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This Article is From Mar 11, 2021

ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन पर हुुई चर्चा पर शशि थरूर बोले- 'सरकार का दोष नहीं है, लेकिन...'

शशि थरूर ने कहा कि 'जिस तरह भारत में हम फिलीस्तीन-इजरायल के मुद्दे पर चर्चा करते रहे हैं या करते हैं, या फिर हम अगर किसी भी दूसरे देश के किसी घरेलू मुद्दे पर चर्चा करना चाहें तो कर सकते हैं, उसी तरह ब्रिटिश संसद के पास भी वही अधिकार है.'

ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन पर हुुई चर्चा पर शशि थरूर बोले- 'सरकार का दोष नहीं है, लेकिन...'
ब्रिटिश उच्चायुक्त को भारत सरकार ने समन भेजा, तो शशि थरूर ने दी प्रतिक्रिया. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन पर 'अनुचित चर्चा' किए जाने को लेकर भारत सरकार ने मंगलवार को भारत में यूनाइटेड किंगडम के उच्चायुक्त को समन भेजा था. इसपर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि किसी भी लोकतंत्र में कोई किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए स्वतंत्र है.

UPA के कार्यकाल में विदेश मंत्री रह चुके शशि थरूर ने कहा कि 'जिस तरह भारत में हम फिलीस्तीन-इजरायल के मुद्दे पर चर्चा करते रहे हैं या करते हैं, या फिर हम अगर किसी भी दूसरे देश के किसी घरेलू मुद्दे पर चर्चा करना चाहें तो कर सकते हैं, उसी तरह ब्रिटिश संसद के पास भी वही अधिकार है.'

उन्होंने कहा कि 'इसमें सरकार का दोष नहीं है. वो अपना दृष्टिकोण रखकर अपना काम कर रही है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि एक दूसरा दृष्टिकोण भी होता है और लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधि अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र होते हैं.' थरूर ने आगे कहा, 'मुझे नहीं लगता है कि इसमें कोई हैरानी की बात है. हमें इसे लोकतांत्रिक देशों के बीच में होती रहने वाली चीजों के तौर पर देखना चाहिए.'

यह भी पढ़ें : ब्रिटिश संसद में कृषि कानून पर चर्चा को लेकर भारत ने ब्रिटिश उच्‍चायुक्‍त के समक्ष जताई कड़ी आपत्ति : सरकार

बता दें कि भारत सरकार ने ब्रिटिश संसद में नए कृषि कानूनों पर चर्चा होने के बाद ब्रिटिश उच्चायुक्त को बुलावा भेजा था. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इसपर कड़ी प्रतिक्रिया भी जताई थी और कहा था कि 'सरकार ने ब्रिटिश संसद में भारत के कृषि सुधार कानूनों पर अनुचित और विवादास्पद चर्चा किए जाने पर अपना सख्त विरोध जताया है.'

विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने एक बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि यह बहस एक दूसरे लोकतांत्रिक देश की राजनीति में गंभीर हस्तक्षेप है. उन्होंने ब्रिटिश सांसदों को यह सलाह भी दी कि वो दूसरे लोकतंत्र में हो रही घटनाओं को गलत तरीके से पेश कर वोटबैंक की राजनीति न करें.

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