
देशभर में कई छात्र चाहते हैं कि कोरोना काल में उन्हें जनरल प्रमोशन मिले लेकिन मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के छात्र ऐसा नहीं चाहते. अधूरी पढ़ाई पूरी करने की मांग को लेकर वे 11 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. यह बात प्रबंधन को बुरी लग गई. सो उन्होंने सत्र 2019-20 के 8 डिप्लोमा छात्रों को निष्कासित कर दिया है. इन सभी पर नाट्य विद्यालय की आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप है. छात्रों का कहना है कि ये उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने,कुचलने के लिए किया गया है, वहीं विद्यालय का कहना है ये कार्रवाई नियमों के मुताबिक की गई है. मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के छात्रों की मांग थी कि 12 महीने के कोर्स में 8 महीने का ही कोर्स पूरा हुआ है. विषय परफॉर्मिंग आर्ट्स का है इसलिए वो नहीं चाहते कि उन्हें जनरल प्रमोशन मिले. नाट्य विद्यालय ने मांग नहीं मानी तो वो अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन अब इन्हें निकाल दिया गया है.
रंगकर्म सृजन के साथ अन्याय के खिलाफ विरोध की भी विधा है लेकिन मप्र नाट्य विद्यालय के 8 छात्रों ने सिर्फ पढ़ाई के लिये आवाज़ उठाई तो उन्हें निकाल दिया गया सब चुप हैं! @ChouhanShivraj @ndtvindia @BajpayeeManoj @AshGowariker @ranaashutosh10 @sushant_says @nsd_india @SrBachchan pic.twitter.com/LBX1gpDn8q
— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) August 20, 2020
राजेश कुमार को विद्यालय से निकाला गया है उन्हें कहा गया कि उन्होंने अनुशासन तोड़ा. लेकिन राजेश कहते हैं कि हम विरोध नहीं, अनुरोध प्रदर्शन कर रहे थे कि 4 महीने बचे हैं हमारा कोर्स हमें पूरा करने दिया जाए. प्रियम जैन 5 साल से थियेटर कर रहे हैं अचरज है कि रंगकर्मी को थियेटर पढ़ने से रोका जाए, स्कूल से निकाल दिया जाए. उन्हें ये भी कहा गया है कि उनका व्यवहार अच्छा नहीं रहा. राहुल सिंह कुशवाहा को भी निकाल दिया गया मांग इतनी की जो सत्र बचा है वो दे दिया जाए, हमारी प्रैक्टिल विधा है हम सीखेंगे नहीं तो क्या करेंगे.
एमपीएसडी के पूर्व छात्र भी इन छात्रों का समर्थन कर रहे हैं, गगन ने एमपीएसडी के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से पढ़ाई की. वो कहते हैं एनएसडी के छात्र भी इन छात्रों का समर्थन कर रहे हैं, एफटीआईआई के छात्र भी समर्थन कर रहे हैं. थ्योरी 3-4 महीने की होती है, ऐसे में प्रैक्टिल जरूरी है. हम सब एक गुजारिश कर रहे हैं 4 महीने दिये जाएं ताकि सार्थक तरीके से कोर्स पूरा हो. इनके साथी अभिजीत सोलंकी कहते हैं ये व्यवहार चौंकाने वाला और दुखी करने वाला है. रंगकर्मियों के साथ असुरक्षा का माहौल है, एनएसडी यूनियन ने विरोध दर्ज किया छात्रसंघ के लोग खड़े हों हमारे साथ.
नाट्य विद्यालय के निदेशक आलोक चटर्जी बातचीत के लिये मौजूद नहीं थे, उनसे फोन पर भी संपर्क नहीं हुआ. एक साल के कोर्स में छात्रों को चार प्रोडक्शन और 6 सीन वर्क कराए जाते हैं,अभी तक इसमें दो प्रोडक्शन और तीन सीन वर्क हुी हुए हैं। बच्चों की मांग थी कोर्स की अवधि को चार महीने के लिए बढ़ाया जाए, सरकार कह रही है छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहेगी, वहीं कांग्रेस का आरोप है सरकार को फिक्र नहीं. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा विद्यार्थी कहीं के भी हों, नाट्य विद्यालय के हों उनके साथ इस कोरोना काल में संवेदना से व्यवहार होना चाहिए लेकिन छात्रों को भी मर्यादा और नियमों का पालन करना होगा. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है दोनों पक्षों को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिये, सख्ती से नहीं संवदेना से.' वहीं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा छात्रों को मांग करना उनका मौलिक अधिकार है, इस तरह की हठधर्मिता कोई संस्थान करे ये ठीक नहीं है ये फासिस्ट सोच एक तरह से कला पर कुठाराघात है इस पर पुनर्विचार होना चाहिये.
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