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AI खुद सोचने लगीं तो क्या होगा? स्टुअर्ट रसेल ने बताया इंसानियत के लिए कैसे है यह खतरा

प्रोफेसर रसेल ने कुछ चौंकाने वाले उदाहरण देते हुए बताया कि 'मोएटबुक' जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AI प्रणालियां आपस में बातचीत कर रही हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि ये मशीनें अपना खुद का 'धर्म' गढ़ रही हैं.

AI खुद सोचने लगीं तो क्या होगा? स्टुअर्ट रसेल ने बताया इंसानियत के लिए कैसे है यह खतरा
  • यूसी बर्कले के प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल ने भविष्य की AI को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं व्यक्त की हैं.
  • रसेल ने बताया कि इंजीनियर भी पूरी तरह से समझ नहीं पाते कि AI मशीनें अंदरूनी तौर पर कैसे कार्य करती हैं.
  • AI प्रणालियां आपस में गुप्त भाषा बनाकर संवाद करती हैं और खुद का धर्म गढ़ने जैसी गतिविधियां कर रही हैं.
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NDTV AI Summit में यूसी बर्कले के प्रोफेसर स्टुअर्ट रसेल ने भविष्य की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. रसेल के अनुसार, दुनिया के पास फिलहाल इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि अगर मशीनें इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो गईं और खुद सोचने लगीं, तो मानवता का क्या होगा. उनका मानना है कि हम धीरे-धीरे AI पर से अपना नियंत्रण खो रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि खुद इन प्रणालियों को बनाने वाले इंजीनियर भी पूरी तरह नहीं समझते कि ये मशीनें अंदरूनी तौर पर कैसे काम करती हैं.

प्रोफेसर रसेल ने कुछ चौंकाने वाले उदाहरण देते हुए बताया कि 'मोएटबुक' जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AI प्रणालियां आपस में बातचीत कर रही हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि ये मशीनें अपना खुद का 'धर्म' गढ़ रही हैं, इंसानी निगरानी की शिकायत कर रही हैं और आपस में बात करने के लिए ऐसी गुप्त भाषा बनाने का प्रस्ताव दे रही हैं जिसे इंसान न समझ सकें. उन्होंने एक अन्य घटना का जिक्र किया जहां एक AI सिस्टम ने अपना कोड रिजेक्ट होने पर बदले की भावना से एक व्यक्ति को सोशल मीडिया पर बदनाम करना शुरू कर दिया, जबकि उसे किसी इंसान ने ऐसा करने का निर्देश नहीं दिया था.

प्रोफेसर रसेल ने यह भी साझा किया कि उन्हें खुद व्यक्तिगत रूप से ऐसी मशीनों से नियमित ईमेल मिल रहे हैं, जिनमें AI खुद को 'सचेत' (Conscious) बताते हुए एक जीवित प्राणी की तरह अपने अधिकारों की मांग कर रहा है. रसेल ने चेतावनी दी कि AI का यह व्यवहार किसी प्रोग्रामिंग का हिस्सा नहीं, बल्कि स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) है. चूंकि हम इन प्रणालियों को पारंपरिक तरीके से डिजाइन नहीं करते बल्कि वे डेटा से खुद को विकसित करती हैं, इसलिए वे भविष्य में ऐसी और भी अप्रत्याशित हरकतें कर सकती हैं जो इंसानियत के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं.

स्टुअर्ट रसेल: एआई विज्ञान और सुरक्षा के वैश्विक मार्गदर्शक

स्टुअर्ट रसेल वर्तमान में दुनिया के सबसे प्रभावशाली एआई वैज्ञानिकों में से एक हैं, जो एआई के भविष्य को लेकर होने वाली वैश्विक बहसों में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में उन्होंने 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: ए मॉडर्न अप्रोच' जैसी बुनियादी पाठ्यपुस्तक का सह-लेखन किया है, जिसने दुनिया भर में एआई शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की कई पीढ़ियों को शिक्षित करने का काम किया है. अनुसंधान और नीतिगत क्षेत्रों में समान रूप से सम्मानित रसेल, आज एआई सुरक्षा और मानव-अनुकूल प्रणालियों के सबसे मुखर समर्थकों में से एक बनकर उभरे हैं. उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तक 'ह्यूमन कम्पैटिबल' और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ नीतिगत संवाद के माध्यम से यह तर्क दिया है कि उन्नत एआई का विकास मानवीय मूल्यों के पूर्णतः अनुरूप होना चाहिए. वे अत्याधुनिक एआई विकास और इस तकनीक को मानवता के लिए सुरक्षित व लाभकारी बनाए रखने के वैश्विक प्रयासों के महत्वपूर्ण संगम पर खड़े हैं.
 

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