जा रही है. मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने गौवंश की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए.

गौवंश और सनातन समाज के मुद्दे उठाए

मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि गौ सेवा से जुड़े लोग आज परेशान हैं और प्रदेश में गौवंश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. उन्होंने कहा, "गौ माता को लेकर शंकराचार्य जी बेहद चिंतित हैं. सनातनी बहुत दुखी हैं. 'गौ माता' की सेवा करने वाले दुखी हैं. इस सरकार ने उन्हें तकलीफें, मुश्किलें और महंगाई दी है." उन्होंने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण और अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया.

SIT जांच पर भी उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने कुछ मामलों की जांच कर रही एसआईटी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "SIT लीपापोती है, सुनने में तो आया है कि SIT पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, एक सदस्य पर 420 का मुकदमा है. ये दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई है." इसके साथ उन्होंने कहा, "सांचा नहीं पूरा ढांचा बदलना चाहिए, सनातनी बहुत दुःखी हैं. इस सरकार ने कष्ट, दुःख और महंगाई दी है."

भाजपा का पलटवार

अखिलेश यादव की शंकराचार्य से मुलाकात पर भाजपा प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "सनातन धर्म का लगातार अपमान करने वाले, श्रीरामजन्मभूमि मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले निर्दोष रामभक्तों की हत्या करने वाले, श्रीरामचरितमानस को फड़वाकर जलवाने वाले, अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर का दर्शन नहीं करने वाले और अपनी पार्टी के लोगों को दर्शन से रोकने वाले, श्रीराम का मंदिर ना बन पाए उसके लिए सारी ताक़त लगाने वाले और परम पूज्य शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी को तुष्टिकरण की पराकाष्ठा में अंधे होकर वाराणसी की सड़कों पर पिटवाने वाली पार्टी के अध्यक्ष आज चुनाव नज़दीक देख कर परम पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में बैठने का ढोंग कर रहे हैं."

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

शंकराचार्य और अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसे आगामी चुनावी राजनीति, सनातन विमर्श और गौवंश के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है. एक ओर समाजवादी पार्टी इसे धार्मिक एवं सामाजिक संवाद बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रही है.

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