भारत में सोना सिर्फ निवेश के लिए नहीं बल्कि शादी-ब्याह के साथ त्योहार का एक हिस्सा होता है. देश में जितना सोना हर साल खरीदा जाता है, उससे कहीं ज्यादा सोना पहले से ही लोगों के घरों में बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ है. जी हां. भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास मिलाकर करीब 30 हजार से 32 हजार टन तक सोना है, जिसकी कीमत करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर है. कुछ रिपोर्ट्स में तो ये आंकड़ा 35 हजार टन तक भी बताया जाता है. हैरानी की बात ये है कि इस सोने का बड़ा हिस्सा घरों के लॉकर, अलमारियों और तिजोरियों में बिना इस्तेमाल के पड़ा है. अगर इस सोने का थोड़ा सा हिस्सा भी फिर से अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल होने लगे तो इससे देश को बड़ा फायदा हो सकता है.
मिडिल ईस्ट में जारी टेंशन के बीच पिछले महीने पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि नया सोना खरीदने के बजाय घरों में रखे पुराने और बिना इस्तेमाल होने वाले सोने का इस्तेमाल करें या उसे रीसायकल करें. उनका कहना है कि विदेश से नया सोना बाद में खरीदें, उससे पहले देश में मौजूद सोने का सही इस्तेमाल करें.
सोने की रीसाइक्लिंग क्या है?
सोने की रिसाइक्लिंग का मतलब बेकार पड़े सोने को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाने से है. इसमें पुराने गहने, टूटे हुए सिक्के, सोने की छड़ें, यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक सामान से निकाला गया सोना इकट्ठा किया जाता है. सबसे पहले सोने की प्योरिटी की जांच की जाती है, फिर उसे पिघलाकर साफ किया जाता है और उसे दोबारा प्योर सोने में बदला जाता है, जो आमतौर पर 99.9% तक शुद्ध हो सकता है. इसके बाद इस सोने का इस्तेमाल फिर से नए गहने, सिक्के बनाने में किया जाता है. मुथूट एक्जिम के सीईओ कीयूर शाह ने बताया कि इस प्रोसेस से ना सिर्फ सोने का दुबारा इस्तेमाल होता है, पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि नए सोने की खदानों से खनन करने की जरूरत कम हो जाती है, जिससे प्रदूषण के साथ ऊर्जा की खपत भी घटती है.
सरकार सोने की रीसाइक्लिंग के लिए क्यों कह रही है?
सोने की रीसाइक्लिंग का सीधा संबंध भारत के बढ़ते आयात बिल से है. साल 2025-26 में भारत ने अपनी सोने की मांग पूरी करने के लिए करीब 72.4 अरब डॉलर खर्च किए. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और हर आयात के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है. स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के संतोष मीना का कहना है कि अगर ठीक तरह से सोने की रीसाइक्लिंग की जाए तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है. आसान भाषा में बताएं तो जितना ज्यादा सोना हम रीसाइकल करेंगे, उतना ही कम सोना बाहर से मंगाना पड़ेगा. यही वजह है कि सरकार घरों में पड़े बेकार सोने को दुबारा इस्तेमाल में लाने के लिए कह रही है.
सोने की रीसाइक्लिंग से कितना होगा फायदा?
सोने की रीसाइक्लिंग के असर की बात करें तो संतोष मीना के अनुसार, अगर भारत के घरों और मंदिरों में जमा कुल सोने का सिर्फ 1% हिस्सा हर साल रीसाइकल किया जाए, तो सोने के आयात में करीब 25% से 30% तक की कमी लाई जा सकती है. इसका फायदा ज्वेलरी मार्केट के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा. एक चेन प्रोसेस में देश पर इसका असर देखने को मिलेगा. जैसे आयात बिल कम होने से विदेशों पर निर्भरता घटेगी, इसके जरिए चालू खाता बेहतर होगा और देश के अंदर सोने की रिफाइनिंग करने वाली इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलेगा.
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