दिव्यांगों के वैक्सीनेशन को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया

कोर्ट ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को तीन सप्ताह के भीतर प्रस्ताव पर बैठक करने, स्वास्थ्य मंत्रालय को इन प्रस्तावों और मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करने पर विचार करने का निर्दश दिया

दिव्यांगों के वैक्सीनेशन को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट.

नई दिल्ली:

दिव्यांगों के लिए वैक्सीनेशन की बेहतर पहुंच की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित करने और व्यवस्था में सुधार करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि ये विशेषज्ञ हेल्पलाइन और को-विन ऐप तक पहुंच जैसे मुद्दों की जांच करेंगे. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तीन सप्ताह के भीतर प्रस्ताव पर बैठक करे. स्वास्थ्य मंत्रालय इन प्रस्तावों पर विचार करेगा और मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करने पर विचार करेगा. चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई होगी.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और संजीव खन्ना की बेंच ने मामले की सुनवाई की. याचिकाकर्ता के वकील मनोज सिन्हा ने अदालत को बताया कि दिव्यांगों के लिए हेल्पलाइन नंबर कुशलता से काम नहीं कर रहा और CoWin पंजीकरण आसानी से उपलब्ध नहीं है.  

केंद्र की ओर से ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हेल्पलाइन अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा संचालित की जा रही है और CoWin जहां तक ​​संभव है, सुलभ है. 

इससे पहले केंद्र ने कहा था कि बिस्तर पर पड़े लोगों और अत्यधिक दिव्यांगता का सामना करने वालों के लिए घर पर कोविड -19 वैक्सीन की सुविधा के लिए मोबाइल टीकाकरण दल रखने के लिए तैयार है. इसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर जिले में ऐसे लोगों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है 

इससे पहले वैक्सीनेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि COVID-19 वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं है और ना ही किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध वैक्सीनेशन के लिए मजबूर किया जा सकता है. वैक्सीनेशन कोई जनादेश नहीं है. सरकार ने कोई भी SOP जारी नहीं किया जो किसी भी उद्देश्य से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को अनिवार्य बनाता हो. केंद्र की गाइडलाइन संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना किसी भी जबरन वैक्सीनेशन की परिकल्पना नहीं करते.

केंद्र ने कहा है कि कोविड -19 वैक्सीनेशन व्यापक जनहित में है और विभिन्न प्रिंट और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से विधिवत सलाह, विज्ञापन और संचार किया गया है कि  सभी नागरिकों को वैक्सीनेशन करवाना चाहिए. किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरूद्ध वैक्सीनेशन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार ने कोई भी SOP जारी नहीं की है जो किसी भी उद्देश्य के लिए वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र को अनिवार्य बनाता है. 

20 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. सु्प्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर केंद्र को जवाब दाखिल करने को कहा था. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि इस मामले में सॉलिसिटर जनरल अदालत की सहायता करें. केंद्र सरकार बताए कि इस महत्वपूर्ण मामले में क्या क्या कदम उठाए जा रहे हैं.

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दरअसल सुप्रीम कोर्ट में इवारा फाउंडेशन ने याचिका दाखिल कर दिव्यांग लोगों को घर- घर जाकर वैक्सीन लगाने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि ये लोग केंद्रों पर जाकर वैक्सीन नहीं लगवा सकते. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो उनके घर- घर जाकर टीकाकरण करे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्यों को नोटिस जारी करने से इनकार किया था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि फिर तो मामले में दो हफ्ते छोड़ो, दो महीने तक जवाब का इंतजार करना होगा.