Indian Students In Iran: जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और परीक्षाओं को स्थगित करने के लिए कहा है. इसे लेकर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को चिट्ठी लिखी गई है. ये लेटर भारत सरकार की तरफ से 23 फरवरी 2026 को ईरान स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से जारी की गई एडवाइजरी के बाद भेजा गया है. अपने इस लेटर में एसोसिएशन ने सरकार की तरफ से भारतीय नागरिकों को ईरान से भारत लौटने की सलाह देने की समय पर की गई पहल की सराहना की है, लेकिन इसने उन भारतीय छात्रों की गंभीर चिंताओं को उजागर किया है, जो अभी महत्वपूर्ण शैक्षिक परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं. इनमें जम्मू और कश्मीर से भी कई छात्र शामिल हैं.
कब होनी है परीक्षा?
जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक, नसीर खुहामी ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में चल रही सेमेस्टर परीक्षाओं के अलावा, दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाएं उलूमपाया (कम्प्रिहेंसिव बेसिक साइंस परीक्षा) और प्री-इंटर्नशिप परीक्षा 5 मार्च 2026 को होने वाली हैं. ये दोनों परीक्षाएं ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय की तरफ से आयोजित की जाती हैं और मेडिकल शिक्षा के लिए अनिवार्य मील के पत्थर मानी जाती हैं.
विदेश मंत्रालय से की ये मांग
एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वे विशेष रूप से उन छात्रों के लिए स्पष्ट और उचित मार्गदर्शन दें, जिनकी परीक्षाएं नजदीक हैं, ताकि वे आधिकारिक सलाह के अनुरूप सूचित और जिम्मेदार फैसला ले सकें. साथ ही, एसोसिएशन ने मंत्रालय से ईरान में संबंधित विश्वविद्यालयों और अधिकारियों से संपर्क करने का अनुरोध किया है, ताकि भारतीय छात्रों के लिए शैक्षिक लचीलापन, परीक्षा स्थगन या वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा सकें, अगर उन्हें भारत लौटने के लिए तुरंत अनुमति दी जाती है.
एसोसिएशन ने इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कहा कि छात्रों के बीच घबराहट और भ्रम को रोकने के लिए स्पष्टता और संवाद जरूरत है. एसोसिएशन ने मंत्रालय और ईरान स्थित भारतीय दूतावास को यह आश्वासन दिया है कि वह प्रभावित छात्रों के साथ मिलकर सत्यापित जानकारी देने और समन्वय स्थापित करने में पूरा सहयोग करेगा. एसोसिएशन ने दोहराया कि भारतीय छात्रों की सुरक्षा और शैक्षिक भविष्य को एक साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए और यह उम्मीद जताई कि सरकार समय रहते हस्तक्षेप करेगी ताकि कोई भी छात्र अपनी सुरक्षा और शैक्षिक वर्ष के नुकसान के बीच चयन करने के लिए मजबूर न हो.
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