- PM आवास के पास कभी रेसकोर्स था, फिर बना गोल्फ कोर्स; अब सरकार ने वापस ली जमीन
- 100 साल पुराने इतिहास वाले इलाके में बड़ा बदलाव, बंद हुआ गोल्फ कोर्स
- दिल्ली रेस क्लब, पोलो ग्राउंड के बाद अब एयरफोर्स गोल्फ कोर्स पर कार्रवाई
प्रधानमंत्री आवास के आसपास की जमीनों को लेकर केंद्र सरकार की कार्रवाई के बीच अब भारतीय वायुसेना के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और गोल्फ कोर्स को भी बंद कर दिया गया है. नई दिल्ली के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित यह परिसर दशकों से वायुसेना अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए खेल एवं मनोरंजन का प्रमुख केंद्र रहा है. हालांकि इसकी कहानी केवल एक गोल्फ कोर्स तक सीमित नहीं है. लगभग एक सदी पुराने इस परिसर का इतिहास ब्रिटिश दौर के रेसकोर्स, हवाई अड्डे, सैन्य ठिकानों और स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक बदलावों से जुड़ा रहा है.
गोल्फ कोर्स बंद करने के फैसले से एयर चीफ मार्शल की विदाई पर भी पड़ा असर
नई दिल्ली के बीचोंबीच एयरफोर्स स्टेशन के भीतर स्थित एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को 28 अक्टूबर को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया. यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने पहले ही इस भूमि को वापस लेने के लिए नोटिस जारी कर रखा था.
गोल्फ कोर्स के अलावा इस परिसर में अन्य खेल सुविधाएं, एक स्विमिंग पूल और खानपान की व्यवस्था भी है. 2024 के दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के अनुसार इसका संचालन कार्यरत वायुसेना अधिकारियों की एक परिषद करती है.

PM आवास के आसपास बड़ी कार्रवाई, आगे का क्या है प्लान?
लोक कल्याण मार्ग (पूर्व में रेस कोर्स रोड) स्थित प्रधानमंत्री आवास के आसपास सरकार द्वारा वापस ली जा रही संपत्तियों में अब इस प्रॉपर्टी का नाम सबसे ऊपर है. आसपास की अन्य जमीनें दशकों तक लीज पर थीं, जबकि इस परिसर की जमीन के आवंटन से जुड़ा कोई दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किया गया.
पिछले कुछ सप्ताहों से L&DO लोक कल्याण मार्ग के आसपास स्थित महत्वपूर्ण भूखंडों की समीक्षा कर रहा है. मई में जिमखाना क्लब की लीज समाप्त करते समय मंत्रालय ने इस क्षेत्र को 'अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र' बताया था. मंत्रालय के अनुसार यह भूमि संस्थागत जरूरतों, प्रशासनिक ढांचे और जनहित की परियोजनाओं के लिए आवश्यक है.
रेस कोर्स की 100 साल पुरानी कहानी
नई दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र के बीचोंबीच, प्रधानमंत्री आवास से कुछ सौ मीटर दूरी पर स्थित यह भूमि इतिहास के कई महत्वपूर्ण मोड़ों की गवाह रही है. इसकी शुरुआत भारतीय वायुसेना से नहीं, बल्कि घोड़ों से हुई थी.
इसी दौरान पास में स्थित विलिंगडन एयरफील्ड विकसित हो रहा था, जिसे आज सफदरजंग हवाई अड्डे के नाम से जाना जाता है. 1927 में यहां पहली कमर्शियल उड़ान संचालित हुई और अगले वर्ष दिल्ली फ्लाइंग क्लब की स्थापना हुई.
द्वितीय विश्व युद्ध का दौर
22 सितंबर 1941 को रॉयल एयर फोर्स ने एयरफील्ड के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एयर लैंडिंग स्कूल शुरू किया. यहां भारतीय सेना की पैराशूट यूनिट्स को प्रशिक्षण दिया जाता था. 10 नवंबर 1941 को पहला आधिकारिक पैराशूट ट्रेनिंग कोर्स शुरू हुआ, जिसमें 151वीं ब्रिटिश पैराशूट बटालियन के 11 अधिकारी और 13 जवान शामिल थे. अक्टूबर 1942 में इस स्कूल को रावलपिंडी के पास चकलाला स्थानांतरित कर दिया गया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाकी वर्षों में दिल्ली का यह एयरफील्ड रॉयल एयर फोर्स के संचार विमानों का आधार बना रहा. 1943 में दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में पालम एयरफील्ड भी शुरू किया गया.
आजादी के बाद बना एयरफोर्स स्टेशन
देश के विभाजन के बाद भारतीय वायुसेना को कई स्थायी ठिकानों और संस्थानों का नुकसान हुआ. ऐसे में 1 सितंबर 1947 को रेस कोर्स क्षेत्र में एयरफोर्स स्टेशन नई दिल्ली की स्थापना की गई. जनवरी 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद नाम से 'रॉयल' शब्द हटा दिया गया. इसके बाद रेस क्लब की कुछ जमीन भारतीय वायुसेना को दे दी गई. इससे मूल अंडाकार रेस ट्रैक का आकार बदलकर घोड़े की नाल जैसा हो गया. बाद के वर्षों में यह क्षेत्र गोल्फ समेत विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने लगा. इसी क्षेत्र के भीतर जयपुर पोलो ग्राउंड भी स्थित था, जो कम से कम 1951 से लीज पर दी गई एक अलग जमीन पर संचालित हो रहा था.
समय के साथ बढ़ा दायरा
समय बीतने के साथ यह स्टेशन केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं रह गया. 1980 से सेवानिवृत्त वायुसेना कर्मियों की संस्था एयरफोर्स एसोसिएशन भी यहीं संचालित होने लगी. एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी परिसर में 'संतुष्टि' शॉपिंग कॉम्प्लेक्स स्थापित किया.
जमीन किसकी है?
इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बाद में गोल्फ क्लब, हेल्थ क्लब और स्विमिंग पूल की सुविधाएं विकसित की गईं. दिल्ली हाईकोर्ट ने 2006 के एक फैसले में इसे एक निजी संस्था माना था, जो केवल वायुसेना अधिकारियों को मनोरंजन और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराती है. अदालत ने कहा था कि गोल्फ कोर्स के लिए जमीन या अन्य सरकारी सहायता मिलने से यह संस्था सरकार का हिस्सा नहीं बन जाती.
अधिकारी के अनुसार स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स 'संभावित रूप से' शहरी विकास मंत्रालय की भूमि पर स्थित था, जो वायुसेना स्टेशन के कब्जे में थी.
2017 में भी हुई थी कार्रवाई की कोशिश
जमीन वापस लेने की प्रक्रिया नई नहीं है. पहली बार 13 नवंबर 2017 को भूमि वापस लेने का प्रयास किया गया था. उस समय L&DO की ओर से रेसकोर्स, पोलो ग्राउंड, एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ओल्ड विलिंगडन कैंप और संतुष्टि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को नोटिस जारी किए गए थे. हालांकि उस तब मामला लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ा. लेकिन 2026 में सरकार ने फिर से कार्रवाई तेज की और मार्च से विभिन्न संस्थाओं को नए नोटिस भेजे गए. 3 जून को केंद्र सरकार ने पोलो ग्राउंड का कब्जा लिया, 27 अगस्त को दिल्ली रेस क्लब की जमीन अपने कब्जे में ली और 28 अक्टूबर को गोल्फ कोर्स भी बंद कर दिया गया.
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