नई दिल्ली:
दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इतालवी मरीनों को एक बड़ा झटका देते हुए उच्च्तम न्यायालय ने इटली सरकार के इस आग्रह को खारिज कर दिया कि मामला भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और निर्देश दिया कि उनका मामला विशेष अदालत में चलना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि दोनों विदेशी मरीनों पर अभियोजन चलाना केरल सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। न्यायालय ने कहा कि मामला विशेष अदालत में चलना चाहिए जो प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद केंद्र द्वारा स्थापित की जाएगी।
पीठ ने इटली सरकार द्वारा उसके राजदूत के जरिये दायर की गई याचिका पर यह आदेश जारी किया। इटली सरकार ने अपने मरीनों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के सिलसिले में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए थे। पीठ में न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर भी शामिल हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि विशेष अदालत कहां स्थापित की जाएगी। उसने कहा कि केंद्र सरकार मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद विशेष अदालत का गठन करे।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 4 सितंबर को इतालवी सरकार के आग्रह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका में दोनों इतालवी मरीनों पर मुकदमा चलाने के संबंध में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। मामला 'एनरिका लेक्सी' जहाज पर सवार दो इतालवी नौसैन्य अधिकारियों- मैसिमिलियानो लैटोर और सल्वाटोर गिरोन द्वारा कथित तौर पर दो भारतीय मछुआरों को मारे जाने से संबंधित है। जलदस्युओं के हमले की आशंका से दोनों अधिकारियों ने पिछले साल फरवरी में केरल तट पर मछुआरों पर कथित गोलीबारी की थी, जिनमें दो मछुआरे मारे गए थे।
उच्च न्यायालय ने गत 29 मई को व्यवस्था दी थी कि इतालवी मरीनों पर केरल की कोल्लम अदालत में मुकदमा चलना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 2 मई को सशर्त राहत देते हुए जहाज को चालक दल के अन्य सदस्यों तथा शेष मरीनों के साथ भारतीय तट छोड़ने की अनुमति प्रदान कर दी थी। इन लोगों के समक्ष शर्त रखी गई थी कि जांच और दो गिरफ्तार मरीनों पर अभियोजन के दौरान अधिकारियों को जब भी जरूरत होगी, तो वे उनके समक्ष पेश होंगे। इसने जहाज के मालिक को निर्देश दिया था कि वह चालक दल के सदस्यों और जहाज को जरूरत पड़ने पर पेश करने के लिए मुचलके के रूप में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास तीन करोड़ रुपये की राशि जमा करे।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया कि इससे जांच एवं दो गिरफ्तार मरीनों पर अभियोजन के केरल सरकार के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। घटना के बाद दोनों मरीनों को गिरफ्तार कर उन पर हत्या का आरोप लगाया गया था। उन्हें न्यायिक हिरासत में तिरुवनंतपुरम की केंद्रीय जेल भेज दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि दोनों विदेशी मरीनों पर अभियोजन चलाना केरल सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। न्यायालय ने कहा कि मामला विशेष अदालत में चलना चाहिए जो प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद केंद्र द्वारा स्थापित की जाएगी।
पीठ ने इटली सरकार द्वारा उसके राजदूत के जरिये दायर की गई याचिका पर यह आदेश जारी किया। इटली सरकार ने अपने मरीनों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के सिलसिले में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए थे। पीठ में न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर भी शामिल हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि विशेष अदालत कहां स्थापित की जाएगी। उसने कहा कि केंद्र सरकार मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद विशेष अदालत का गठन करे।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 4 सितंबर को इतालवी सरकार के आग्रह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका में दोनों इतालवी मरीनों पर मुकदमा चलाने के संबंध में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। मामला 'एनरिका लेक्सी' जहाज पर सवार दो इतालवी नौसैन्य अधिकारियों- मैसिमिलियानो लैटोर और सल्वाटोर गिरोन द्वारा कथित तौर पर दो भारतीय मछुआरों को मारे जाने से संबंधित है। जलदस्युओं के हमले की आशंका से दोनों अधिकारियों ने पिछले साल फरवरी में केरल तट पर मछुआरों पर कथित गोलीबारी की थी, जिनमें दो मछुआरे मारे गए थे।
उच्च न्यायालय ने गत 29 मई को व्यवस्था दी थी कि इतालवी मरीनों पर केरल की कोल्लम अदालत में मुकदमा चलना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 2 मई को सशर्त राहत देते हुए जहाज को चालक दल के अन्य सदस्यों तथा शेष मरीनों के साथ भारतीय तट छोड़ने की अनुमति प्रदान कर दी थी। इन लोगों के समक्ष शर्त रखी गई थी कि जांच और दो गिरफ्तार मरीनों पर अभियोजन के दौरान अधिकारियों को जब भी जरूरत होगी, तो वे उनके समक्ष पेश होंगे। इसने जहाज के मालिक को निर्देश दिया था कि वह चालक दल के सदस्यों और जहाज को जरूरत पड़ने पर पेश करने के लिए मुचलके के रूप में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास तीन करोड़ रुपये की राशि जमा करे।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया कि इससे जांच एवं दो गिरफ्तार मरीनों पर अभियोजन के केरल सरकार के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। घटना के बाद दोनों मरीनों को गिरफ्तार कर उन पर हत्या का आरोप लगाया गया था। उन्हें न्यायिक हिरासत में तिरुवनंतपुरम की केंद्रीय जेल भेज दिया गया था।
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