
नीतीश कुमार दिल्ली में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के कार्यक्रम में व्याख्यान देेते हुए
नई दिल्ली:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी के इस दावे को खारिज कर दिया कि पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के पक्ष में लहर चल रही है।
नीतीश ने एक तरह से मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, कुछ लोगों ने पंखा चला दिया है और आप सोचते हैं कि यह प्राकृतिक हवा है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के दंगों को गुजरात और भागलपुर के अतीत में हुए दंगों की तरह देश पर 'धब्बा' करार देते हुए कहा कि हालात को इस हद तक नहीं बिगड़ने देना चाहिए था।
जेडीयू नेता ने अपने राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक तत्काल मौके पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और धार्मिक तनाव की संभावना वाली किसी घटना को सुलझाते हैं। नीतीश ने कहा, मैंने शुक्रवार को दोपहर के भोजन पर यूरोपीय संघ के राजदूत से मुलाकात की। किसी ने मुझसे पूछा कि मैं क्या करता (सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में)... मैंने कहा कि हर समय निगरानी का कोई विकल्प नहीं है। आपको सभी का विश्वास जीतना होगा।
वह 'आइडिया ऑफ इंडिया' पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) का छठा वार्षिक व्याख्यान दे रहे थे। एनसीएम के वार्षिक दिवस पर संबोधित करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री हैं। नीतीश ने मुस्लिमों और अन्य वंचित समुदायों की मदद के लिए विशेष नीतियों की वकालत भी की। उन्होंने 1989 में भागलपुर में हुए दंगों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 2005 में सत्ता में आने के बाद मामलों को फिर से खोला था और सुनिश्चित किया कि दोषियों को दंडित किया जाए और पीड़ितों को मुआवजा मिले।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रहमान खान ने कहा कि 'आइडिया ऑफ इंडिया' पर व्याख्यान देने के लिए नीतीश कुमार से बेहतर कोई नहीं हो सकता। बीजेपी की पूर्व सहयोगी रही जेडीयू के नेता नीतीश को कांग्रेस के करीब आता हुआ देखा जा रहा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगे इस बात का उदाहरण हैं कि अलग-अलग समुदायों की एकता पर हमले करने पर क्या हो सकता है।
नीतीश ने एक तरह से मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, कुछ लोगों ने पंखा चला दिया है और आप सोचते हैं कि यह प्राकृतिक हवा है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के दंगों को गुजरात और भागलपुर के अतीत में हुए दंगों की तरह देश पर 'धब्बा' करार देते हुए कहा कि हालात को इस हद तक नहीं बिगड़ने देना चाहिए था।
जेडीयू नेता ने अपने राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक तत्काल मौके पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और धार्मिक तनाव की संभावना वाली किसी घटना को सुलझाते हैं। नीतीश ने कहा, मैंने शुक्रवार को दोपहर के भोजन पर यूरोपीय संघ के राजदूत से मुलाकात की। किसी ने मुझसे पूछा कि मैं क्या करता (सांप्रदायिक तनाव की स्थिति में)... मैंने कहा कि हर समय निगरानी का कोई विकल्प नहीं है। आपको सभी का विश्वास जीतना होगा।
वह 'आइडिया ऑफ इंडिया' पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) का छठा वार्षिक व्याख्यान दे रहे थे। एनसीएम के वार्षिक दिवस पर संबोधित करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री हैं। नीतीश ने मुस्लिमों और अन्य वंचित समुदायों की मदद के लिए विशेष नीतियों की वकालत भी की। उन्होंने 1989 में भागलपुर में हुए दंगों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 2005 में सत्ता में आने के बाद मामलों को फिर से खोला था और सुनिश्चित किया कि दोषियों को दंडित किया जाए और पीड़ितों को मुआवजा मिले।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रहमान खान ने कहा कि 'आइडिया ऑफ इंडिया' पर व्याख्यान देने के लिए नीतीश कुमार से बेहतर कोई नहीं हो सकता। बीजेपी की पूर्व सहयोगी रही जेडीयू के नेता नीतीश को कांग्रेस के करीब आता हुआ देखा जा रहा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगे इस बात का उदाहरण हैं कि अलग-अलग समुदायों की एकता पर हमले करने पर क्या हो सकता है।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं