- भारत के NSA अजीत डोभाल बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर वार्ता करेंगे.
- यह वार्ता भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान के लिए चल रही विशेष प्रतिनिधि प्रक्रिया का 25वां दौर होगा.
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने से पहले यह बैठक अहम है.
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आज चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे. डोभाल का यह चीन दौरान कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है. हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के जगहों के नाम बदलने को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तनातनी दिखी है. इस बीच डोभाल का बीजिंग दौरे पर खास नजर रहेगी. मिली जानकारी के अनुसार बीजिंग के इस दौरे में अजीत डोभाल सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे. सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे.
भारत-चीन सीमा वार्ता की मौजूदा प्रक्रिया
- डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं. यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी.
- हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं.
- यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है. वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं.
जिनपिंग के भारत दौरे में PM मोदी के साथ हो सकती है द्विपक्षीय वार्ता
शी की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं. शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है. दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे.
बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है.

सीमाई इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरीः जयशंकर
जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था.'' उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है, और सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी.''
अरुणाचल के जगहों के नाम बदलने पर दिखी थी तनातनी
इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था. भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का ‘‘अटूट और अभिन्न'' हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस ‘‘निर्विवाद वास्तविकता'' को बदल नहीं सकती.
एक्सपर्ट बोले- डोभाल का यह दौरा क्यों इतना अहम?
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के सोमवार को होने वाले चीन दौरे को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा कि यह दौरा दो वजहों से महत्वपूर्ण है. पहला सीमा विवाद सुलझाना और दूसरा शी जिनपिंग को ब्रिक्स समिट के लिए आमंत्रित करना. उन्होंने कहा कि भारत के हालिया कदम चीन के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने की उत्सुकता को दर्शाते हैं, जो एशिया के दो बड़े देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए अहम हैं.
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने जो कदम उठाए हैं, वे इस बात का साफ इशारा हैं कि भारत चीन के साथ स्टेबल रिश्ते बनाए रखने के लिए बहुत उत्सुक है. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच 100 प्रतिशत सहमति नहीं हो सकती है और मतभेद बने रहेंगे. मेरा मानना है कि ये कदम एशिया के दो बड़े देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए अहम कदम हैं.
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