सरकार ने बीते क़रीब 8 साल में सेज़ के नाम पर औद्योगिक घरानों को जो ज़मीन बांटी है, उसमें एक तिहाई से ज़्यादा का इस्तेमाल ही नहीं हुआ है। जबकि इस अंतराल में लोगों को 83,000 करोड़ रुपये की टैक्स छूट मिल चुकी है। ये खुलासा सीएजी की ताज़ा रिपोर्ट से हुआ है।
वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने जब सेज़ यानी विशेष आर्थिक क्षेत्रों पर सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश की तो ये राज़ खुला कि सेज़ के कायदों का धड़ल्ले से उल्लंघन जारी है। सीएजी की इस रिपोर्ट के मुताबिक, एसईज़ेड के लिए देश में जो क़रीब 45,000 हेक्टेयर ज़मीन निकाली गई, उसमें सिर्फ 28,000 हेक्टेयर ज़मीन पर काम शुरू हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई समूहों ने एसईज़ेड के नाम पर सरकार से ज़मीन लेकर उसे ऊंचे दामों पर बेच दिया और 6 राज्यों में करीब 40000 हेक्टेयर ज़मीन सेज़ के नाम पर निकाली गई, लेकिन इसमें से करीब 5,400 हेक्टेयर ज़मीन का व्यावसायिक इस्तेमाल कर लिया गया।
राज्य सभा सांसद और उद्योगपति राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि एसईज़ेड पॉलिसी जमीन हथियाने की पॉलिसी थी। इसका इस्तेमाल ज़मीन लूटने के लिए किया गया।
सीएजी ने दावा किया है कि सार्वजनिक मक़सद के नाम पर जमीन ली गई, जो गलत था। सीएजी के मुताबिक आंध्र प्रदेश कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में एसईज़ेड की ज़मीन का दुरुपयोग हुआ। 11 समूहों ने ये ज़मीन गिरवी रखकर कर 6,300 करोड़ रुपये उठाए। इनमें से 3 डेवेलपर्स ने 2,200 करोड़ रुपये दूसरे कामों पर खर्च किए।
इस संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी नेता तारिक अनवर कहते हैं कि जिन लोगों ने एसईजे़ड पॉलिसी का दुरुपयोग किया उनकी भूमिका का जांच होनी चाहिए।
ज़मीन के दुरुपयोग से अलग इन कंपनियों ने 83,000 करोड़ से ज़्यादा की टैक्स छूट का फ़ायदा भी कमाया। देश में विशेष आर्थिक ज़ोन के लिए अलॉट की गई ज़मीन के दुरुपयोग का मामला बड़ा है। कैग ने देश में लागू इस नीति पर कई बड़े सवाल उठाए हैं। अब ये देखना अहम होगा कि मोदी सरकार किस तरह इन सवालों से निपटती है।
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