
नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इटली के दो मरीनों पर मुकदमा चलाने का दायित्व यहां की पटियाला हाउस अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को सौंपा है।
उच्च न्यायालय से संबंधित आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अमित बंसल मामले की सुनवाई करेंगे।
उच्चतम न्यायालय के 18 जनवरी के निर्देशों के अनुरूप केंद्र ने 23 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय से दोनों इतालवी मरीनों..मैसिमिलियानो लैटोर और सल्वाटोर गिरोन पर मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष अदालत का गठन करने को कहा था।
इटली के दोनों आरोपी मरीन 22 मार्च को भारत लौट आए थे, जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने चार हफ्ते के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी, ताकि वे अपने यहां आम चुनाव में मतदान में शामिल हो सकें ।
उच्चतम न्यायालय ने इटली सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया था कि इन मरीनों पर मुकदमा चलाने का मामला भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। न्यायालय ने आरोपियों को दिल्ली स्थानांतरित किए जाने और उन्हें केंद्र द्वारा विशेष अदालत का गठन किए जाने तक अपनी ‘हिरासत’ में रखने का निर्देश दिया था ।
शीर्ष अदालत ने 22 फरवरी को सरकार से पूछा था कि वह दोनों मरीनों पर मुकदमे के लिए विशेष अदालत के गठन के मुद्दे पर अपने कदम क्यों खींच रही है।
इसने विशेष अदालत की स्थापना के लिए प्रधान न्यायाधीश से सलाह मशविरा करने के इसके 18 जनवरी के आदेश का पालन नहीं करने के केंद्र के रुख पर भी आपत्ति जताई थी।
उच्च न्यायालय से संबंधित आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अमित बंसल मामले की सुनवाई करेंगे।
उच्चतम न्यायालय के 18 जनवरी के निर्देशों के अनुरूप केंद्र ने 23 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय से दोनों इतालवी मरीनों..मैसिमिलियानो लैटोर और सल्वाटोर गिरोन पर मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष अदालत का गठन करने को कहा था।
इटली के दोनों आरोपी मरीन 22 मार्च को भारत लौट आए थे, जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने चार हफ्ते के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी, ताकि वे अपने यहां आम चुनाव में मतदान में शामिल हो सकें ।
उच्चतम न्यायालय ने इटली सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया था कि इन मरीनों पर मुकदमा चलाने का मामला भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। न्यायालय ने आरोपियों को दिल्ली स्थानांतरित किए जाने और उन्हें केंद्र द्वारा विशेष अदालत का गठन किए जाने तक अपनी ‘हिरासत’ में रखने का निर्देश दिया था ।
शीर्ष अदालत ने 22 फरवरी को सरकार से पूछा था कि वह दोनों मरीनों पर मुकदमे के लिए विशेष अदालत के गठन के मुद्दे पर अपने कदम क्यों खींच रही है।
इसने विशेष अदालत की स्थापना के लिए प्रधान न्यायाधीश से सलाह मशविरा करने के इसके 18 जनवरी के आदेश का पालन नहीं करने के केंद्र के रुख पर भी आपत्ति जताई थी।
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