New Delhi:
जानी−मानी पत्रिका तहलका में छपी एक रिपोर्ट बता रही है कि कैश फॉर वोट का पूरा मामला बीजेपी ने सरकार को फंसाने के लिए ख़ुद खड़ा किया। लोकसभा में बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने भी यही आरोप लगाया। 22 जुलाई 2008 की शाम संसद में इस शर्मनाक नज़ारे के पीछे की हकीकत क्या है। क्या बीजेपी के इन तीन सांसदों− अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा को यूपीए ने खरीदने की कोशिश की या खुद बीजेपी ने इन तीनों के जरिए जाल बिछाकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को वोट के लिए नोट के मामले में फंसाया और एक चैनल की मदद से स्टिंग ऑपरेशन की कोशिश की। तहलका का कहना है कि स्टिंग का ये जाल बीजेपी ने बिछाया, समाजवादी पार्टी इसमें फंस गई और कांग्रेस ने इसे रफ़ा−दफ़ा करने की कोशिश की। तहलकाडॉटकॉम पर आए ताज़ा ख़ुलासे यही बता रहे हैं। इन ख़ुलासों के मुताबिक इस स्टिंग ऑपरेशन में अरुण जेटली और सुधींद्र कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं की भूमिका रही। 21 जुलाई की रात एक दलाल की मार्फत बीजेपी के इन सांसदों ने अहमद पटेल से मिलने की कोशिश की। नाकाम रहने पर वो अपने लिए ख़रीददार खोजते रहे। तहलका के पास इन सांसदों के फोन कॉल के टैप भी हैं। स्टिंग ऑपरेशन के बाद जेटली और आडवाणी जैसे नेताओं ने रिपोर्टर को बधाई दी।