- सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के खिलाफ 75 वर्षीय वकील की अपील प्राथमिकता से सुनने के निर्देश दिए
- याचिकाकर्ता मुर्शिदाबाद के 70 वर्ष से अधिक उम्र के वकील हैं और 1977 में बार काउंसिल में नामांकित हुए थे
- याचिकाकर्ता 50 से अधिक वर्षों से अपने मतदान अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं और पहले वैध वोटर थे
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ 75 साल के एक वकील की अपील पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश तब दिया जब उन्होंने पाया कि याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल का असल नागरिक और निवासी लगता है. यही अपीलेट ट्रिब्यूनल पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़ी आपत्तियों की सुनवाई करता है.
50 साल से तो वकील हैं
आज वकील शकील शेख ने बताया कि याचिकाकर्ता की अपील 27 मार्च, 2026 से लंबित है और उस पर अभी तक कोई विचार नहीं किया गया है. शेख ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता 50 से ज्यादा सालों से अपने जिला कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं और पांच दशकों से ज्यादा समय से अपने वोटिंग अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता 2002 से पहले भी एक वैध वोटर थे और किसी भी अथॉरिटी ने कभी भी वोटर के तौर पर उनकी स्थिति पर सवाल नहीं उठाया.
याचिकाकर्ता मुर्शिदाबाद के 70 साल से ज्यादा उम्र के वकील हैं और 1977 में पश्चिम बंगाल बार काउंसिल में एनरोल हुए थे. उन्होंने दावा किया है कि रिविजन प्रोसेस के दौरान दस्तावेज जमा करने और 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट, 1950' के तहत अपील दायर करने के बावजूद, उनकी अपील पर सुनवाई नहीं हुई है, जिससे उन्हें मिलने वाला कानूनी उपाय बेअसर हो गया है. यह मामला पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले हुए SIR (स्पेशल समरी रिविजन) से जुड़े बड़े कानूनी विवाद का हिस्सा है.
34 लाख से ज्यादा अपील
इस प्रक्रिया के कारण वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटा दिए गए और सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर बड़े पैमाने पर कानूनी मामले चले. वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ चुनौतियों पर फैसला करने के लिए, कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए, जिनमें हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और रिटायर हो चुके हाई कोर्ट जज शामिल थे. अप्रैल 2026 तक, ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की जा चुकी थीं.
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