दिग्विजय सिंह और प्रज्ञा ठाकुर के बीच मुकाबले पर पूरे देश की नजर हैं.
नई दिल्ली:
- संघ की तरफ से एक तरह से प्रज्ञा को थोपा गया. बीजेपी पालियामेंट्री पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनाने के मूड में नहीं था. ऐसे में बीजेपी से जुड़ा कार्यकर्ता साध्वी के प्रचार में पूरी तरह जुट नहीं पा रहा है.
- विवादित बयानों ने स्थिति और खराब कर दी है. मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे को लेकर जो बयान दिया, उस पर पार्टी की छीछालेदार हुई. पार्टी ने उनकी राय को निजी बताकर पल्ला झाड़ा लेकिन नुकसान जो होना था, वह हो चुका था. बाद में प्रज्ञा को बयान वापस लेना पड़ा.
- हार्डकोर हिंदुत्ववादी छवि वाली प्रज्ञा ने बाबरी ढांचा विध्वंस पर गर्व होने की बात कहकर अपने आपको उदारवादी मुस्लिम वोटरों और ट्रिपल तलाक मुद्दे को लेकर बीजेपी के समर्थन में आई मुस्लिम महिलाओं का समर्थन भी गंवा सकती हैं.
- भोपाल उत्तर विधानसभा सीट से बीजेपी की मुस्लिम प्रत्याशी ने तो खुले आम प्रज्ञा का प्रचार नहीं करने की बात कर चुकी हैं. वह मालेगांव ब्लास्ट मामले में उनके खिलाफ मुकदमा भी चल रहा है.
- कांग्रेस ने दिग्विजय को काफी पहले प्रत्याशी घोषित करके बढ़त ले ली थी. बीजेपी ने भोपाल से प्रत्याशी चयन में काफी वक्त लिया. बाद में प्रत्याशी घोषित किया गया तो विवादित छवि और मालेगांव और मक्का मजिस्द मामले में आरोपी होने के कारण स्थिति और खराब हुई.
- प्रज्ञा पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी आरोप लग रहे हैं. हिंदुओं में भी कुछ हद तक उनको लेकर नाराजगी. उनका मानना है कि प्रज्ञा, असीमानंद जैसे लोगों ने हिंदू धर्म पर लोगों को अंगुली उठाने का मौका दिया.
- भले ही दिग्विजय की छवि मुस्लिम परस्त नेता की है, लेकिन राजनीतिक चातुर्य और लंबी सियासी अनुभव के कारण उन्हें प्रज्ञा के मुकाबले मजबूत माना जा रहा.
- प्रज्ञा को राजनीति का अनुभव नहीं है. छवि कट्टरवादी हिंदु की है. विरोधाभासी और विवादित बयानों के कारण माना जा रहा है कि बीजेपी के कई प्रदेश स्तर के नेता प्रज्ञा के पक्ष में खुलकर सामने नहीं आ रहे.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Lok Sabha Elections 2019, Lok Sabha Polls 2019, Digvijay Singh Vs Pragya Thakur