देश में आवारा कुत्तों के आतंक और उनसे जुड़ी सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में घमासान जारी है. जहां एक तरफ आम जनता की सुरक्षा का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ इसे लागू करने का खर्च होश उड़ाने वाला है. कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगर भारत के सार्वजनिक स्थानों को डॉग-फ्री बनाना है, तो सरकार को 26,800 करोड़ रुपये की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.
91,000 नए शेल्टर की जरूरत
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट कृष्णन वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि, "कुत्तों को केवल सड़कों से हटाना समाधान नहीं है, उन्हें रखने के लिए बुनियादी ढांचा भी चाहिए. आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में लगभग 91,800 नए डॉग शेल्टर बनाने होंगे, जिससे अनुमानित खर्च 26,800 करोड़ रुपये का होगा. हर जिले में एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बनाने पर ही करीब ₹1,600 करोड़ खर्च होंगे."
'सिर्फ नसबंदी काफी नहीं, ट्रेनिंग भी जरूरी'
कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कृष्णन वेणुगोपाल ने यह भी दलील दी कि देश में फिलहाल केवल 66 मान्यता प्राप्त ABC सेंटर ही काम कर रहे हैं. कुत्तों को पकड़ने के लिए ट्रेंड स्टाफ की भारी कमी है. बिना ट्रेनिंग के कुत्तों को पकड़ने से उनकी जान को खतरा हो सकता है और वे और भी हिंसक हो सकते हैं. पूरे देश में 5.2 करोड़ कुत्ते हैं, आबादी कंट्रोल करने के लिए, हमें इसे कई गुना बढ़ाना होगा."
वहीं, पीआईबी की एक अप्रैल 2025 के एक बयान के मुताबिक 2024 में देश भर में कुत्तों के काटने के कुल 37 लाख 15 हजार 713 मामले दर्ज किए गए थे. इससे पहले 2023 में कुत्तों के काटने के 30 लाख 52 हजार 521 मामले देश भर में दर्ज किए गए थे. इस तरह एक साल में देश में कुत्ता काटने के मामलों में 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2022 में देश में कुत्तों के काटने के 21 लाख 89 हजार 909 मामले दर्ज किए गए थे.
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