
भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में ओपिनियन पोल के पक्ष में अपनी राय रखी है।
अपने ब्लॉग में नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ओपिनियन पोल पर रोक बोलने की आजादी पर रोक के समान होगी। मोदी ने अपने ब्लॉग में कांग्रेस पार्टी पर आरोपप लगाया है कि कांग्रेस जनतंत्र विरोधी हो गई है।
कांग्रेस ने जहां ओपिनियन पोल को ‘गोरखधंधा’, ‘तमाशा’ और ‘मनगढंत’ करार देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की जोरदार वकालत की है, वहीं भाजपा ने कहा है कि ऐसा करना न तो संवैधानिक रूप से स्वीकृति योग्य है, न ही वांछनीय है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
कांग्रेस ने भाजपा की इस आलोचना को भी खारिज कर दिया कि वह इसलिए इसका विरोध कर रही है क्योंकि वह नरेंद्र मोदी से डरी हुई है क्योंकि इन सर्वेक्षणों में विपक्षी दल को बढ़त मिलने का अनुमान लगाया गया है।
चुनाव सर्वेक्षणों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कांग्रेस नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी ऐसे समय आयी है जब कुछ दिन पहले ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव के दौरान ऐसे सर्वेक्षणों के प्रकाशन एवं प्रसार पर रोक लगाने की मांग की है और कहा है कि इस तरह के सर्वेक्षण ‘त्रुटिपूर्ण’, ‘गैर-भरोसेमंद’ तथा ‘मनगढ़ंत’ होते हैं।
पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘यह तो मजाक बन गया है। उसपर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना चाहिए। जिस तरह की शिकायतें एवं सूचनायें मिली है, उससे पता चलता है कि कोई भी पैसे देकर अपनी इच्छानुसार सर्वेक्षण करा सकता है। 1.2 अरब लोगों वाले देश में कैसे कुछ हजार लोग रुझान का अनुमान लगा सकते हैं। यह गोरखधंधा बन गया है। कई ऐसे समूह सामने आए हैं।’
केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने अलग से कहा कि ओपिनियन पोल कई बार मनगढ़ंत होते हैं इसलिए, पार्टी ने उसका विरोध कर अच्छा ही किया है। उन्होंने कहा, ‘यदि असली ओपिनियन पोल हों तो किसी को दिक्कत नहीं है, लेकिन अब हमें जिस तरह की खबरें मिल रही है, उससे पता चलता है कि वे मनगढ़ंत होते हैं। सभी लोग ओपिनियन पोल लेकर सामने आ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘निश्चित ही, जब मीडिया पब्लिसिटी करने लगता है, लोग उससे प्रभावित होते हैं। अतएव, यह पार्टी की सही मांग रही है। पोल से पहले तटस्थ दिमाग होना चाहिए।’ सिंह ने यह दलील खारिज कर दी कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रूख बदल लिया है।
उन्होंने कहा, ‘आज से नहीं, हम पहले दिन से ही इसके खिलाफ रहे हैं।’ उधर कांग्रेस की रायशुमारी पर प्रतिबंध संबंधी मांग का विरोध करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा कि भारत में चुनाव विश्लेषण अभी परिपक्वता हासिल ही कर रहा है तथा हो सकता है कि कुछ ओपिनयन पोल गलत हो जाएं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए।
जेटली ने भाजपा की ओर से जारी एक आलेख में कहा, ‘ओपिनियन पोल हो रहे हैं। कुछ ने विश्वसनीयता हासिल कर ली है जबकि कुछ को आसानी से नजरअंदाज किया जा सकता है। इन पोल की विश्वसनीयता हो या नहीं, क्या इन्हें प्रतिबंधित किया जा सकता है।’
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल तब इन ओपिनियन पोल को खारिज करने की मांग करते हैं जब वे उनके प्रतिकूल होते हैं। सामान्यत: नुकसान में रहने वाला प्रतिबंध की मांग करता है जबकि फायदे में रहने वाला उसे जारी रखने में पक्ष में होता है।
जेटली ने कहा, ‘ऐसे पोल पर प्रतिबंध पर इस आधार पर नहीं विचार किया जा सकता है कि कौन ऐसी मांग उठा रहा है। स्पष्ट तौर पर (ओपिनियन) पोल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अंग है। उनपर प्रतिबंध लगाना न तो संवैधानिक रूप से इजाजत योग्य है न ही वांछनीय।’
हाल के कई ओपिनियन पोल में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी से आगे बताया गया है, राहुल गांधी को कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा चुनावों पर ओपिनियन पोल के अनुसार भाजपा मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में आसानी से जीतने जा रही है।
भाजपा नेता ने कहा, ‘यदि इस देश में वैध तरीके से ओपिनियन पोल पर रोक लगा दी जाए तो अगला कदम राजनीतिक टिप्पणीकारों के विश्लेषण करने पर रोक लगाना होगा जो कुछ के पक्ष में जबकि कुछ के विरोध में होता है।’
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