पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी अब राज्य में न सिर्फ नेतृत्व चयन की प्रक्रिया में जुटी है, बल्कि केंद्र की प्रमुख योजनाओं को लागू करने की तैयारी भी तेज कर दी गई है. सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना को राज्य में पहली प्राथमिकता के रूप में लागू किया जाएगा. इसके साथ ही आठ साल बाद यह योजना वास्तविक अर्थों में राष्ट्रीय योजना का दर्जा हासिल कर लेगी.
केंद्र‑राज्य के बीच बातचीत शुरू
केंद्र सरकार से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना को पश्चिम बंगाल में लागू करने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है. संभावना है कि भाजपा सरकार के गठन के बाद होने वाली पहली कैबिनेट बैठक में ही इस योजना को मंजूरी दे दी जाएगी.
राष्ट्रीय कवरेज का आखिरी अधूरा अध्याय
सूत्रों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन को लेकर पूरा रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके. अब तक पश्चिम बंगाल इस योजना के बाहर था, लेकिन इसके लागू होते ही देश का कोई भी बड़ा राज्य आयुष्मान भारत से बाहर नहीं रहेगा, जिससे इसे पूरी तरह राष्ट्रीय स्वरूप मिल जाएगा.
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इन राज्यों में नहीं हो पाई थी लागू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को झारखंड के रांची से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM‑JAY) की शुरुआत की थी. हालांकि, इसके बावजूद यह योजना लंबे समय तक ओडिशा, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में लागू नहीं हो सकी.
इन राज्यों में अपनी‑अपनी स्वास्थ्य योजनाएं चलाई जा रही थीं-
- ओडिशा: गोपबंधु जन आरोग्य योजना (GJAY)
- दिल्ली: दिल्ली आरोग्य कोष (DAK)
- पश्चिम बंगाल: स्वास्थ्य साथी योजना
ओडिशा (2024) और दिल्ली (2025) में भाजपा सरकार बनने के बाद वहां आयुष्मान भारत लागू हो चुका है. अब पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है.
100 दिनों के एजेंडे में आयुष्मान
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने चुनाव से पहले वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद पहले 100 दिनों में प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को लागू किया जाएगा. इसमें आयुष्मान भारत योजना और राज्य कर्मचारियों के लिए 7वां वेतन आयोग शामिल हैं. यही वजह है कि नतीजे आने के तुरंत बाद ही इन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया.
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क्या है आयुष्मान भारत योजना
आयुष्मान भारत केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज. गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कवरेज. सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी.
यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना मानी जाती है. इसमें अस्पताल में भर्ती से पहले और बाद के खर्च, दवाइयां, आईसीयू सुविधा और 2,000 से अधिक बीमारियों का इलाज शामिल है. योजना की विशेषता यह है कि इसमें कोई प्रीमियम नहीं देना होता.
कैसे लागू होती है योजना
आयुष्मान भारत योजना केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से लागू की जाती है. इसके लिए राज्य स्तर पर एक समर्पित ट्रस्ट या सोसायटी बनाई जाती है. केंद्र और राज्य के बीच MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर होते हैं. योजना के संचालन और नियम तय किए जाते हैं. अब तक यह योजना 32 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है.
क्या बदलेगा बंगाल में
आयुष्मान भारत के लागू होने से पश्चिम बंगाल के लाखों गरीब और निम्न‑मध्यम वर्गीय परिवारों को देशभर में इलाज की समान सुविधा मिलेगी. साथ ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को केंद्रीय नेटवर्क से जोड़कर अस्पतालों और मरीजों दोनों को अधिक विकल्प मिलेंगे.
राजनीतिक जानकार इसे भाजपा सरकार के 100‑दिवसीय एजेंडे की सबसे बड़ी नीतिगत शुरुआत मान रहे हैं, जो बंगाल में शासन की दिशा बदलने का संकेत भी देती है.
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