
नई दिल्ली:
सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने और उनके खिलाफ आरोपों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतें स्थापित करने की टीम अन्ना की मांगों को खारिज कर दिया।
सरकार ने कहा कि ऐसे मुद्दों से निबटने के लिए मौजूदा व्यवस्था सक्षम है।
अन्ना हजारे द्वारा पिछले महीने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र का जवाब देते हुए पीएमओ ने कहा कि कार्यकर्ता ने कोयला ब्लॉक आवंटन में मनमोहन सिंह के खिलाफ (भ्रष्टाचार के) आरोपों के बारे में कोई सबूत नहीं पेश किए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने हजारे को भेजे पत्र में कहा, "आपने आरोपों के संबंध में कोई सबूत नहीं पेश किए हैं। इसके बदले आपने कहा कि यह आरोप आप नहीं लगा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि संभवत: कैग की एक रिपोर्ट के लीक हुए मसौदे ओर मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) और सुझाए गए जांच के विषय पर विचार किया है। उन्होंने कहा, "आपके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक ढांचे को देखते हुए आपकी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
हजारे और उनके करीबी सहयोगियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए तीन अवकाशप्राप्त न्यायाधीशों के विशेष जांच दल गठित करने की मांग की थी। अपने पत्र में उन्होंने 15 भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की मांग की थी।
पीएमओ ने कहा कि यूपीए सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। पीएमओ ने कहा कि सीबीआई और उसके कामकाज के बारे में हजारे की धारणा गलत है।
नारायणसामी ने कहा, कैग की रिपोर्ट (कोयला ब्लॉक आवंटन पर) संसद में पेश नहीं की गई है। जब रिपोर्ट पेश की जाएगी तो सरकार संसदीय प्रक्रिया के तहत लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक सांसद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सीवीसी ने पहले ही सीबीआई को प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं।
पीएमओ ने हजारे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और कैग ने कई मौकों पर गलतियों के लिए मंत्रियों पर आरोप लगाए हैं। नारायणसामी ने अपने जवाब में कहा, यह न सिर्फ अस्पष्ट बल्कि अस्वीकार्य भी है।
सरकार ने कहा कि ऐसे मुद्दों से निबटने के लिए मौजूदा व्यवस्था सक्षम है।
अन्ना हजारे द्वारा पिछले महीने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र का जवाब देते हुए पीएमओ ने कहा कि कार्यकर्ता ने कोयला ब्लॉक आवंटन में मनमोहन सिंह के खिलाफ (भ्रष्टाचार के) आरोपों के बारे में कोई सबूत नहीं पेश किए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने हजारे को भेजे पत्र में कहा, "आपने आरोपों के संबंध में कोई सबूत नहीं पेश किए हैं। इसके बदले आपने कहा कि यह आरोप आप नहीं लगा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि संभवत: कैग की एक रिपोर्ट के लीक हुए मसौदे ओर मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) और सुझाए गए जांच के विषय पर विचार किया है। उन्होंने कहा, "आपके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक ढांचे को देखते हुए आपकी मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
हजारे और उनके करीबी सहयोगियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए तीन अवकाशप्राप्त न्यायाधीशों के विशेष जांच दल गठित करने की मांग की थी। अपने पत्र में उन्होंने 15 भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की मांग की थी।
पीएमओ ने कहा कि यूपीए सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। पीएमओ ने कहा कि सीबीआई और उसके कामकाज के बारे में हजारे की धारणा गलत है।
नारायणसामी ने कहा, कैग की रिपोर्ट (कोयला ब्लॉक आवंटन पर) संसद में पेश नहीं की गई है। जब रिपोर्ट पेश की जाएगी तो सरकार संसदीय प्रक्रिया के तहत लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक सांसद द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सीवीसी ने पहले ही सीबीआई को प्राथमिक जांच के आदेश दिए हैं।
पीएमओ ने हजारे की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और कैग ने कई मौकों पर गलतियों के लिए मंत्रियों पर आरोप लगाए हैं। नारायणसामी ने अपने जवाब में कहा, यह न सिर्फ अस्पष्ट बल्कि अस्वीकार्य भी है।
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