- कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारियों ने एक साल तक सोना न खरीदने का निर्णय लिया है
- दोनों मंत्रालयों ने बिजली, ईंधन बचाने और सरकारी खर्च घटाने के लिए गैरजरूरी उपकरण बंद करने जैसे उपाय अपनाए हैं
- अधिकारियों ने हफ्ते में एक दिन कार-पूलिंग करने का फैसला किया है जिससे वाहन उपयोग में लगभग एक-तिहाई कमी आए
वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील रंग लाती दिख रही है. कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के अधिकारियों ने पीएम मोदी के विदेशी मुद्रा बचाने की अपील का समर्थन किया है. उन्होंने एक साल तक सोना नहीं खरीदने का फैसला लिया है. हालांकि उन्होंने शादी-विवाह जैसे खास मौकों के इससे अलग रखा है. ये जानकारी सोमवार को एक आधिकारिक बयान में दी गई.
बिजली, ईंधन बचाने के लिए बड़े कदम
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोना नहीं खरीदने का फैसला पीएम मोदी के 'संयम, संसाधन संरक्षण और आत्मनिर्भरता' के आह्वान को प्रशासनिक स्वरूप देने की दिशा में लिया गया है. दोनों मंत्रालयों में बिजली, ईंधन बचत, वर्चुअल कामकाज और सरकारी खर्च घटाने को लेकर भी कई कदम उठाए गए हैं. इसमें दफ्तरों में गैरजरूरी बिजली उपकरणों को बंद रखने, 20 प्रतिशत कर्मचारियों को बारी-बारी से 'वर्क फ्रॉम होम' देने और कार-पूलिंग प्रणाली लागू करने जैसे उपाय शामिल हैं.
अधिकारी हफ्ते में एक दिन कार-पूलिंग करेंगे
इस फैसले के तहत दोनों मंत्रालयों के अधिकारी अब हफ्ते में एक दिन कार-पूलिंग करेंगे. वाहन उपयोग में लगभग एक-तिहाई की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही, आधिकारिक यात्राओं और बैठकों को जरूरत पर आधारित बनाया जाएगा और अगर संभव है तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कामकाज किया जाएगा.
1 साल तक सोना नहीं खरीदेंगे
अधिकारियों ने सामूहिक रूप से फैसला लिया है कि अगले एक साल तक वे सोना नहीं खरीदेंगे, हालांकि बेटी की शादी या विशेष पारिवारिक अवसरों पर इसमें छूट दी जाएगी. इसे एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि स्वैच्छिक सामाजिक-नैतिक संकल्प बताया गया है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस फैससे को पीएम मोदी की अपील पर गंभीर प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत संयम का उदाहरण बताया. उन्होंने मंत्रालयों में ऊर्जा की बचत पर भी जोर दिया. इसके अलावा, कृषि मंत्रालय ने 'कृषि बचाओ अभियान' शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत वैज्ञानिक गांवों में जाकर मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग की सलाह देंगे. यह अभियान एक जून से 15 दिनों तक देशभर में चलाया जाएगा.
बता दें कि पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने हाल ही में सोने-चांदी के आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है, जबकि सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा भी तय की गई है.
इनपुट- भाषा के साथ
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