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This Article is From Sep 06, 2025

Exclusive: चिपको आंदोलन जैसी मुहिम चलनी चाहिए... 4 राज्यों में बाढ़ पर जस्टिस संजय करोल

जस्टिस संजय करोल ने कहा कि विकास के नाम पर नेचर के काम में दखल दिया जा रहा है. कितना दखल देना है, ये सोचना पड़ेगा. ह्युमन लाइफ और संपत्ति का विनाश हुआ है और इको सिस्टम खत्म हो गया है.

Exclusive: चिपको आंदोलन जैसी मुहिम चलनी चाहिए... 4 राज्यों में बाढ़ पर जस्टिस संजय करोल
  • सुप्रीम कोर्ट के जज संजय करोल ने चार राज्यों में आई बाढ़ को अपनी जिंदगी का सबसे दुखद पल बताया.
  • जस्टिस संजय करोल ने अवैध लकड़ी कटाई की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया और इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की.
  • जस्टिस संजय करोल ने विकास के नाम पर प्रकृति के साथ किए जा रहे दखल को गंभीर समस्या बताया.
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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल ने NDTV इंडिया से बातचीत की. इसमें उन्होंने चार राज्यों में आई बाढ़ को लेकर अपनी चिंता साझा की. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप को भी सही माना. उन्होंने चिपको आंदोलन जैसी मुहिम चलाने पर भी बल दिया.

मेरी जिंदगी के सबसे दुखद पल

जस्टिस संजय करोल ने हिमाचल के रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि पेड़ों की अवैध कटाई की जांच होनी चाहिए. इतनी लकड़ियां मिलीं हैं तो जाहिर है अवैध कटाई हो रही है. कौन काट रहा है इन लकड़ियों को, किसके साथ काट रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए. चार राज्यों के बाढ़ के हालात मेरी जिंदगी के सबसे दुखद पल हैं. 1986 से मैंने कभी मीडिया से कभी बात नहीं. इतने फोन और मैसेज आएं हैं. लोग चाहते हैं कि सब मदद करें. 

प्रशासन कुछ कर नहीं पा रहा

जज संजय करोल ने आगे कहा कि पता नहीं उनकी कौन मदद करेगा. चीफ जस्टिस गवई को दखल देने के लिए, जस्टिस पादरीवाला को भी बधाई, जिन्होंने संज्ञान लिया. जो लोग गांव में हैं, उनको मालूम नहीं कहां जाएं. प्रशासन कुछ कर नहीं पा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद लोगों को भरोसा हुआ है.

नेचर के काम में दखल दिया जा रहा

जस्टिस संजय करोल ने कहा कि विकास के नाम पर नेचर के काम में दखल दिया जा रहा है. कितना दखल देना है, ये सोचना पड़ेगा. ह्युमन लाइफ और संपत्ति का विनाश हुआ है और इको सिस्टम खत्म हो गया है. हिमालय के साथ कितना इंटरफेयर करना चाहिए, ये सोचना होगा. जब एक पेड कटता है तो मैदानी इलाके में असर पड़ता है. चिपको आंदोलन जैसी मुहिम चलनी चाहिए. सड़कों के निर्माण की निगरानी के लिए कोई एजेंसी तक नहीं है.

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