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This Article is From Apr 14, 2023

G-20 समिट के लिए श्रीनगर तैयार, दुनिया को दिखेगी 'नए कश्मीर' की तस्वीर

अगले महीने श्रीनगर में G-20 की बैठक को एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है कि जिसमें कश्मीर अशांति की छाया से बाहर आ रहा है. साथ ही पाकिस्तान के प्रभाव से अलग हो रहा है.

G-20 की अध्यक्षता कर रहा भारत पहले ही कह चुका है कि देश के 28 राज्यों में G-20 से जुड़ी बैठकें होंगी.
नई दिल्ली:

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में G-20 की बैठक कराने का फैसला किया है. श्रीनगर में 22 और 23 मई को  G-20 की बैठक होगी. 2019 में विशेष संवैधानिक दर्जा (Article 370 ) हटने के बाद कश्‍मीर में पहली इंटरनेशनल समिट भी होगी. पर्यटन को लेकर G-20 के तीसरे वर्किंग ग्रुप की बैठक का महत्व कश्मीर में पर्यटन से परे है. यहां बैठक करना ही अपने आप में वैश्विक स्तर पर भारत का बड़ा बयान है कि कश्मीर में अब कोई विवाद नहीं है. यह भारत का अभिन्न अंग है. वहीं, दुनिया के सबसे ताकतवर क्लब G-20 की बैठक को भारत के रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा सकता है. 

चीन और पाकिस्तान ने किया विरोध
चीन और पाकिस्तान लगातार G-20 बैठक जम्मू-कश्मीर में कराए जाने का विरोध कर रहे हैं. पाकिस्तान G-20 में शामिल अपने समर्थक देशों को साधकर इस बैठक का विरोध कर रहा था. चीन ने अपने दोस्त पाकिस्तान का साथ देते हुए मार्च में ही कहा था कि G-20 की बैठक जम्मू-कश्मीर में नहीं होनी चाहिए.

भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को किया खारिज
हालांकि, G-20 की अध्यक्षता कर रहा भारत पहले ही कह चुका है कि देश के 28 राज्यों में G-20 से जुड़ी बैठकें होंगी. इसी के तहत अरुणाचल और कश्मीर में भी यह बैठकें रखी गई हैं. अरुणाचल की राजधानी ईटानगर में मार्च के आखिरी हफ्ते G-20 की बैठक हुई थी. चीन ने इससे दूरी बनाई थी. भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को भी खारिज कर दिया है. गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बैठकें करना स्वाभाविक था, क्योंकि यह देश का अभिन्न अंग है. 

सभी देशों के भाग लेने पर संशय
अब तक, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि क्या सभी G-20 देश श्रीनगर में होने वाली बैठक में भाग ले रहे हैं. विशेष रूप से चीन और तुर्की जो कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के प्रबल समर्थक हैं. ग्राउंड जीरो पर तैयारियां जोरों पर हैं. पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग इसे पर्यटन को बढ़ावा देने और कश्मीर को संघर्ष और उग्रवाद के चश्मे से अलग दिखाने के लिए एक प्रमुख घटना के रूप में देखते हैं. 

पर्यटन को भी बढ़ावा
जम्‍मू-कश्‍मीर के पर्यटन सचिव सैयद आबिद रशीद ने कहा- 'तैयारी जोरों पर चल रही हैं. श्रीनगर G-20 प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए खुद को तैयार कर रहा है.' उन्‍होंने कहा-'यह सभी के लिए बड़ा अवसर है. मैं इस अवसर पर आपके माध्यम से देश के बाकी हिस्सों से सभी को आमंत्रित करना चाहता हूं. हमारे पास पर्यटन की बड़ी भागीदारी थी. पिछले साल यहां रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक आए. हम इसे जम्मू-कश्मीर को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का बेहतरीन अवसर देखते हैं.' 

अमित शाह ने तैयारियों की समीक्षा की
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को श्रीनगर में G-20 बैठक की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शीर्ष अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. जम्मू-कश्मीर प्रशासन सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आता है. अगस्त 2019 में इस क्षेत्र का राज्य का दर्जा हटा दिया गया था और इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था. 

श्रीनगर में हो रहा बदलाव
कश्मीर में G-20 बैठक के लिए एक विस्तृत सुरक्षा योजना के अलावा श्रीनगर में एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है. यहां फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनाए जा रहे हैं. यहां तक ​​कि झेलम नदी के किनारे के हरे भरे स्थानों को कंक्रीट के जंगलों में बदल दिया गया है. निवासियों को मुख्य सड़कों के किनारे स्थित अपने घरों और संपत्तियों के फ्रंट एरिया में सुधार करना है. 

कश्मीर की बदलती तस्वीर दिखाना भी मकसद
आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद केंद्र सरकार ने घाटी में विदेशी राजनयिकों को चार यात्राओं की सुविधा दी है. इसका स्पष्ट रूप से कश्मीर पर व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रभाव पड़ा है. अगले महीने श्रीनगर में G-20 की बैठक को एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है कि जिसमें कश्मीर अशांति की छाया से बाहर आ रहा है. साथ ही पाकिस्तान के प्रभाव से अलग हो रहा है.


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