- दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन सरकार द्वारा सुरक्षा कारणों के आधार पर वापस लेने का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा
- तहसीन पूनावाला का कहना है कि सरकार कम से कम जमीन वापसी के सुरक्षा कारणों की स्पष्ट जानकारी दे
- राजनीतिक विश्लेषक तुषार गुप्ता का मानना है कि मकान मालिक का अपने किरायदार को जमीन खाली करने का अधिकार कानूनी
Delhi Gymkhana Controversy: दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन को वापस लेने का मुद्दा पिछले 3 दिनों से मीडिया में छाया हुआ है. कुछ लोग जिमखाना क्लब की जमीन को वापस लेने के सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं, तो कुछ लोगों को लगता है कि इसमें कुछ गलत नहीं है. जिमखाना क्लब का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंच गया है. लेकिन जिमखाना क्लब के एसोसिएट मेंबर तहसीन पूनावाला का कहना है कि सरकार को साफ करना चाहिए कि किन सुरक्षा कारणों से जमीन वापस ली जा रही है. वहीं, पॉलिटिकल एनालिस्ट तुषार गुप्ता को लगता है कि अगर कोई मकान मालिक अपने किरायदार को जमीन खाली करने के लिए कहता है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. जिमखाना क्लब पर NDTV के शो में हुई डिबेट में इसके पक्ष और विपक्ष में क्या-क्या कहा गया, आइए आपको बताते हैं.
क्या सुरक्षा कारण हैं, सरकार बताए: तहसीन पूनावाला
तहसीन पूनावाला जिमखाना क्लब के एसोसिएट मेंबर हैं. उनका कहना है, "सरकार को ये साफ करना चाहिए कि आखिर इतने सालों बाद सुरक्षा को लेकर क्या चिंता सामने आई है कि परपेचुअल लीज को आप ऐसे ही खत्म नहीं कर सकते हैं. जमीन खाली करने से पहले सरकार को कम से कम जिमखाना क्लब से बैठकर बातचीत करनी चाहिए थी. फिर ये एक हैरिटेज क्लब है, इसका 113 साल का इसका इतिहास है. कई यादगार टेनिस मैच यहां खेले गए हैं. ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को हमें सहेज कर रखने की जरूरत है. ऐसे ही इसे बर्बाद नहीं कर सकत हैं. अगर कोई मिसमैनेजमेंट है, क्लब में तो उसे बताना चाहिए. पिछले साल क्लब प्रॉफिट में रहा है. अगर कोई मिसमैनेजमेंट भी है, तो उसके आधार पर आप क्लब को बंद करने के बारे में नहीं कह सकते हैं. हमारे देश में लोकतंत्र है, ये कोई चीन या नॉर्थ कोरिया नहीं है."
क्या जिमखाना क्लब की आड़ में किसी बड़े मुद्दे को छिपाया जा रहा: दिलीप चेरियन, फाउंडर परफेक्ट रिलेशंस
परफेक्ट रिलेशंस के फाउंडर दिलीप चेरियन को लगता है कि जिमखाना क्लब की आड़ में किसी बड़े मुद्दे को छिपाने की कोशिश की जा रही है. दिलीप चेरियन का कहना है, "आखिर क्यों जिमखाना क्लब के मुद्दे को उठाया जा रहा है? ऐसे मामले पहले भी देखने को मिले हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इस बार इस मुद्दे को जानबूझ कर डायवर्ट करने की कोशिश की जा रही है. पिछले तीन दिनों से मीडिया में इस मुद्दे को उठाया जा रहा है. दिल्ली एनसीआर से बाहर क्या इस मुद्दे से किसी को कोई मतलब है? मुझे लगता है बिल्कुल नहीं है. आज देश में इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. हमें ये देखना होगा कि आखिर, क्यों ये मुद्दा इतनी जोरशोर से उठाया जा रहा है, क्या सरकार कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है? क्या किसी बड़े मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए मेलोडी और जिमखाना क्लब जैसे मामले उठाए जा रहे हैं?"
