रांची:
झारखंड में कायम राजनीतिक संकट का फिलहाल कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। राज्यपाल ने प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है।
इससे पहले, शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के विधायकों ने अलग−अलग जाकर राज्यपाल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक अब तक कोई भी दल बहुमत का इंतजाम नहीं कर पाया है। हालांकि जेएमएम ने वहां कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा जरूर पेश किया है। झारखंड में जेएमएम और बीजेपी के 18−18 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 13 और बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के पास 11 सीटें है।
बीते दिनों झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अब वह खुद को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बता रही है। जेएमएम के मुताबिक बीजेपी ने 28 महीने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री बदलने का वादा तोड़ दिया और इसी वजह से उन्होंने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इधर, बीजेपी कह रही है कि जेएमएम से उनकी 28−28 महीने के मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर कोई बात नहीं हुई थी।
इससे पहले, शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के विधायकों ने अलग−अलग जाकर राज्यपाल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक अब तक कोई भी दल बहुमत का इंतजाम नहीं कर पाया है। हालांकि जेएमएम ने वहां कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा जरूर पेश किया है। झारखंड में जेएमएम और बीजेपी के 18−18 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 13 और बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के पास 11 सीटें है।
बीते दिनों झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अब वह खुद को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बता रही है। जेएमएम के मुताबिक बीजेपी ने 28 महीने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री बदलने का वादा तोड़ दिया और इसी वजह से उन्होंने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इधर, बीजेपी कह रही है कि जेएमएम से उनकी 28−28 महीने के मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर कोई बात नहीं हुई थी।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
झारखंड, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन, अर्जुन मुंडा, Jharkhand, Jharkhand Mukti Morcha, Arjun Munda