उत्तर प्रदेश की तेज-तर्रार महिला आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार गोंडा जिले की सिविल जज शबीना खान पर 30 साल पुराने केस को लेकर दबाव बनाने के आरोप और इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद उनका नाम सुर्खियों में है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब दुर्गा शक्ति अपने फैसलों और विवादों को लेकर चर्चा में आई हैं. उनका पूरा करियर ही सख्त फैसलों और सिस्टम से टकराने के लिए जाना जाता है. आइए जानते हैं दुर्गा शक्ति नागपाल कब IAS अफसर बनी, सिविल सर्विसेज एग्जाम में उनकी रैंक कितनी थी, पहली पोस्टिंग कहां मिली और कब-कब चर्चा में रहीं.
इंजीनियरिंग में पढ़ाई, पहले ही अटेम्प्ट में UPSC क्लियर
25 जून 1985 को आगरा में जन्मीं दुर्गा शक्ति नागपाल ने इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमेन से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया. उनके पिता सुभाष नागपाल दिल्ली छावनी बोर्ड में काम करते थे. पहली बार में उनका सेलेक्शन IRS (भारतीय राजस्व सेवा) के लिए हुआ. दूसरे अटेम्प्ट में उन्होंने अपनी मेहनत से ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल की और 2010 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं.
दुर्गा शक्ति नागपाल की पहली पोस्टिंग
आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के करियर की शुरुआत पंजाब कैडर के मोहाली से हुई, जहां उन्होंने आते ही बड़े जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया. यहीं से उनका नाम चर्चा में आ गया. इसके बाद में यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह से शादी के बाद उनका ट्रांसफर यूपी कैडर में हो गया. अब अभिषेक सिंह नौकरी छोड़कर एक्टिंग और मॉडलिंग में एक्टिव हैं.
IAS दुर्गा शक्ति नागपाल कब-कब चर्चा में रहीं
2013 का विवाद जिसने देश का सिस्टम हिला दिया था
दुर्गा शक्ति नागपाल सबसे पहले 2013 में तब देशभर में सुर्खियों में आईं, जब वे नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) में SDM थीं. उस समय यमुना और हिंडन नदी के किनारों पर बालू माफियाओं का राज चलता था. दुर्गा शक्ति ने अवैध रेत खनन पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी. इसी दौरान जेवर के कादलपुर गांव में एक निर्माणाधीन धार्मिक स्थल की दीवार हटाने को लेकर तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया. इस निलंबन ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया. जनता, आईएएस एसोसिएशन और केंद्र सरकार तक उनके सपोर्ट में उतर आई. चौतरफा दबाव के बाद यूपी सरकार को अक्टूबर 2013 में उनका निलंबन वापस लेना पड़ा था.
केंद्र सरकार को बदलने पड़े IAS-IPS के नियम
दुर्गा शक्ति के 2013 वाले निलंबन विवाद ने ये सवाल खड़ा किया कि क्या राज्य सरकारें किसी अफसर को मनमाने ढंग से सस्पेंड कर सकती हैं. इसके बाद केंद्र सरकार ने 2015 में पूरे नियम बदल दिए. नए नियम के अनुसार, राज्य सरकार को किसी भी आईएएस-आईपीएस को निलंबित करने के 48 घंटे के अंदर केंद्र को बताना अनिवार्य किया गया. निलंबन की शुरुआती समय 90 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी गई. इसके अलावा अगर 30 दिन के अंदर आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ, तो सस्पेंशन खुद-ब-खुद खत्म माना जाएगा.
अब क्यों विवादों में हैं दुर्गा शक्ति नागपाल
कानपुर देहात, बांदा और लखीमपुर खीरी में डीएम रहने के बाद दुर्गा शक्ति नागपाल देवीपाटन मंडल की कमिश्नर बनीं. हाल ही में गोंडा की सिविल जज शबीना खान ने जिला जज को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि कमिश्नर ने करीब 30 साल पुराने 'ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगरपालिका' केस को लेकर फोन पर अनुचित दबाव बनाया और संस्कारों पर सवाल उठाए. इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर असर डालने की कोशिश माना है.
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