- अहमदाबाद में डेढ़ साल के बच्चे वंश ने प्लास्टिक का हल्क खिलौना निगल लिया, जिससे उसकी जान खतरे में आ गई
- वंश के पेट में खिलौना फंसने पर उसे तेज दर्द और उल्टी शुरू हो गई, जिसके बाद परिवार ने अस्पताल पहुंचाया
- अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक्स-रे में बच्चे के पेट में खिलौना देखा और तुरंत सर्जरी की
गुजरात के अहमदाबाद में एक डेढ़ साल के बच्चे ने 'हल्क' नाम का प्लास्टिक का खिलौना निगल लिया, जिसके बाद उसकी जान पर बन आई. वंश के पेट में खिलौना जाने के बाद उसे दर्द होने लगा. ऐसे में वंश जोर-जोर से रोने लगा. वंश लाख कोशिशों के बाद शांत नहीं हुआ, तो माता-पिता उसे अस्पताल ले गए. डॉक्टर ने जब वंश का एक्स-रे किया, तो वे दंग रहे गए. वंश के पेट में एक खिलौना था. डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कर वंश के पेट से हल्क नाम का खिलौना निकाला. लगभग 45 मिनट तक चली इस सर्जरी के बाद वंश अब पूरी तरह से ठीक है. डॉक्टरों ने बताया कि अगर खिलौना बच्चे की आंत में चला जाता, तो मुश्किल बढ़ सकती थी.
पेट में 'हल्क' को देख डॉक्टर भी रह गए दंग
डॉक्टरों द्वारा की गई इस सर्जरी का एक वीडियो भी सामने आया है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि हरे रंग का खिलौना वंश के पेट में है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द इस खिलौने को बच्चे के पेट से नहीं निकाला जाता, तो मुश्किल बढ़ सकती थी. मामला 18 जनवरी का है. उस दिन बच्चा घर में खेल रहा था. परिवार ने अचानक बच्चे के चेहरे पर परेशानी देखी, वह दर्द से रोने लगा. कुछ समय बाद बच्चे को उल्टी होने लगी. वंश की मां भाविकाबेन को शक हुआ कि बच्चे ने कुछ गलत चीत निगल ली है. ऐसे में परिवार वाले तुरंत बच्चे को लेकर अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल पहुंचे. यहां एक्स-रे के बाद वंश के पेट में खिलौना दिखा, जिसके बाद डॉक्टर भी दंग रह गए.

डॉक्टर के लिए सर्जरी थी चैलेंजिंग
मामला क्रिटिकल था और बच्चा छोटा, ऐसे में अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने इस सर्जरी को करने का जिम्मा उठाया. डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि कई बार बच्चे या मानसिक रोगी कुछ मेटल के टुकड़े या प्लास्टिक निकल लेते हैं. लेकिन ये मामला बिल्कुल अलग था. बच्चे के पेट में फंसा खिलौना कोई टुकड़ा नहीं था, बल्कि हाथ, पैर और सिर वाली एक पूरी साइज की चीज थी. ऐसे में इसे निकालना एक बड़ी चुनौती था.
कैसे पेट से बाहर निकाला खिलौना?
डॉक्टर जोशी ने बताया, 'फूड पाइप और पेट के बीच एक नेचुरल वॉल्व होता है. सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े खिलौने को इस वॉल्व से होकर निकलना था. जब हमने एंडोस्कोप जैसे नाजुक टूल से उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन पेट में हवा होने की वजह से खिलौना बार-बार फिसल रहा था. एक समस्या ये भी आ रही थी कि अगर हम खिलौने का हाथ या पैर पकड़कर खींचते, तो वो फूड पाइप में फंस सकता था. ऐसी कंडीशन में बच्चे के वॉल्व को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता था. इसलिए हमने खिलौने के सिर को पकड़कर सावधानी से वॉल्व पार करके उसे बाहर निकाला.'
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अगर आंत में पहुंचा जाता 'हल्क'...
डॉक्टर ने बताया कि इस सर्जरी को करने में हमें लगभग 45 मिनट का समय लगा. हमने पूरे धैर्य के साथ खिलौने को सिर से पकड़ा और धीरे-धीरे उसे बाहर लेकर आए. दरअसल, हमें सबसे बड़ा डर ये सता रहा था कि कहीं खिलौना बच्चे की आंत में न चला जाए. अगर ऐसा होता, तो खिलौने का साइज इतना बड़ा था कि बच्चे की आंत फट सकती थी. ऐसे में हमें बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा और आंत से खिलौना निकालना पड़ता. लेकिन शुक्र है कि खिलौना आंत में नहीं गया.
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