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जॉयघाट:
एक जोड़े की लगभग 15 साल पुरानी शादी को एक शौचालय ने बचा लिया और फिल्मों की तरह उनकी समस्या का भी 'हैप्पी एंडिंग' हुआ। रिंकू और जयगोविंद मंडल की शादी साल 2001 में हुई। उनकी शादी को बचाने की नौबत इसलिए आई क्योंकि 30 साल की रिंकू को रोज निवृत्त होने घर से बाहर जाना पड़ता था।
दो साल पहले तक सब सामान्य था और निवृत्त होने के नियम से उनके रिश्ते में कोई आंच नहीं थी, लेकिन जब जयगोविंद ने रिंकू पर शक करना शुरू कर दिया तो उनके रिश्ते में चिड़चिड़ापन, संदेह और अविश्वास बढ़ने लगा।
एक साक्षात्कार में रिंकू ने बताया, 'उन्होंने मुझसे अजीब से प्रश्न पूछने शुरू कर दिए, मसलन मैं लौटने में इतना वक्त क्यों लगाती हूं, मैं दिन में दो बार क्यों जाती हूं वगैरह। इससे धीरे-धीरे पूरे घर का माहौल चिड़चिड़ा रहने लगा। उन्हें लगता था कि मेरा बाहर किसी और के साथ संबंध है।' नादिया जिले के मजीदिया गांव में उनका घर भी उन घरों में से एक है जिनमें शौचालय नहीं हैं।
जयगोविंद एक दिहाड़ी मजदूर है। उनके इन छोटे-छोटे झगड़ों से उनका शादी का रिश्ता मुश्किल में पड़ने लगा। शराब के नशे में जयगोविंद अक्सर हिंसक होने लगा।
रिंकू ने बताया, 'जब वो मुझे मारता था तो मैं उसे बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। एक दिन मैं भागकर अपनी मां के घर चली गई और वहीं रहने लगी।' जल्द ही यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में पहुंचा।
वकील ककली चटर्जी ने बताया कि रिंकू ने पिछले साल भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत कथित घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था।
हालांकि अपनी शादी पर आए इस संकट को दूर करने का हल खोजते हुए उन दोनों को पहले ही अहसास हो गया था कि उनकी इस समस्या का हल एक 'शौचालय' है। जिसकी दीवारों को अपने घर में खड़ा करके वे अपने रिश्ते के बीच खड़ी दीवार को गिरा सकते हैं।
खुले में शौच की पुरानी प्रथा उनकी जिंदगी में एक 'खलनायक' साबित हो चुकी थी। इसी बीच नदिया जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई 'सबार शौचघर' (सबके लिए शौचालय) योजना का लाभ उन्हें हुआ और अब उन दोनों के घर में मुफ्त में शौचालय बन चुका है।
रिंकू अब एक भीनी सी मुस्कुराहट के साथ बताती हैं कि खुले में शौच करने जाना बंद करने के बाद से उनकी पारिवारिक समस्याओं का भी अंत हो गया है। लगभग एक साल हो गया है और अब वह एक सुखी जीवन जी रहे हैं।
इस योजना के तहत लाखों शौचालय बनाने के बाद नदिया जिले को खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है।
नदिया के जिलाधिकारी पी.बी. सलीम का कहना है कि बीमारियों का फैलना रोकने के साथ-साथ, खुले में शौच की प्रथा के उन्मूलन से महिलाओं को आसानी हुई है। उन्हें अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और निजी स्थान मिलता है निवृत्त होने के लिए।
उन्होंने बताया कि नदिया जिले के लगभग 99.8 प्रतिशत लोग शौचालय का प्रयोग करते हैं।
दो साल पहले तक सब सामान्य था और निवृत्त होने के नियम से उनके रिश्ते में कोई आंच नहीं थी, लेकिन जब जयगोविंद ने रिंकू पर शक करना शुरू कर दिया तो उनके रिश्ते में चिड़चिड़ापन, संदेह और अविश्वास बढ़ने लगा।
एक साक्षात्कार में रिंकू ने बताया, 'उन्होंने मुझसे अजीब से प्रश्न पूछने शुरू कर दिए, मसलन मैं लौटने में इतना वक्त क्यों लगाती हूं, मैं दिन में दो बार क्यों जाती हूं वगैरह। इससे धीरे-धीरे पूरे घर का माहौल चिड़चिड़ा रहने लगा। उन्हें लगता था कि मेरा बाहर किसी और के साथ संबंध है।' नादिया जिले के मजीदिया गांव में उनका घर भी उन घरों में से एक है जिनमें शौचालय नहीं हैं।
जयगोविंद एक दिहाड़ी मजदूर है। उनके इन छोटे-छोटे झगड़ों से उनका शादी का रिश्ता मुश्किल में पड़ने लगा। शराब के नशे में जयगोविंद अक्सर हिंसक होने लगा।
रिंकू ने बताया, 'जब वो मुझे मारता था तो मैं उसे बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। एक दिन मैं भागकर अपनी मां के घर चली गई और वहीं रहने लगी।' जल्द ही यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में पहुंचा।
वकील ककली चटर्जी ने बताया कि रिंकू ने पिछले साल भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत कथित घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था।
हालांकि अपनी शादी पर आए इस संकट को दूर करने का हल खोजते हुए उन दोनों को पहले ही अहसास हो गया था कि उनकी इस समस्या का हल एक 'शौचालय' है। जिसकी दीवारों को अपने घर में खड़ा करके वे अपने रिश्ते के बीच खड़ी दीवार को गिरा सकते हैं।
खुले में शौच की पुरानी प्रथा उनकी जिंदगी में एक 'खलनायक' साबित हो चुकी थी। इसी बीच नदिया जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई 'सबार शौचघर' (सबके लिए शौचालय) योजना का लाभ उन्हें हुआ और अब उन दोनों के घर में मुफ्त में शौचालय बन चुका है।
रिंकू अब एक भीनी सी मुस्कुराहट के साथ बताती हैं कि खुले में शौच करने जाना बंद करने के बाद से उनकी पारिवारिक समस्याओं का भी अंत हो गया है। लगभग एक साल हो गया है और अब वह एक सुखी जीवन जी रहे हैं।
इस योजना के तहत लाखों शौचालय बनाने के बाद नदिया जिले को खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है।
नदिया के जिलाधिकारी पी.बी. सलीम का कहना है कि बीमारियों का फैलना रोकने के साथ-साथ, खुले में शौच की प्रथा के उन्मूलन से महिलाओं को आसानी हुई है। उन्हें अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और निजी स्थान मिलता है निवृत्त होने के लिए।
उन्होंने बताया कि नदिया जिले के लगभग 99.8 प्रतिशत लोग शौचालय का प्रयोग करते हैं।