आम लोगों की भलाई के लिए अगर जमीन वापस ली जा रही है, तो इसमें कुछ गलत नहीं: लेखक अद्वैत काला
लेखक अद्वैत काला को लगता है कि सरकार अगर आम लोगों की भलाई के लिए अपनी जमीन ले रही है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है. अद्वैत काला का कहना है, "ये जमीन सरकार की है और वो अब इसे वापस ले रही है. सार्वजनिक जमीन का इस्तेमाल अभी प्राइवेट तरीके से नहीं किया जा सकता है. इस क्लब के मेंबर्स की हैसियत क्या है, ये किसी से छिपा नहीं है. एक सार्वजनिक जमीन पर एक रसूकदार लोगों के लिए क्लब है, जहां आम आदमी जा भी नहीं सकता. अगर इस क्लब के पास परपेचुअल लीज है, तो भी मुझे लगता है कि अगर सरकार अपनी जमीन को वापस लेना चाहती है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. सरकार इस जमीन को पब्लिक के इस्तेमाल के लिए ही वापस ले रही है. मुझे लगता है कि आम लोगों की भलाई के लिए अगर जमीन वापस ली जा रही है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है."
ये भी पढ़ें:- दिल्ली जिमखाना क्लब केस: हम कानून के तहत चल रहे vs कमरे में एक बड़ा हाथी जैसा.. सिंघवी और तुषार मेहता ने क्या-क्या दी दलीलें
...तो झुग्गी वाले भी सरकारी जमीन वापस न करें: तुषार गुप्ता पॉलिटिकल एनालिस्ट
पॉलिटिकल एनालिस्ट तुषार गुप्ता को लगता है कि अगर कोई मकान मालिक अपने किरायदार को जमीन खाली करने के लिए कहता है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. तुषार गुप्ता का कहना है, "देखिए, कानून के आगे सेंटिमेंट्स की कोई अहमियत नहीं है. आप कह रहे हैं कि अमीर आदमी अपना क्लब नहीं देंगे, फिर तो गरीब लोगों को अपनी झुग्गियां और अवैध कब्जे वाली जमीन भी नहीं देनी चाहिए? रेलवे स्टेशनों के आसपास झुग्गियां बनाकर रह रहे लोगों को भी वहां से नहीं हटाया जाना चाहिए? मतलब अमीर आदमी परपेचुअल लीज के आधार पर क्लब रख सकते हैं, लेकिन झुग्गियों में रहने वाले लोगों को जमीन वापस कर देनी चाहिए, क्योंकि सरकार उसे वापस लेना चाहती है. तहसीन का कहना है कि ये हैरिटेज बिल्डिंग है, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है? जिमखाना क्लब को सरकार सुरक्षा कारणों से वापस ले रही है, तो अन्य वजह का कोई कानूनी महत्व नहीं रह जाता है. फिर ये मकान मालिक और किरायदार के बीच के रिश्ते पर आधारित है, जो 100 साल से लंबे समय से चला आ रहा है. जमीन के मालिक और किरायदार के बीच बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन अब मालिक अपनी जमीन वापस ले रहा है, तो इसमें दिक्कत क्या है? जिमखाना क्लब की मेंबरशिप के लिए 30-30 साल से लोग 30-30 लाख रुपये लेकर इंतजार करते थे. ऐसे में आप कैसे सरकार से मुआवजे की मांग कर सकते हैं? इसके साथ ही मेरा मानना है कि सरकार को सुरक्षा कारणों के बारे में जिमखाना क्लब को कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है."
ये भी पढ़ें:- दिल्ली जिमखाना क्लब पर मोदी सरकार के आलोचक भी कर रहे हैं तारीफ, सोशल मीडिया पर नामचीनों में छिड़ी बहस
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं