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This Article is From Jan 02, 2013

बिना उचित प्रक्रिया के लागू होने से धारा 144 का महत्व खत्म होगा : अदालत

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि यदि प्रशासन सीआरपीसी की धारा 144 को ‘बिना किसी वजह से’ लागू करता है तो यह अपने ‘महत्व’ को खो सकती है क्योंकि नागरिकों को आंदोलन करने, भाषण देने और अभिव्यक्ति का अधिकार है। धारा 144 के जरिये निषेधात्मक आदेश लागू किए जा सकते हैं।

अदालत ने अपनी इस राय के साथ ही 23 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इंडिया गेट के आस-पास निषेधात्मक आदेश लागू किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

मुख्य न्यायाधीश डी मुरूगेसन और न्यायमूर्ति वीके जैन की पीठ ने कहा, ‘‘नागरिकों को आंदोलन करने, भाषण देने और अभिव्यक्ति का अधिकार है। इस धारा (सीआरपीसी की धारा 144 को) को बिना किसी वजह के लागू नहीं किया जा सकता। अन्यथा यह अपना महत्व खो देगी।’’ अदालत ने यह राय दिल्ली के वकील आनंद के मिश्र की जनहित याचिका पर दी।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि निषेधात्मक आदेश ‘मनमाने’ तरीके से लागू किया गया और सीआरपीसी के तहत दी गई प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इस याचिका विरोध किया और कहा कि सीआरपीसी धारा 144 तहत निषेधाज्ञा लागू करने के लिए दिशा-निर्देश नहीं बनाया जा सकता क्योंकि सभी मामले ‘विशिष्ट’ प्रकृति के और अलग-अलग तथ्यों वाले होते हैं।

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