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एक मां की जंग-बेटे के लिए इंसाफ मांगने 500 KM दूर से आकर किया प्रदर्शन

बताया जा रहा है कि राकेश की मौत इसी साल 28 फरवरी को बोगीनदी के कोलापानी में हुई थी. अब परिवार का आरोप है कि राकेश की हत्या हुई थी.

एक मां की जंग-बेटे के लिए इंसाफ मांगने 500 KM दूर से आकर किया प्रदर्शन
एक मां की न्या की लड़ाई (सांकेतिक फोटो)
AI

असम के धीमाजी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विधवा मां अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए 500 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबा सफर तय करके गुवाहाटी पहुंची है. मंगलवार को इस महिला ने गुवाहाटी स्थित असम सचिवालय, यानी जनता भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया.

इस महिला का नाम जरीना बोरा है और वह गोगामुख के वेस्ट बालिगांव की रहने वाली हैं. जरीना पिछले काफी समय से अपने बेटे के लिए न्याय की मांग कर रही हैं. वह अपने बेटे राकेश बोरा की तस्वीर हाथ में लेकर जगह-जगह घूम रही हैं.

बताया जा रहा है कि राकेश की मौत इसी साल 28 फरवरी को बोगीनदी के कोलापानी में हुई थी. अब परिवार का आरोप है कि राकेश की हत्या हुई थी, लेकिन पुलिस इस एंगल से मामले की जांच नहीं कर रही है. पुलिस के मुताबिक, राकेश की मौत एक सड़क हादसे में हुई है.

अब राकेश की मां का कहना है कि बेटे की मौत के तुरंत बाद ही बोगीनदी थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई थी. इसके बाद जरीना अपने एक रिश्तेदार के साथ जिले के एसपी से भी मिली थीं. उन्हें उम्मीद थी कि बेटे की मौत के मामले में न्याय मिलेगा. लेकिन जरीना का आरोप है कि बार-बार अपील करने के बाद भी पुलिस की तरफ से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.

जरीना तो यहां तक दावा कर रही हैं कि राकेश के शरीर पर चोट के कई निशान थे. उनके मुताबिक, जिस स्कूटर से राकेश गया था, उस स्कूटर पर भी ज्यादा नुकसान के निशान दिखाई नहीं दिए. इसी वजह से परिवार को शक है कि राकेश की मौत किसी सड़क हादसे में नहीं हुई है.

वहीं, परिवार की तरफ से पुलिस की एफआईआर में कुछ नाम भी बताए गए हैं. इनमें पद्मेश्वर गोगोई, दीपु गोगोई, शरत सोनवाल और रुबुल तमुली शामिल हैं. परिवार का कहना है कि पुलिस ने इनमें से किसी के खिलाफ भी अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है.

जरीना के मुताबिक, राकेश सामान्य दिनों की तरह ही अपने घर से काम पर निकला था. उनका कहना है कि राकेश को उसकी कंपनी में पिछले कई महीनों से सैलरी भी नहीं मिल रही थी.

बड़ी बात यह है कि जरीना ने दो साल पहले ही अपने पति को भी खो दिया था. इसके बाद से वह अकेले ही अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. फिलहाल, जरीना मांग कर रही हैं कि असम के मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करें और उनके बेटे को न्याय दिलाएं. वैसे परिवार की तरफ से लगाए गए इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.

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