
वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए उसे जीएसटी के दायरे में लाने की मांग हो रही है, लेकिन पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि इस समय राज्य पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं.
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जेटली ने कहा कि अभी अधिकतर राज्य इसके पक्ष में नहीं है, लेकिन मुझे भरोसा है कि जीएसटी के अनुभव को देखते हुए प्राकृतिक गैस, रीयल एस्टेट ऐसे क्षेत्र है. जिसे इसके दायरे में लाया जाएगा और उसके बाद हम पेट्रोल, डीज़ल को इसके दायरे में लाने की कोशिश करेंगे.
जेटली ने कहा कि हम पेट्रोल, डीजल और पीने योग्य अल्कोहल को इसके अंतर्गत लाने का प्रयास करेंगे. पांच पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. इसका कारण इससे बड़ी मात्रा में केंद्र और राज्यों को मिलने वाला राजस्व है.
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उन्होंने कहा कि टैक्स को युक्तिसंगत बनाने का काम जारी रहेगा और जैसे ही राजस्व बढ़ता है, अंतत: 28 प्रतिशत कर स्लैब केवल अहितकर और विलासिता की वस्तुओं के लिए ही रहेगा. उन्होंने कहा, 'जीएसटी को लेकर अब कोई उठापटक नहीं हैं. चीजें सामान्य हो चुकी हैं. अब लगभग हर बैठक में हम शुल्क को युक्तिसंगत बनाने में कामयाब हैं और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी.
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जेटली ने कहा कि हम पेट्रोल, डीजल और पीने योग्य अल्कोहल को इसके अंतर्गत लाने का प्रयास करेंगे. पांच पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. इसका कारण इससे बड़ी मात्रा में केंद्र और राज्यों को मिलने वाला राजस्व है.
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उन्होंने कहा कि टैक्स को युक्तिसंगत बनाने का काम जारी रहेगा और जैसे ही राजस्व बढ़ता है, अंतत: 28 प्रतिशत कर स्लैब केवल अहितकर और विलासिता की वस्तुओं के लिए ही रहेगा. उन्होंने कहा, 'जीएसटी को लेकर अब कोई उठापटक नहीं हैं. चीजें सामान्य हो चुकी हैं. अब लगभग हर बैठक में हम शुल्क को युक्तिसंगत बनाने में कामयाब हैं और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी.
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